गुरू-शिष्य के बीच आत्मीय सम्बंध स्थापित करेंगे सरसंघचालक जी Reviewed by Momizat on . आगरा. हमारे महापुरूषों, मनीषियों ने हमारे भौगौलिक व सांस्कृतिक व परिवेश को ध्यान में रखकर भारत में जिस शिक्षा व्यवस्था का निर्माण किया था, वह समकालीन विश्व की श आगरा. हमारे महापुरूषों, मनीषियों ने हमारे भौगौलिक व सांस्कृतिक व परिवेश को ध्यान में रखकर भारत में जिस शिक्षा व्यवस्था का निर्माण किया था, वह समकालीन विश्व की श Rating: 0
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    गुरू-शिष्य के बीच आत्मीय सम्बंध स्थापित करेंगे सरसंघचालक जी

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    आगरा. हमारे महापुरूषों, मनीषियों ने हमारे भौगौलिक व सांस्कृतिक व परिवेश को ध्यान में रखकर भारत में जिस शिक्षा व्यवस्था का निर्माण किया था, वह समकालीन विश्व की शिक्षा व्यवस्था से समुन्नत व उत्कृष्ट थी और कई मायनों में आज विशिष्ट है. लेकिन, देश जब आजाद हुआ, तब उम्मींद बंधी कि हम शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पुरानी पहचान को प्राप्त कर गुरू और शिष्य के आत्मीय सम्बंध राष्ट्रीय भावना के साथ जाग्रत करेंगे. परंतु शिक्षा व्यवस्था को अभी भी हम उस अनुपात में विकसित नहीं कर पाए, जिस अनुपात में होना चाहिये था. शिक्षा, मुक्ति एवं आत्मबोध के साधन के रूप में विकसित हो, इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, ब्रजप्रांत द्वारा एक अनूठी पहल ‘महाविद्यालीय व विश्वविद्यालीय शिक्षक सम्मेलन’ के रूप में की गई है. सम्मेलन 20 अगस्त को सांय 4 से 7 बजे तक आगरा कॉलेज, मैदान पर आयोजित किया जा रहा है.

    ब्रजप्रांत में पहली बार विवि स्तरीय शिक्षकों का संगम

    भारत की शैक्षिक एवं सांस्कृतिक परम्परा विश्व इतिहास में प्राचीनतम है. क्योंकि यह व्यक्ति के लिए बल्कि चारित्रित निर्माण के साथ राष्ट्र में शिक्षित समाज की स्थापना के लिए रही है. अपने संक्रमण काल में भारतीय शिक्षा को कई चुनौतियों व समस्याओं का सामना करना पड़ा. आज भी ये चुनौतियाँ व समस्याएँ हमारे सामने हैं, जिनसे दो-दो हाथ करना पड़ रहा है. देशभर में भारतीय शिक्षण पद्धिति  कैसे प्रकाशस्रोत, अन्तर्दृष्टि, अन्तर्ज्योति व ज्ञानचक्षु के रूप में शिक्षकों को सहयोग द्वारा प्रकाशित हो इसके लिए पहली बार आगरा में समूचे ब्रजप्रांत के विभिन्न महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों के शिक्षकों से स्वयं संवाद स्थापित करने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प.पू. सरसंघचालक मोहन जी भागवत चार दिवसीय प्रवास पर आगरा पधार रहे हैं और वह 20 अगस्त को शिक्षकों के मध्य जिज्ञासा समाधान करेंगे.

    पांच सौ शिक्षण संस्थानों की सहभागिता

    महाविद्यालीय व विश्वविद्यालीय शिक्षक सम्मेलन में समूचे प्रांत से लगभग पांच सौ महाविद्यालय के शिक्षक बंधु भाग लेने आगरा आ रहे हैं. पूर्व में सम्मेलन हेतु एक हजार शिक्षकों की सहभागिता का निश्चिय किया था. लेकिन, शिक्षक व विद्यार्थी के बीच बढ़ती दूरी, शिक्षकों की समस्याओं व उनके निराकरण हेतु पहली बार आयोजित इस प्रकार के शिक्षक सम्मेलन के उत्साह स्वरूप यह संख्या एक हजार के अधिक रहेगी. शिक्षक अपने स्वयं के खर्चे व माध्यमों द्वारा 20 अगस्त को आगरा कॉलेज पहुंचेंगे.

    मोहन जी भागवत से संवाद के अवसर की प्रतिक्षा में शिक्षा जगत

    ब्रजप्रांत में पहली बार आयोजित शिक्षक सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक प.पू. मोहन जी भागवत स्वयं शिक्षकों से संवाद स्थापित करेंगे व उन्हें मार्गदर्शन प्रदान करेंगे. प.पू. संरसंघचालक जी द्वारा शिक्षकों से संवाद स्थापित करने के उत्साह के चलते शिक्षा क्षेत्र में अपार उत्साह का वातावरण देखा जा रहा है. वैदिक युग से लेकर अब तक शिक्षा का अभिप्राय यह रहा है कि शिक्षा प्रकाश का स्रोत है तथा जीवन के विभिन्न कार्यों में यह हमारा मार्ग आलोकित करती है. लेकिन वर्तमान में शिक्षा केवल रोजगार प्राप्ति के उद्देश्य तक सीमित होकर रह गई है और छात्र तत्व चिंतन से विमुख हो रहा है. शिक्षा रोजगार के साथ प्रकृति-पर्यावरण, परिवारिक स्नेह, संस्कृति, राष्ट्रीय चिंतन और समरस समाज का पर्याय कैसे बने, यह सम्मेलन का मूल उद्देश्य है. चूंकि एक छात्र को देश में कल का नौजवान बनाने में शिक्षक की बड़ी भूमिका रहती है.

    शिक्षकों के स्वयं के व्यय पर आयोजित सम्मेलन

    शिक्षक सम्मेलन में ब्रजप्रांत के शिक्षकों के अनुरोध व उनके स्वयं के खर्चे पर आयोजित किया गया है. सम्मेलन में सहभागिता हेतु प्रति शिक्षक सौ रूपये का शुल्क लिया गया है. इस शुल्क से शिक्षक बंधुओं के अल्पाहार व अन्य व्यवस्थाओं को स्थापित किया गया है. सम्मेलन के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों की विभिन्न समितियां बनाकर दायित्व सौंपा गया है. जिसमें दिन-रात एक करके स्वयंसेवक सम्मेलन को भव्य बनाने के कार्य में जुटे हुए हैं.

    संघ के लिए शिक्षक सम्मेलन कोई नई बात नहीं

    जिस प्रकार अन्धकार को दूर करने का साधन प्रकाश है, उसी परकार व्यक्ति के सब संशयों और भ्रमों को दूर करने का साधन शिक्षा है. चूंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शिक्षक द्वारा विद्यार्थी को जीवन का यथार्थ दर्शन करने का माध्यम मानता है. इसलिए संघ द्वारा वर्षभर समूचे भारतवर्ष में कहीं ना कहीं शिक्षकों से संवाद व उनकी जिज्ञासाओं को पटल पर स्थापित करने हेतु सम्मेलन का आयोजन अनवरत रूप से करता रहता है. स्वाध्याय, सांगोपांग अध्ययन, श्रवण, मनन द्वारा गुरू-शिष्य परंपरा पर आधारित शिक्षा क्षेत्र को प्रभावी बनाने इस वर्ष नागौर, जोधपुर में आयोजित एक बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देश में महंगी होती शिक्षा पर गहरी चिंता जताई थी. सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हेतु आगरा में आयोजित शिक्षक सम्मेलन भविष्य में मील का पत्थर साबित होगा.

    युवा दम्पत्ति सम्मेलन को लेकर नगर में विशेष उत्साह

    राष्ट्र के निर्माण में परिवार की भूमिका अति महत्वपूर्ण होती है. जो परिवार अपने बच्चों को संस्कार देता है, वह परिवार सांस्कारिक होता है. जिससे कुटुम्ब का प्रबोधन ठीक होता है. इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए 21 अगस्त, रविवार को प्रातः 9.30 बजे से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, ब्रजप्रांत द्वारा आगरा कॉलेज मैदान में युवा दम्पत्ति सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. युवा दम्पत्ति सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प.पू. सरसंघचालक मोहन भागवत जी युवा दम्पत्तियों को अपना उज्जवल उद्बोधन प्रदान करेंगे. वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल विश्व गायत्री परिवार के अध्यक्ष डॉ. प्रणव पंड्या जी करेंगे.

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