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03 जुलाई / पुण्यतिथि – विरक्त सन्त: स्वामी रामसुखदास जी

नई दिल्ली. धर्मप्राण भारत में एक से बढ़कर एक विरक्त सन्त एवं महात्माओं ने जन्म लिया है. ऐसे ही सन्तों में शिरोमणि थे परम वीतरागी स्वामी रामसुखदेव जी महाराज. स्वामी जी के जन्म आदि की ठीक तिथि एवं स्थान का प्रायः पता नहीं लगता, क्योंकि इस बारे में उन्होंने पूछने पर भी कभी चर्चा नहीं की. फिर भी जिला बीकानेर (राजस्थान) के किसी गाँव में उनका जन्म 1902 ई. में हुआ था, ऐसा कहा जाता है. उनका बचपन का नाम क्या था, यह ...

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17 जुलाई / पुण्य-तिथि; आजीवन संघर्षशील जे.गौरीशंकर

आंध्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अन्य हिन्दू संगठनों के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा नक्सलवादी कम्युनिस्ट रहे हैं. इन हिंसक और विदेश प्रेरित आतंकियों से उनकी ही भाषा में बात कर उन्हें हटने को मजबूर करने वाले श्री जनमंच गौरीशंकर का जन्म 15 दिसम्बर, 1949 को आंध्र प्रदेश के नेल्लूर जिले के कोवूर ग्राम में हुआ था. उनके पिता श्री लक्ष्मीशंकर शर्मा तथा माता श्रीमती शारदाम्बा थीं. कक्षा 10 तक की शिक्षा गांव में ही ...

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23 जून / बलिदान-दिवस : डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी

छह जुलाई, 1901 को कोलकाता में श्री आशुतोष मुखर्जी एवं योगमाया देवी के घर में जन्मे डा. श्यामाप्रसाद मुखर्जी को दो कारणों से सदा याद किया जाता है. पहला तो यह कि वे योग्य पिता के योग्य पुत्र थे. श्री आशुतोष मुखर्जी कलकत्ता विश्वविद्यालय के संस्थापक उपकुलपति थे.1924 में उनके देहान्त के बाद केवल 23 वर्ष की अवस्था में ही श्यामाप्रसाद को विश्वविद्यालय की प्रबन्ध समिति में ले लिया गया. 33 वर्ष की छोटी अवस्था में ह ...

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19 जून / जन्म-दिवस: आत्मविलोपी व्यक्तित्व : श्रीपति शास्त्री

संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता, इतिहास के प्राध्यापक तथा राजनीति, समाजशास्त्र, साहित्य आदि विषयों के गहन अध्येता श्रीपति सुब्रमण्यम शास्त्री का जन्म 19 जून, 1935 को कर्नाटक राज्य के चित्रदुर्ग जिले के हरिहर ग्राम में हुआ था. बालपन में ही वे स्वयंसेवक बने तथा अपने संकल्प के अनुसार अविवाहित रहकर अंतिम सांस तक संघ कार्य करते रहे. 1956 में वे मैसूर नगर कार्यवाह बने. उस दौरान उन्होंने मैसूर वि.वि. से इतिहास में स्वर्ण ...

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