आतंकी हमले में घायल चंद्रकांत जी का निधन, बुधवार को होगा अंतिम संस्कार Reviewed by Momizat on . विनम्र श्रद्धांजलि नई दिल्ली. किश्तवाड़ में आतंकी हमले में गंभीर रूप से घायल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जम्मू कश्मीर प्रांत के सह सेवा प्रमुख चंद्रकांत शर्मा का जम विनम्र श्रद्धांजलि नई दिल्ली. किश्तवाड़ में आतंकी हमले में गंभीर रूप से घायल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जम्मू कश्मीर प्रांत के सह सेवा प्रमुख चंद्रकांत शर्मा का जम Rating: 0
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    आतंकी हमले में घायल चंद्रकांत जी का निधन, बुधवार को होगा अंतिम संस्कार

    विनम्र श्रद्धांजलि

    नई दिल्ली. किश्तवाड़ में आतंकी हमले में गंभीर रूप से घायल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जम्मू कश्मीर प्रांत के सह सेवा प्रमुख चंद्रकांत शर्मा का जम्मू अस्पताल में निधन हो गया. किश्तवाड़ जिला अस्पताल में चिकित्सा सहायक के पद पर कार्यरत चंद्रकांत शर्मा पर मंगलवार को अस्पताल परिसर में ही आतंकियों ने हमला कर दिया था. जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उन्हें जम्मू लाया गया था. उऩकी पार्थिव देह को जम्मू से किश्तवाड़ ले जाया जा रहा है, जहां बुधवार को उनका अंतिम संस्कार होगा.

    चन्द्रकांत जी बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे. जिला, विभाग कार्यवाह सहित विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए वर्तमान में प्रांत सह सेवा प्रमुख थे. उन्होंने संघ का प्रथम, द्वितीय, तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण पूरा किया था. उनका परिवार प्रारंभ से ही धार्मिक गतिविधियों व समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय था. उनके परिवार में पत्नी व दो बेटे हैं, बड़ा बेटा दसवीं तथा छोटा बेटा सातवीं कक्षा में पढ़ता है.

    चंद्रकांत जी ने आतंकवाद के दौर में भी वहां के स्थानीय समाज का मनोबल बनाए रखने का महत्वपूर्ण कार्य किया. उन्होंने हिन्दुओं को संगठित करने का काम, बड़ी तन्मयता से किया. सेना के सहयोग के लिए दिन रात तत्पर रहते थे. जिस कारण आतंकियों के निशाने पर थे, इसके चलते उन्हें सुरक्षा भी प्रदान की गई थी.

    वे युवाओं के प्रेरणास्रोत थे, लेकिन अपने लिए कठोर थे. पद, प्रतिष्ठा से अलिप्त रहते हुए भी वंचितों, शोषितों, असहायों के लिए वे निरंतर कार्य करते रहे. उन्होंने समाज को साथ लेकर किश्तवाड़ में मंदिर का निर्माण करवाया था और हर साल बैसाखी पर मेले का आयोजन करते थे. उनका अधिकांश समय संघ व समाज के कार्यों में ही लगता था. वे आतंकवाद के समय हिन्दू रक्षा समिति में भी सक्रिय रहे. डोडा विभाग में निरंतर प्रवास होता था तथा क्षेत्र में धार्मिक, सामाजिक संगठनों से अच्छा संपर्क-संबंध था.

    हिन्दू समाज के मनोबल को कम करने के आतंकवादियों के मन्सूबे कभी पूरे नहीं होंगे. संघ ने एक निर्भीक, जुझारू और कर्तव्यनिष्ठ स्वयंसेवक खो दिया है. उनके जाने से क्षेत्र व समाज को अपूरणीय क्षति हुई है.

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