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घर, विद्यालय और समाज में हो एक जैसी शिक्षा – डॉ. मोहन भागवत जी

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि कोई भी ग्रन्थ अंतिम शब्द नहीं होता. ग्रन्थ पोथी बद्धता को बढ़ाने वाले नहीं होने चाहिए, जबकि हम सभी पोथीबद्ध हो जाते हैं. औपनिवेशिक काल में स्वामी विवेकानंद, रविन्द्र नाथ ठाकुर, महात्मा गांधी जैसे हमारे महापुरुषों ने हालांकि मैकाले की शिक्षा पद्धति से शिक्षा प्राप्त की, लेकिन वे इससे अप्रभावित रहे और भारतीय शिक्षा पद्धति पर ही ध्यानाक ...

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दुनिया के सभी देशों का भारत के प्रति विश्वास बढ़ा है – डॉ. मोहन भागवत जी

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि प्रमाणिकता भारत का बड़ा संबल है, स्वाधीनता के बाद लालबहादुर शास्त्री जी ने पहले केंद्रीय मंत्री और फिर प्रधानमंत्री के रूप में उसे आगे बढ़ाया. वही प्रमाणिकता आज फिर दिख रही है, जिससे भारत की धाक दुनिया में बढ़ी है. सरसंघचालक जी लालबहादुर शास्त्री तकनीकी इंटरमीडिएट कॉलेज मांडा में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लालबहादुर शास्त्री जी व ...

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श्रीधाम वृंदावन में तीन दिवसीय समन्वय बैठक का शुभारंभ

वृंदावन (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी और सरकार्यवाह भय्याजी जोशी द्वारा भारत माता की प्रतिमा को पुष्पार्चन कर शुक्रवार को त्रिदिवसीय समन्वय बैठक का प्रारम्भ हुआ. सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी जी ने बैठक की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि भारत की प्राचीन आध्यात्मिक विचारधारा को लेकर हम सभी संगठन समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं. बदलते हुए विश्व परिदृश्य, देश की पर ...

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विश्व कल्याण का काम भारत ही कर सकता है  – डॉ. मोहन भागवत जी

नागपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत में पंथ, भाषा, परंपरा, पर्यावरण में विविधता है, फिर भी यह एकता की भूमि है. क्योंकि यहाँ हिन्दू बहुसंख्यक हैं और हिन्दू विचार की दृष्टि सबको स्वीकार करती है. ऐसे सबको स्वीकार करने वाले लोगों का देशव्यापी समूह निर्माण करने का काम संघ कर रहा है. सरसंघचालक जी नागपुर में संघ शिक्षा वर्ग तृतीय वर्ष के समारोप कार्यक्रम में संबो ...

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सफल होने के साथ-साथ व्यक्ति का जीवन उद्देश्यपूर्ण भी होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

नई दिल्ली (इंविसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि जीवन में सफल होने के साथ-साथ जीवन को उद्देश्यपूर्ण भी होना चाहिए. तभी मनुष्य को प्राप्त विद्या सार्थक होती है. ऐसे उत्कृष्ट कार्य को विद्या भारती पूरी मेहनत के साथ कर रही है. सरसंघचालक मोहन भागवत जी 23 मई को विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान से संबंधित समर्थ शिक्षा समिति द्वारा संचालित राव मेहर चंद सरस्वती विद्या म ...

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05 मई / जन्मदिवस – सेवा के धाम विष्णु कुमार जी

नई दिल्ली. सेवा पथ के साधक विष्णु जी का जन्म कर्नाटक में बंगलौर के पास अक्कीरामपुर नगर में 5 मई, 1933 को हुआ था. छह भाई और एक बहन वाले परिवार में वे सबसे छोटे थे. घर में सेवा व अध्यात्म का वातावरण होने के कारण छह में से दो भाई संघ के प्रचारक बने, जबकि दो रामकृष्ण मिशन के संन्यासी. विष्णु जी का मन बचपन से ही निर्धनों के प्रति बहुत संवेदनशील था. छात्रावास में पढ़ते समय घर से मिले धन और वस्त्रों को वे निर्धनों ...

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कोई भी काम और मनुष्य छोटा-बड़ा नहीं होता, सब समान होते हैं – डॉ. मोहन भागवत जी

सेवाभारती के रजत जयंती वर्ष एवं संत रविदास जयंती के अवसर पर भोपाल में आयोजित श्रम साधक संगम में शामिल हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी भोपाल (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि संत रविदास महाराज ने हमें अपने काम और व्यवहार से संदेश दिया था कि कोई भी काम और मनुष्य छोटा-बड़ा नहीं होता, सब समान होते हैं. हमें अपने श्रम को हल्का नहीं मानना चाहिए. समाज को उसकी आवश्यकता है, ...

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धर्म का मतलब केवल पूजा नहीं है – डॉ. मोहन भागवत जी

धर्म संपूर्ण सृष्टि को जोड़कर रखता है, जीवन सहित सृष्टि की उन्नति करता है - डॉ. मोहन भागवत जी जमशेदपुर (विसंकें). 68वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर बिष्टुपुर स्थित गुजराती सनातन समाज में राष्ट्रध्वज को सलामी देने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि राष्ट्र ध्वज के बीच में जो नीले रंग का चक्र है, वह धर्म चक्र है. धर्म का मतलब केवल पूजा नहीं है. सारे जीवन की जिससे धारणा होती है ...

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परम पूज्य सरसंघचालक ने किया ‘समग्र वंदे मातरम’ का विमोचन

मुंबई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने मंगलवार, 16 दिसंबर को लोगों से ‘वंदे मातरम’ पर लिखी गयी एक पुस्तक पढ़ने का परामर्श जेते हे कहा कि इन दो शब्दों ने पिछले 140 सालों से देश को प्रेरित किया है. परम पूज्य ‘समग्र वंदे मातरम’ ग्रंथ के दो अंकों का विमोचन करने के बाद शाम यहां एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे. यह किताब बंकिम चंद्र चटर्जी की प्रसिद्ध रचना पर केंद्रित है ...

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दैनिक शाखा से नागरिकों में गुणवत्ता निर्माण होती है : पूज्य सरसंघचालक

आगरा. वर्तमान में विश्व में जितने सम्पन्न राष्ट्र हैं, वे अपने देश के नेताओं, राजनीतिक दलों तथा संस्थाओं के कारण नहीं, अपने नागरिकों की गुणवत्ता, राष्ट्रभक्ति और उसके प्रति समर्पण से बने है. यह तथ्य देश के इतिहास को उठा कर देख लें, अगर भारत को भी परम वैभवशाली राष्ट्र बनाना है तो अपने देश के लोगों में गुणवत्ता लाने के साथ-साथ उनमें राष्ट्र बोध जगाना होगा. अमेरिका और जापान भी इसी रास्ते से चल कर आज वैभव के शि ...

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