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संघ शिक्षा वर्ग – तृतीय वर्ष (नागपुर) समापन समारोह में पू. सरसंघचालक जी का उद्बोधन

वर्ग के मा. सर्वाधिकारी जी, विदर्भ के मा. प्रांत संघचालक जी, नागपुर महानगर के मा. संघचालक जी, इस वर्ग के दर्शन के द्वारा संघ को देखने-समझने का प्रयास करने के लिये देश की सभी दिशाओं के विभिन्न अंचलों से यहां पर उपस्थित परम आत्मीय, सम्माननीय अतिथि वृंद, उपस्थित नागरिक सज्जन, माता-भगिनी, संघ के अन्य अधिकारीगण एवं आत्मीय स्वयंसेवक बंधुओ..... प्रति वर्ष इस समापन कार्यक्रम में उपस्थित रहने का अपने नागपुर के माता- ...

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पृथ्वी पर समभाव – सहचर का भारतीय दर्शन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पांचवे सरसंघचालक कुप्पहली सीतारमय्या सुदर्शन का जन्म 19 जून, 1931 को रायपुर में हुआ था. मूल रूप से कर्नाटक के एक गाँव कुप्पहली के निवासी अपने पिता सीतारमय्या के वन विभाग में कार्यरत होने के कारण लंबे समय तक मध्य प्रदेश में रहे. यहीं उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई और उन्होंने जबलपुर से दूरसंचार अभियांत्रिकी में बी.ई. किया. वे नित्य प्रति के जीवन में स्वदेशी के आग्रही थे और कार्यकर्ताओं ...

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राष्ट्र सेविका समिति के 15 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग का समापन

नई दिल्ली. राष्ट्र सेविका समिति के ग्रीष्मकालीन प्रवेश एवं प्रबोध प्रशिक्षण वर्ग का 16 जून, रविवार को समापन हुआ. 15 दिनों तक चलने वाला प्रशिक्षण वर्ग 01 जून से ‘गोवर्धन लाल त्रेहन सरस्वती बाल मंदिर में शुरू हुआ था. लाजपत नगर के स्कूल परिसर में प्रशिक्षण वर्ग के समापन अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया. जिसमें राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका शांता अक्का, समाज सेविका मधु गेरा और डॉक्टर शारदा जैन (स ...

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राष्ट्र निर्माण के कार्य में समाज के प्रत्येक वर्ग को सहयोग करना चाहिए  – माधव विद्वान्स

बिलासपुर (विसंकें). मध्य क्षेत्र के संघ शिक्षा वर्ग, द्वितीय वर्ष का समापन समारोह, गुरुवार 13 जून 2019 को आयोजित किया गया. मंच पर अतिथि आगमन पर स्वागत प्रणाम के पश्चात ध्वजारोहण, व प्रार्थना हुई. समारोह में प्रदक्षिणा संचलन के पश्चात शिक्षार्थियों द्वारा शारीरिक प्रात्यक्षिक - गण समता, पदविन्यास, दण्ड संचालन, निःयुद्ध, सूर्यनमस्कार, योगासन आदि के कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए. शारीरिक प्रदर्शन के पश्चात सामूहिक ...

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संकट के समय संघ के स्वयंसेवकों ने निभाई अहम भूमिका – सुरेश चंद्र जी

अवध. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख सुरेश चंद्र जी ने कहा कि देश व समाज के सामने जब भी बड़े सामाजिक संकट आए, उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने तन, मन, धन से देश व समाज को संकट से उबारने का प्रयास किया. चाहे युद्ध का समय रहा हो या आपातकाल का समय रहा हो, देश में संकट के समय कार्यकर्ताओं ने संघर्ष किया है. संघ के कार्यकर्ता स्थापनाकाल से ही जन जागरण का कार्य करते आ रहे है ...

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भारतीय जीवन दर्शन में विश्व के सभी प्रश्नों का समाधान – स्वामी आत्माराम जी

भारतीय संस्कृति सर्व समावेशी है – प्रेमशंकर जी धमतरी, छत्तीसगढ़. धमतरी के निकट ग्राम सांकरा में स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, छत्तीसगढ़ प्रान्त के 20 दिवसीय, संघ शिक्षा वर्ग, प्रथम वर्ष (सामान्य) का समारोप कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी आत्माराम जी कुम्भज (संरक्षक, श्री तुलसी मानस प्रतिष्ठान, छत्तीसगढ़ ) थे. उन्होंने कहा कि आज भारत ही सम्पूर्ण द ...

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राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रशक्ति के जागरण से ही देश जगद्गुरु बनेगा – श्यामजी हरकरे

डहाणू, मुंबई (विसंकें). पश्चिम क्षेत्र धर्म जागरण प्रमुख श्याम जी हरकरे ने कहा कि ‘राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रशक्ति के जागरण के कारण देश फिर से जगद्गुरु बनेगा.’ पिछली अनेक सदियों से भारत में अनेक महापुरुषों ने प्रयास कर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रशक्ति जागरण का अत्यंत महत्त्वपूर्ण कार्य किया है और 1925 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी समाज की भक्ति व शक्ति के जागरण का संकल्प लिया है. श्याम जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक सं ...

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संघ निःस्वार्थ भाव से राष्ट्र के लिए कार्य करने वाले स्वयंसेवक तैयार करता है – डॉ. भरत भाई पटेल

गुजरात (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, गुजरात/सौराष्ट्र प्रांत द्वारा आयोजित संघ शिक्षा वर्ग, प्रथम वर्ष के समारोप सत्र का आयोजन ब्राइट स्कूल, नरोडा, कर्णावती में किया गया. कार्यक्रम में निरमा लिमिटेड के वाईस चेयरमैन राकेश भाई पटेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. मुख्य वक्ता प्रांत संघचालक डॉ. भरत भाई पटेल ने कहा कि संघ कोई संस्था नहीं है, संगठन है. अतः दूसरी संस्थाओं के आधार पर संघ को नहीं समझा जा ...

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26 मई / जन्मदिवस – निष्ठावान कार्यकर्ता हो. वे. शेषाद्रि

नई दिल्ली. आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का साहित्य हर भाषा में प्रचुर मात्रा में निर्माण हो रहा है, पर इस कार्य के प्रारम्भ में जिन कार्यकर्ताओं की प्रमुख भूमिका रही, उनमें श्री होंगसन्द्र वेंकटरमैया शेषाद्रि जी का नाम शीर्ष पर है. 26 मई, 1926 को बंगलौर में जन्मे शेषाद्रि जी 1943 में स्वयंसेवक बने. 1946 में मैसूर विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में प्रथम श्रेणी में स्वर्ण पदक पाकर उन्होंने एमएससी की डिग्री हास ...

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भारत की जीवनदृष्टि एकात्म और सर्वांगीण है

भारत की जीवनदृष्टि (View of Life) दुनिया में विशिष्ट (Unique) है, कारण उसका आधार आध्यात्मिकता (Spirituality) है. इसीलिए यह दृष्टि एकात्म है और सर्वांगीण भी है. इसी कारण भारत सत्य के अनेक रूप देखता है, उस तक पहुँचने के मार्ग विभिन्न होते हुए भी वे सभी समान हैं यह मानता है. इसी कारण वह अनेकता में एकता देखता है और विविधता में ऐक्य की प्रस्थापना कर सकता है. वह विविधता को भेद नहीं समझता. प्रत्येक व्यक्ति में, चर ...

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