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19 मई / जन्मदिवस – संघर्षप्रिय एवं जुझारू मधुसूदन जी

नई दिल्ली. मधुसूदन जी का जन्म 19 मई, 1956 को ग्राम सीसवाली (जिला बारां, राजस्थान) में प्रभुलाल मोरवाल जी के घर में हुआ था. घर में कुछ खेती भी थी, पर उनके परिवार में बाल काटने का पुश्तैनी काम होता था. यद्यपि नयी पीढ़ी के लोग शिक्षित होकर निजी और सरकारी सेवाओं में भी जा रहे थे. अपने गांव में रहते हुये उन्होंने ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ के माध्यम से छात्रों के हित में संघर्ष किया. इससे वे शीघ्र ही विद्यार ...

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14 मई / पुण्यतिथि – उत्कृष्ट लेखक भैया जी सहस्रबुद्धे

नई दिल्ली. प्रभावी वक्ता, उत्कृष्ट लेखक, कुशल संगठक, व्यवहार में विनम्रता व मिठास के धनी प्रभाकर गजानन सहस्रबुद्धे का जन्म खण्डवा (मध्य प्रदेश) में 18 सितम्बर, 1917 को हुआ था. उनके पिताजी वहां अधिवक्ता थे. वैसे यह परिवार मूलतः ग्राम टिटवी (जलगाँव, मध्य प्रदेश) का निवासी था. भैया जी जब नौ वर्ष के ही थे, तब उनकी माताजी का देहान्त हो गया. इस कारण तीनों भाई-बहिनों का पालन बदल-बदलकर किसी सम्बन्धी के यहां होता रह ...

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13 मई / जन्मदिवस – ‘दिल्लीश्वर’ वसंतराव ओक

नई दिल्ली. संघ की प्रारम्भिक प्रचारकों में एक श्री वसंतराव कृष्णराव ओक का जन्म 13 मई, 1914 को नाचणगांव (वर्धा, महाराष्ट्र) में हुआ था. जब वे पढ़ने के लिये अपने बड़े भाई मनोहरराव के साथ नागपुर आये, तो बाबासाहब आप्टे द्वारा संचालित टाइपिंग केन्द्र के माध्यम से दोनों का सम्पर्क संघ से हुआ. डा. हेडगेवार के सुझाव पर वसंतराव 1936 में कक्षा 12 उत्तीर्ण कर शाखा खोलने के लिए दिल्ली आ गये. उनके रहने की व्यवस्था 'हिन् ...

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मुस्लिम व ईसाई बंधुओं के बारे में संघ की सोच

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का लक्ष्य सम्पूर्ण समाज को संगठित कर अपने हिन्दू जीवन दर्शन के प्रकाश में समाज की सर्वांगीण उन्नति करना यह है. रा.स्व.संघ का कार्य किसी भी मजहब विशेष के विरुद्ध नहीं है. परन्तु किसी भी प्रकार की राष्ट्र विरोधीगतिविधि का संघ हमेशा विरोध करता आया है. समाज के वामपंथी एवं तथाकथित सेकुलर लेखक, जों संघ के विरुद्ध लगातार झूठा और गलत प्रचार करते आये है, संघ को मुस्लिम एवं ईसाई विरोधी बताने क ...

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महान नारी उद्धारक : देवीदास आर्य

3 जून/जन्म-दिवस श्री देवीदास आर्य का जन्म 3 जून, 1922 को ग्राम केहर (जिला सक्खर, सिन्ध) में श्री विद्याराम एवं श्रीमती पद्मादेवी हजारानी के घर में हुआ था. 1939 में मुस्लिम दंगों के कारण पढ़ाई अधूरी छोड़कर उन्हें गांव त्यागना पड़ा. निजाम हैदराबाद द्वारा हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध हुए आंदोलन में वे 149 दिन जेल में रहे. इसके बाद मैट्रिक कर उन्होंने आठ साल तक पढ़ाया. 1942 के आंदोलन में भी वे सक्रि ...

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भारत की जनशक्ति के सदुपयोग से आयेंगे अच्छे दिन

कानपुर. विश्व संवाद केंद्र में नारद जयन्ती के उपलक्ष्य में बोलते हुये श्री नरेन्द्र जी (उत्तर क्षेत्र प्रचार प्रमुख) ने कहा कि नारद जी अपनी शक्ति सदैव "सर्वोन्नति एवं सर्वजन हिताय" के उच्चतम उद्देश्य की पूर्ति में लगाते थे. उन्होंने देवताओं की सकारात्मक और दानवों की नकारात्मक दोनों शक्तिओं का सदुपयोग कर समुद्र मन्थन जैसे असम्भव कार्य को सम्भव किया, जिससे निकले धनवन्तरि द्वारा आयुर्वेद जैसे रत्न की उत्पत्ति ...

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संघ और व्यक्ति पूजा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समझना आसान नहीं है. इसका मुख्य कारण यह है कि संघ वर्तमान में प्रचलित किसी राजनीतिक पार्टी या सामाजिक संस्था या संगठन के ढांचे में नहीं बैठता. कुछ लोगों को लगता हैं कि संघ में तानाशाही पद्धति से काम चलता हैं तो कुछ अन्य लोग यह दावा करते हैं कि संघ में नेतृत्व की पूजा होती हैं. ये दोनों भी सत्य से बिल्कुल परे हैं. व्यक्ति पूजा नहीं संघ के संस्थापक ने ऐसी एक कार्यशैली का आविष्कार किय ...

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ–एक परिचय

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ मनमोहन वैद्य संघ के कार्यकलाप, विभिन्न गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी दे रहे है.   ...

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आधुनिक विश्वकर्मा बड़े भाई रामनरेश सिंह

2 मई/पुण्य-तिथि बड़े भाई रामनरेश सिंह का जन्म 1925 की दीपावली के शुभ दिन ग्राम बघई (मिर्जापुर, उ.प्र.) में एक सामान्य किसान श्री दलथम्मन सिंह के घर में हुआ था.1942 में हाईस्कूल कर चुनार तहसील में नकल नवीस के नाते उनकी नौकरी लग गयी. जब वहां सायं शाखा प्रारम्भ हुई, तो ये तहसील की निर्धारित वेशभूषा में ही वहां आने लगे. शाखा पर आने वालों में सबसे बड़े थे. अतः सब इन्हें ‘बड़े भाई’ कहने लगे. उन दिनों माधव जी देशम ...

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निष्ठावान स्वयंसेवक बंसीलाल सोनी

1 मई/जन्म-दिवस संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री बंसीलाल सोनी का जन्म एक मई, 1930 को वर्तमान झारखंड राज्य के सिंहभूम जिले में चाईबासा नामक स्थान पर अपने नाना जी के घर में हुआ था. इनके पिता श्री नारायण सोनी तथा माता श्रीमती मोहिनी देवी थीं. इनके पुरखे मूलतः राजस्थान के थे, जो व्यापार करने के लिये इधर आये और फिर यहीं बस गये. बाल्यावस्था में ही उन्होंने अपने बड़े भाई श्री अनंतलाल सोनी के साथ शाखा जाना प्रारम्भ किया. ...

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