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इतिहास याद रखेगा! जब सैनिक सीमा पर लड़ रहे थे तो कांग्रेस टांग खींच रही थी

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में अब राष्ट्रीय कुछ भी नहीं बचा !

सौरभ कुमार

इस वक्त सारी दुनिया कोरोना की महामारी से दो-दो हाथ कर रही है, लेकिन कोरोना के इस संकट काल में भारत को कोरोना, धूर्त पाकिस्तान और चालबाज चीन की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. इस संकट की घड़ी में सारा देश अपनी सरकार और प्रधानमंत्री के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है, लेकिन इस देश का सबसे बड़ा विपक्षी दल यानि कांग्रेस शत्रु देशों के मुखपत्र की तरह व्यवहार कर रहा है. हालांकि कांग्रेस का सरकार विरोध करते करते देश विरोध करने का ये रवैया पहले भी कई मौकों पर सामने आ चुका है. इसी कांग्रेस के वंशवादी युवराज कभी सेना से उसके शौर्य का सबूत मांगते हैं तो कभी देश के प्रधानमंत्री से जवानों की खून की दलाली करने का आरोप लगा देते हैं.

चीन अपनी विस्तारवादी नीति के अनुरूप जब भारत के मणिमुकुट लद्दाख की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की तो भारत के जवानों ने अपने पराक्रम से चीनी सैनिकों के दांत खट्टे कर दिए. इस वक्त सारा देश अपनी सेना और सरकार के साथ खड़ा था, हालांकि कांग्रेसी युवराज और उनकी पार्टी के नेता जिनमें कई पूर्व केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं, एक बार फिर से सरकार विरोध करते करते देश का मनोबल कमजोर करने वाले बयान देने लगे.

जब देश के प्रधानमंत्री साहसिक फैसला लेते हुए सैनिकों का हौसला बढ़ाने के लिए सीमा पर पहुंचे तो कांग्रेस के पेट में मरोड़ें उठने लगीं. कांग्रेस नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री नेता मनीष तिवारी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लेह दौरे की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ‘जब वह (इंदिरा) लेह गई थीं तो पाकिस्तान को दो हिस्सों में बांट दिया गया था. देखते हैं वह (मोदी) क्या करेंगे?’. वर्तमान राजनीति में लगभग अव्यवाहारिक हो चुके पूर्व कांग्रेसी अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘लद्दाख के लोग कहते हैं: चीन ने हमारी जमीन ली. PM कहते हैं – किसी ने हमारी जमीन नहीं ली….कोई तो झूठ बोल रहा है. इसके साथ उन्होंने एक वीडियो भी पोस्ट किया. हालांकि नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार राहुल गांधी ने जो वीडियो पोस्ट किया है वो फेक है. इस वीडियों में जो लोग नजर आ रहे हैं, उनमें से पांच कांग्रेस से जुड़े हुए हैं.

अब आम इंसान हो, थोड़ी भी समझ हो तो यहाँ रुक जाएगा या अगली बार से अपने तथ्यों को जांचेगा. लेकिन जो जहर फैलाने का व्यापार खोल कर बैठे हों, जिन्होंने राजनीति के बाज़ार में सामाजिक शुचिता की बोली लगा दी हो, उनसे क्या अपेक्षा रखना. प्रधानमंत्री लद्दाख में सेना के घायल जवानों से मिलने के लिए सेना अस्पताल पहुंचे, सैनिकों से बात की उनका मनोबल बढाया. एक तरफ प्रधानमंत्री के इस व्यवहार से पूरा देश गौरवान्वित था, दूसरी तरफ कांग्रेस दूसरा झूठ गढ़ रही थी. कांग्रेस के कई नेताओं ने प्रधानमंत्री के तस्वीर को साझा करते हुए लिखा कि ये अस्पताल नहीं, कांफ्रेंस रूम है. प्रधानमंत्री फोटो ऑप करवा रहे हैं. सोच कर देखिये उन आँखों का पानी कितना गिर गया होगा जो सेना के घायल जवानों का हौसला बढ़ाने के बजाये उस पर भी राजनीति करती है.

सेना और भारत सरकार लगातार कह रही है कि चीन में भारत की एक इंच जमीन पर कब्जा नहीं किया है, लेकिन जाने माने वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल विदेशी समाचार पत्रों की खबर का हवाला देकर कह रहे हैं कि चीन ने हमारे देश की जमीन पर कब्जा कर लिया है. इन्हीं कपिल सिब्बल ने आज तक नेहरू के समय गवाईं गई 43 हजार किलोमीटर जमीन के लिए एक शब्द नहीं कहा, लेकिन हाल ही के मामले में सेना द्वारा जवाब देने के बाद भी विदेशी अखबारों को प्राथमिकता देते हुए सेना का मनोबल गिरा रहे हैं.

आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल की हवा खाने वाले कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने ट्वीट किया – एक हफ्ते में तीसरी बार, @narendramodi ने चीन को आक्रमणकारी नहीं कहा,  क्यों? लद्दाख में भारत के लोगों और जवानों से एक ‘बेनाम शत्रु’ के बारे में बात करने का क्या उद्देश्य है?

जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने चीन को क्या कहा, चीन को समझ आ गया. उसकी ओर से प्रतिक्रिया भी आ गई…..लेकिन हमारे देश के कांग्रेस नेताओं को समझ नहीं आया.

कांग्रेस के उलट देश के दूसरे विपक्षी नेताओं जैसे मायवती और शरद पवार ने सरकार और सेना को न सिर्फ समर्थन दिया, बल्कि कांग्रेसी नेताओं को देश का मनोबल न गिराने की सलाह भी दी.

चीन के मामले में कांग्रेसी पार्टी जिस तरह की बैचेनी दिखा रही है, उसे लेकर कई तरह के सवाल खड़े होते हैं. इससे पहले भी भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद के वक्त राहुल गांधी ने चीन के राजदूत से मुलाकात की थी. इस मुलाकात में क्या बात हुई, देश आज भी इसके बारे में नहीं जानता है. लोकसभा चुनाव के वक़्त राहुल गांधी मानसरोवर की यात्रा पर गए थे, जहां वो चीन के कई अधिकारियों से मिले थे, इनमें से कुछ तो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना के वरिष्ठ नेता भी थे. तो क्या भीतर खाने चीन और कांग्रेस के बीच किसी तरह का समझौता हुआ है? कांग्रेस को इन सवालों के जवाब देने चाहिएं?

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