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देवर्षि नारद पत्रकारों के लिये श्रेष्ठ आदर्श – राहुल देव

जयपुर (विसंकें). वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने कहा कि वामपंथ ने हमारे भारतीय आत्मबोध को बहुत नुकसान पहुंचाया है, किन्तु वामपंथ अब भारत में चुनौती नहीं रहा है. अंग्रेजी तथा अंग्रेजियत भारतीयता के लिए सबसे बड़ा खतरा है. भारतीय भाषाओं के घटते प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी भाषा बदलने के साथ-साथ चेतना भी बदल रही है. आने वाले समय में भारत आर्थिक रूप से निश्चित तौर पर प्रगति करेगा, किंतु भारतीयता के स ...

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भारतीय पत्रकारिता के केंद्र में राष्ट्रीयता को रखना होगा – सुभाष सिंह

मेरठ (विसंकें). उत्तर प्रदेश के सूचना आयुक्त सुभाष सिंह ने कहा कि पत्रकारिता में भारतीय संस्कृति के मूल्यों, परम्पराओं को यदि जीवित रखना है तो भारतीय पत्रकारिता के केन्द्र में राष्ट्रीयता को रखना होगा. पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के कारण भारतीय पत्रकारिता भी उससे प्रभावित हुई है. अब समय है, उस प्रभाव से बाहर आने का. वे विश्व संवाद केन्द्र द्वारा आयोजित नारद सम्मान समारोह में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा ...

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देवर्षि नारद का कार्य सकारात्मकता को बढ़ाना था – भाग्येश झा

गुजरात. विश्व संवाद केंद्र गुजरात द्वारा नारद जयंती के उपलक्ष्य में पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मुख्य वक्ता भाग्येश झा (साहित्यकार तथा पूर्व सुचना आयुक्त, गुजरात) ने कहा कि नारद का कार्य सकारात्मक बातों (Positive Journalism)  को बाहर लाना था. यह काम बिना किसी भेदभाव के करने वाला ही नारद का अनुयायी हो सकता है. वि.सं.कें. द्वारा आज जिन 6 महानुभावों का सम्मान किया गया, उनका चयन बहुत ...

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मीडिया के समक्ष अपनी विश्वसनीयता को बचाए रखने की चुनौती – मकरंद परांजपे

जालंधर (विसंकें). विश्व संवाद समिति जालंधर ने नारद जयंती के उपलक्ष्य में स्थानीय विद्या धाम, श्री गुरु गोबिंद सिंह एवेन्यू में "फेक न्यूज़, फेक नैरेटिव के दौर में लोकतंत्र प्रहरी मीडिया की साख" विषय पर संगोष्ठी आयोजित की. कार्यक्रम में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडी, शिमला के डायरेक्टर मकरंद परांजपे मुख्य वक्ता, सेवानिवृत्त असिस्टेंट स्टेशन डायरेक्टर, दूरदर्शन केंद्र, जालंधर सरदार मनोहर सिंह भारज अध्य ...

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पत्रकार को पेशेवर दर्जा और मीडिया को जिम्मेदारी का अहसास हो – विष्णु कोकजे जी

देवर्षि नारद पत्रकार सम्मान समारोह पुणे (विसंकें). विश्व हिन्दू परिषद् के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश विष्णु कोकजे जी ने कहा कि पत्रकारिता एक व्यवसाय है. लेकिन कानून में इस व्यवसाय को कहीं भी मान्यता नहीं है. इसलिए पत्रकार को पेशेवर दर्जा और साथ ही मीडिया को जिम्मेदारी का अहसास होना चाहिए. पत्रकारिता में व्याप्त दुष्प्रवृत्तियों के लिए जिम्मेदार और प्रतिष्ठित पत्रकारों को उत्तर देना पड़ता है. ...

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संस्कृति का स्मृतिभ्रंश ही देश में बड़ी समस्या – अरुण कुमार जी

नागपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार जी ने कहा कि अपने देश का इतिहास गौरवशाली रहा है. मात्र ब्रिटिश शिक्षा पद्धति के कारण नागरिकों की विचार करने की प्रवृत्ति ही बदल गई है. इसके चलते हम लोग अपने ही इतिहास पर प्रश्नचिन्ह लगाने लगे हैं. अपनी संस्कृति परंपरा के बारे में होता स्मृतिभ्रंश ही देश के सामने बड़ी समस्या बन कर उभरी है. इसलिये समाज के सभी क्षेत्रों में भारतीय ...

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लोक बोलियों को लिखने – बोलने में करें शामिल – जगदीश उपासने जी

पटना (विसंकें). माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति जगदीश उपासने जी ने कहा कि स्थानीय बोली बोलने पर आज की पीढ़ी हीनता की भावना महसूस करती है. यह संपूर्ण समाज व देश के लिए चिंता की बात है. आज अगली पीढ़ी को लोक शब्दों की जानकारी नहीं है, इसके लिए किसी बाहरी ताकत को जिम्मेदार ठहराने की बजाय हरेक व्यक्ति लोक भाषा का प्रयोग करना शुरु करे तो हम अपनी जड़ों से जुड़े रह सकते हैं. जगदीश जी शनिवार को विश् ...

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तटस्थ पत्रकारिता आज की आवश्यकता – विजय रुपाणी जी

गुजरात (विसंकें). विश्व संवाद केंद्र, गुजरात द्वारा नारद जयंती के अवसर पर पत्रकार सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस वर्ष सम्मानित पत्रकारों में जपनभाई पाठक (Cyber Journalism), आरती बहन पटेल (Radio Journalism), कौशिक भाई मेहता, संपादक फूलछाब (Print Media), निर्णय कपूर, Sub-Editor (Electronic Media), नगेन्द्र विजयजी (सफारी मैगज़ीन) तथा झवेरीलाल मेहता (Photo Journalist, Gujarat Samachar) को Life Time Achie ...

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1971 के युद्ध में जीते हिस्से को राजनीतिक असफलता के कारण खो दिया – नरेंद्र कुमार जी

देहरादून (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र कुमार जी ने कहा कि हमने स्वतन्त्रता का उत्सव भौगोलिक आधार पर मनाया था. 1947 में अंग्रेजों ने भारत से स्वतंत्रता के जिस दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराये थे, वह वास्तव में विभाजन का दस्तावेज था. नरेंद्र जी विश्व संवाद केन्द्र द्वारा आयोजित ‘आजादी के सत्तर साल, क्या खोया, क्या पाया ?’ स्मारिका ‘संवाद’ के विमोचन अवसर पर संबोधित कर रह ...

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देहरादून में ‘आपातकाल की यादें’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन

देहरादून (विसंकें). विश्व संवाद केन्द्र और उत्तरांचल उत्थान परिषद देहरादून द्वारा डीएवी (पीजी) कॉलेज के दीनदयाल सभागार में ‘आपातकाल की यादें’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री एवं नैनीताल से सांसद भगत सिंह कोश्यारी जी ने कहा कि आपातकाल देश के लोकतंत्र पर काला धब्बा था. इसको याद करना और नई पीढ़ी को यह बताना हम सबकी जिम्मेदारी है. भविष्य में देश ऐसे किसी संकट में न फंसे, इस ...

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