कुटुम्ब प्रबोधन के माध्यम से परिवार में देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव जागृत करना है – दत्तात्रेय होसबले Reviewed by Momizat on . गोरखपुर. चार दिवसीय कार्यकर्ता बैठक के प्रथम सत्र में उपस्थित पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र कार्यकारिणी, प्रान्त टोली, क्षेत्र व प्रान्त गतिविधि प्रमुखों को सम्बो गोरखपुर. चार दिवसीय कार्यकर्ता बैठक के प्रथम सत्र में उपस्थित पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र कार्यकारिणी, प्रान्त टोली, क्षेत्र व प्रान्त गतिविधि प्रमुखों को सम्बो Rating: 0
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    कुटुम्ब प्रबोधन के माध्यम से परिवार में देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव जागृत करना है – दत्तात्रेय होसबले

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    गोरखपुर. चार दिवसीय कार्यकर्ता बैठक के प्रथम सत्र में उपस्थित पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र कार्यकारिणी, प्रान्त टोली, क्षेत्र व प्रान्त गतिविधि प्रमुखों को सम्बोधित करते हुए सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले जी ने कहा कि कुटुम्ब प्रबोधन गतिविधि के माध्यम से समाज में पारिवारिक आत्मीयता एवं देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव जागृत करने के प्रयास किये जाते हैं. इसके लिए विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा की, जैसे अपने घर पर परिवार के सभी सदस्य सामूहिक भोजन तथा भजन के लिए प्रतिदिन अथवा सप्ताह में एक बार एकत्रित हों एवं मंगल संवाद करें. महीने में अपने पड़ोसियों से मंगल संवाद करें. अपना घर जिन सेवा कर्मी बन्धुओं एवं भगिनियों की सहायता से चलता है, उनके साथ संवाद एवं स्नेह का व्यवहार करें, त्यौहार एवं अन्य प्रसंगों पर उन्हें सम्मान सहित आमंत्रित करें.

    नव दम्पत्तियों में सहयोग, सहभागिता, सहनशीलता, संयम, चारित्र एवं जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करना हमारा कर्तव्य है. घर परिवार से आलस्य, गलत सामाजिक मान्यताएं, बौद्धिक जड़ता, भय, स्वार्थ एवं अहंकार का त्याग करने की बातचीत होनी चाहिए एवं त्याग करने की मानसिकता बने. इन उपकरणों के माध्यम से घर में देवालय, विद्यालय, आदरालय, सेवालय का वातावरण बनाने में सहायता मिलेगी. ऐसा करना कुटुम्ब प्रबोधन गतिविधि का लक्ष्य है.

    द्वितीय सत्र में सामाजिक समरसता विषय पर चर्चा करते हुए दत्तात्रेय जी ने कहा कि समाज में जन्मजात विषमता को हटाकर समता एवं न्याय का वातारण तैयार करना सामाजिक समरसता का विषय है. यह हर एक व्यक्ति के मन को बदलने का कार्य है न कि सभा, सम्मेलन, कार्यक्रम व विरोध का. संघ में यह कार्य प्रारम्भ से ही चल रहा है. समाज की विशेष परिस्थिति को ध्यान में लेकर गत सात वर्ष से सुव्यस्थित रूप से सामाजिक समरसता गतिविधि का कार्य चल रहा है. देश में प्रत्येक खण्ड स्तर पर महिला एवं पुरूषों की एक टोली इसका प्रयास कर रही है. व्यक्तिगत जीवन/पारिवारिक जीवन व समाज जीवन में परिवर्तन के लिए यह टोली प्रयास कर रही है. विभिन्न महापुरूषों की जयन्ती, पुण्य तिथि या उनके जीवन के किसी विशेष प्रसंग पर समाज में सभी वर्ग एकत्रित आएं एवं सामाजिक समरसता निर्माण करने हेतु जिन-जिन महापुरूषों ने प्रयास किया, उनके विचारों को समाज में पहुँचाने का कार्य सामाजिक समरसता गतिविधि के माध्यम से किया जाता है.

    मन्दिर, जलस्रोत, शमशान सभी के लिए एक हो, ऐसा प्रयास करना है. समाज में परस्पर स्नेह, समता एवं सहयोग का वतावरण बनाने की दृष्टि से सामाजिक समरसता गतिविधि सम्पूर्ण देश में प्रयास पूर्वक कार्य कर रही है.

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