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ग्राम विकास युवा संगम उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न

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देवगिरी (विसंकें). राष्ट्र की उन्नति के लिए गांव की उन्नति आवश्यक है और गाँव की उन्नति के लिए युवाओं का आगे आना आवश्यक है. साथ ही विकास के पथ पर चलते समय जो यातनाएं होती हैं, उन्हें सहने की क्षमता भी इन युवाओं को विकसित करनी चाहिए.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ग्राम विकास विभाग की ओर से 13 जनवरी को अग्रसेन विद्या मंदिर, पैठन रोड, संभाजीनगर में ‘युवा ग्राम विकास संगम’ संपन्न हुआ. मंच पर देवगिरी प्रान्त संघचालक मधुकर (दाजी) जाधव, ग्राम विकास प्रान्त संयोजक बापू रावगांवकर, पाटोदा आदर्श ग्राम के शिल्पकार भास्कर पेरे पाटील, संघ के ज्येष्ठ प्रचारक सीताराम जी केदिलाय उपस्थित थे. भारत माता पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ.

वक्ताओं ने कहा कि युवा शिक्षा प्राप्त कर नौकरी के पीछे भाग रहे हैं, पारिवारिक जिम्मेदारी के तौर पर हमें नौकरी करनी भी चाहिए. लेकिन गाँव में रहकर भी बढ़िया खेती की जा सकती है, यह विचार भी मन में पक्का करना चाहिए. राष्ट्र का विकास गांव के विकास से होता है. युवाओं को वृक्षारोपण, प्राकृतिक खेती और गृह उद्योगों की ओर मुड़ना चाहिए. सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेते हुए अपने गाँव का, परिणामतः राष्ट्र का विकास करना चाहिए. ज्येष्ठ प्रचारक सीतारामजी केदिलाय के महत्वपूर्ण मार्गदर्शन से कार्यक्रम की समाप्ति हुई. देवगिरी प्रान्त के ज्येष्ठ प्रचारक, अधिकारी, कार्यकर्ताओं के साथ-साथ प्रान्त के आठ सौ युवा उपस्थित थे.

गौ आधारित वस्तुओं के स्टॉल

संगमस्थल पर एक ओर विभिन्न गाँवों से आए किसानों ने अपने-अपने स्टॉल लगाये हुए थे. इनमें प्रमुखता से गौ आधारित साहित्य और प्राकृतिक रंग, रंगोली, विषमुक्त सब्जियां, खेती के उपकरण, जैविक खाद तथा किताबें बिक्री हेतु रखी गई थीं.

संगमस्थल पर ग्रामविकास के माध्यम से गावों में किए गए विभिन्न रचनात्मक कार्यों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी. गांव के युवाओं को आपस में उत्तम संवाद रखना चाहिए. तभी वे एक साथ मिलकर विकास की ओर कदम बढ़ा पाएंगे.

65 वर्ष की आयु में ग्राम विकास के उद्देश्य को लेकर संपूर्ण भारत का पैदल भ्रमण करने वाले प्रमुख मार्गदर्शक सीतारामजी केदिलाय जी ने कहा कि –

भारत में यदि आज भी संस्कृति टिकी हुई है तो वह गांवों के कारण ही है. भारत को अगर विकसित होना है तो युवाशक्ति के माध्यम से गांवों को जोड़कर विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रमों का परिचालन करना आवश्यक है.

भगवान राम-कृष्ण से लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज तक, सभी ने अपने जीवन में गावों की ओर चलने का सन्देश दिया है. कार्यक्रम का समापन करते हुए उन्होंने कहा कि यदि देश के सवा सौ करोड़ लोगों में से एक लाख युवा भी ग्रामविकास के कार्य में लग जाएं तो देश को विश्वगुरु बनते देर नहीं लगेगी.

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