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चीन युद्ध के शहीदों को तवांग जाकर दी जायेगी श्रद्धांजलि

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Bharat Tibat sehyog manch- Amritsar Goshtiअमृतसर (वि.सं.के.). तिब्बत सदियों से भारत और चीन के बीच बफर स्टेट का काम करता रहा है, परंतु पंडित जवाहर लाल नेहरु के नेतृत्व वाली सरकार की कमजोरी के चलते चीन ने इस देश पर कब्जा कर लिया और इससे चीन सीधे भारत के सिर पर आ चढ़ा. आज तिब्बत की चीन से मुक्ति भारत के लिये भी जरूरी है. यह विचार भारत-तिब्बत सहयोग मंच की संगोष्ठी को संबोधित करते हुये मंच के राष्ट्रीय संयोजक श्री कुलदीप अग्निहोत्री ने व्यक्त किये. उन्होंने कहा कि एक अज्ञात भय के चलते हम भारत-चीन के शहीदों को याद तक नहीं करते, परंतु अब इस परंपरा को तोड़ते हुये मंच की ओर से 21 नवंबर को चीन सीमा पर तवांग में जाकर युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी जायेगी.

श्री अग्निहोत्री ने बताया कि यह यात्रा 19 नवम्बर को गुवाहटी से शुरू होगी और 21 नवंबर को तवांग पहुंचेगी. इस दौरान 1962 में चीन के साथ हुये युद्ध में शहीद हुये जवानों को राष्ट्र उनकी बलिदानस्थली पर 52 साल बाद नमन करेगा. तवांग तीर्थयात्रा के नाम से यह राष्ट्र यात्रा नवंबर माह में निकाली जायेगी. इसमें उत्तर भारत के लोग श्रद्धासुमन अर्पित करने जायेंगे.

Amritsar Bharat Tibbet sahyog manchसंगोष्ठी में भारत तिब्बत समन्वय केंद्र के निदेशक जिग्मे तसूलत्रिम विशेष रूप से मौजूद थे. उन्होंने बताया कि भारत-तिब्बत सहयोग मंच से संबधित तवांग तीर्थयात्रा आयोजन समिति के नेतृत्व में यात्रा निकाली जाने वाली है. इस यात्रा में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़ और दिल्ली के लोग शामिल होंगे. समिति के चेयरमैन हरजीत सिंह ग्रेवाल ने बताया कि 19 नवंबर को गुवाहटी से शुरू होने वाली यात्रा 21 नवंबर को तवांग पहुंचेगी. ग्रेवाल ने बताया कि तवांग अरुणाचल प्रदेश के आखिरी गांव बुमला से 15 किलोमीटर पहले है. युद्ध के दौरान शहीद हुये 2000 भारतीय जवानों का स्मारक यहीं पर बना हुआ है.

अमृतसर जनपदीय इकाई के संयोजक शंकरदत्त तिवारी ने बताया कि युद्धों में शामिल सभी लोगों, शहीदों और उनके परिजनों को याद किया जाता है. मगर इस युद्ध के लोगों को भुला दिया गया है. समिति उनकी पुण्य-स्मृतियों को ताज़ा करने तथा चीन के बढ़ते दखल को रोकने के लिये यह कोशिश कर रही है. उनका कहना है कि यात्रा से पूर्व 14 नवंबर को उपरोक्त राज्यों में जिला स्तर पर ऐसे परिवारों को तलाश करके सम्मानित भी किया जायेगा.

वक्ताओं ने कहा कि तिब्बत पर चीन का कब्ज़ा भारत के लिये खतरा बन गया है. इसीलिये जरूरी है कि भारत,  तिब्बत की आजादी का मुद्दा उठाये. विगत सरकार ने चीन के बढ़ते प्रभाव को छुपाया था मगर अब उसे छुपाना देश कि सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है.

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