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वे पंद्रह दिन… / 03 अगस्त, 1947

आज के दिन गांधीजी की महाराजा हरिसिंह से भेंट होना तय थी. इस सन्दर्भ का एक औपचारिक पत्र कश्मीर रियासत के दीवान, रामचंद्र काक ने गांधीजी के श्रीनगर में आगमन वाले दिन ही दे दिया था. आज 03 अगस्त की सुबह भी गांधीजी के लिए हमेशा की तरह ही थी. अगस्त का महीना होने के बावजूद किशोरीलाल सेठी के घर अच्छी खासी ठण्ड थी. अपनी नियमित दिनचर्या के अनुसार गांधी जी मुंह अंधेरे ही उठ गए थे. उनकी नातिन ‘मनु’ तो मानो उनकी परछाईं ...

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वे पन्द्रह दिन…/ 02 अगस्त 1947

17, यॉर्क रोड.... इस पते पर स्थित मकान, अब केवल दिल्ली के निवासियों के लिए ही नहीं, पूरे भारत देश के लिए महत्त्वपूर्ण बन चुका था. असल में यह बंगला पिछले कुछ वर्षों से पंडित जवाहरलाल नेहरू का निवास स्थान था. भारत के ‘मनोनीत’ प्रधानमंत्री का निवास स्थान. और इस उपनाम या पद में से ‘मनोनीत’ शब्द मात्र तेरह दिनों में समाप्त होने वाला था. क्योंकि 15 अगस्त से जवाहरलाल नेहरू स्वतन्त्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रू ...

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वे पन्द्रह दिन… / 01 अगस्त, 1947

शुक्रवार, 01 अगस्त 1947. यह दिन अचानक ही महत्त्वपूर्ण बन गया. इस दिन जम्मू कश्मीर के सम्बन्ध में दो प्रमुख घटनाएं घटीं, जो आगे चलकर बहुत महत्त्वपूर्ण सिद्ध होने वाली थीं. इन दोनों घटनाओं का आपस में वैसे तो कोई सम्बन्ध नहीं था, परन्तु आगे होने वाले रामायण-महाभारत में इनका स्थान आवश्यक होने वाला था. 01 अगस्त को गांधी जी श्रीनगर पहुँचे, यह थी वह पहली बात. गांधी जी का यह पहला ही जम्मू-कश्मीर दौरा था. इससे पहले ...

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