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आपदा में फंसे मजदूरों के लिए देवदूत बनकर उतरे संघ के स्वयंसेवक

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मजदूरों की मदद कर संघ स्वयंसेवकों ने निभाया सामाजिक दायित्व

नई दिल्ली. आज देश ही नहीं, बल्कि पूरा विश्व कोराना वायरस से जूझ रहा है. ऐसे में केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश में लॉकडाउन की घोषणा की है. दिल्ली और एनसीआर में रहने वाले दिहाड़ीदार मजदूरों लॉकडाउन के चलते कोई काम न मिलने की वजह से अपने गांवों के लिए अचानक पलायन शुरू कर दिया. हालांकि, इसके पीछे एक सोची समझी साजिश की बू आ रही है. लॉकडाउन के चलते देशभर में सभी यातायात सेवाएं बंद पड़ी हैं. जिस कारण मजदूर पैदल ही अपने गंतव्य की तरफ रवाना होने लगे. इसका मुख्य कारण लॉकडाउन के लंबा समय तक चलने को लेकर चल रहा दुष्प्रचार है. इस दुष्प्रचार (अफवाह) के चलते ही दिल्ली की सड़कों पर हजारों की संख्या में पैदल मजदूरों के जत्थे देखे जा सकते हैं. दूसरा उन्हें डीटीसी की बसों में भरकर आनंद विहार बस स्टेंड और सीमा क्षेत्र पर छोड़ा गया.

27 मार्च को राष्ट्रीय राजमार्ग-24 और राष्ट्रीय राजमार्ग-58 के नजदीक बने आनंद विहार बस अड्डे पर उस समय स्थिति काफी गंभीर हो गई, जब हजारों की संख्या में मजदूर यहां एकत्रित हो गए. एक साथ इतनी बड़ी संख्या में भीड़ एकत्र होने से यहां कोरोना संक्रमण के फैलने का खतरा बढ़ गया. ऐसी स्थिति में पुलिस व प्रशासन के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पूर्वी दिल्ली के कार्यकर्ता यहां देवदूत बनकर आए. संघ के हजारों कार्यकर्ता पूरे सुरक्षा बंदोबस्त के साथ मजदूरों के बीच पहुंचे और उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर जागरूक करते हुए उनके बीच मॉस्क और दस्तानों का वितरण शुरू किया. पहले तो स्वयंसेवकों ने सड़क पर मौजूद सभी मजदूरों को एक-दूसरे से एक-एक मीटर दूर बैठाया. सभी मजदूरों ने पूरे धैर्य के साथ स्वयंसेवकों की बातों को सुना. इसके बाद मजदूरों को जागरूक करने के साथ-साथ स्वयंसेवकों ने सभी को पानी, नाश्ता, खाना, चाय, फल, साबुन, सैनेटाइजर और मॉस्क उपलब्ध करवाए. कुछ देर पहले तक जो मजदूर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की कोई बात नहीं सुन रहे थे, वही मजदूर अब स्वयंसेवकों द्वारा बचाव को लेकर दी जा रही सभी हिदायतों का अच्छे तरीके से पालन कर रहे थे.

उत्तर प्रदेश के एटा, फरुर्खाबाद, इटावा, उन्नाव रायबरेली, सुलतानपुर, आजमगढ़, गोरखपुर, देवरिया, प्रयागराज, जौनपुर, गोंडा, बाराबंकी, प्रतापगढ़, बदायूं, झांसी, जौलोन और बिहार जाने के लिए आनंद विहार बस अड्डे पर आए मजदूरों ने स्वयंसवेकों को अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उन्हें सूचना मिली थी कि आनंद विहार बस अड्डे से उत्तरप्रदेश व बिहार को जाने के लिए सरकार द्वारा बसों की व्यवस्था की गई है, लेकिन जब वह यहां पहुंचे तो पता चला कि यह सच्चाई नहीं, बल्कि अफवाह है. मजदूरों की समस्या को देखते हुए राहत कार्य में लगे स्वयंसेवकों ने प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत कर उनके लिए वाहनों का इंतजाम कर उन्हें उनके गंतव्य तक भी पहुंचाया. जिस काम को करने के लिए शासन व प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही थी, उस काम को स्वयंसेवकों ने बड़ी सरलता से कर दिखाया.

पूर्वी दिल्ली के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि उनके समक्ष मजदूरों को नियंत्रित करने को लेकर बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी, मगर संघ के स्वयंसेवकों ने उनके बीच पहुंच कर न केवल स्थिति को विस्फोटक होने से बचाया. बल्कि लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक किया और सभी को धैर्य के साथ सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया.

गाजियाबाद के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना था, अगर संघ के कार्यकर्ता सहयोग नहीं करते तो उनके सामने खड़ी इस चुनौती से पार पाना उनके लिए असंभव था.

बेसुध महिला को अस्पताल में करवाया दाखिल

आनंद विहार में भीड़ का आलम यह था कि यहां अपने घर जाने को भटक रही एक महिला और उसका 12 साल का बच्चा बेसुध होकर सड़क पर गिर गए. संघ के स्वयंसेवकों ने पानी और भोजन देकर पुलिस की मदद से महिला व उसके बच्चे को जीटीबी अस्पताल पहुंचाया.

https://twitter.com/editorvskbharat/status/1244156153103175682

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