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क्रांतिकारियों की बुलन्द आवाज थे गणेश शंकर विद्यार्थी

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IMG_20151027_142207मेरठ (विसंकें). राष्ट्रदेव पत्रिका के संपादक अजय मित्तल ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी क्रांतिकारियों की बुलन्द आवाज थे. वे अंग्रेजी शासन के दौरान निर्भीक और सच्चाई लिखने वाले पत्रकार थे. अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों का वे खुलकर विरोध करते थे. अजय मित्तल विश्व संवाद केन्द्र द्वारा गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती पर आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जी ने वर्ष 1913 में प्रताप समाचार पत्र को आरम्भ किया. एक पत्रकार होने के नाते वह एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थे. चोरी-चौरा काण्ड में 180 लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ था. इन लोगों की मदद उन्होंने समाज के दानदाताओं को इकट्ठा कर की थी. हिन्दुत्व के सम्बन्ध में उनके विचार स्वामी विवेकानन्द एवं महर्षि अरविन्द से मिलते थे. उनकी पत्रकारिता से आज मीडिया को प्रेरणा लेनी चाहिए. गोष्ठी का शुभारम्भ विद्यार्थी जी के चित्र के सामने दीप जलाकर किया गया. गोष्ठी में मुख्य अतिथि कलमपुत्र पत्रिका के सम्पादक चरण सिंह स्वामी रहे. कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार रामगोपाल एवं देवेन्द्र कुमार ने भी अपने विचार रखे. इस अवसर पर अनेक पत्रकार, पत्रकारिता के अध्यापक एवं छात्रों ने भी भाग लिया.

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