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चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन ब्रह्ममुहुर्त में नए आसन पर विराजमान हुए रामलला

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अयोध्या. अयोध्या में रामलला नवरात्र के पहले दिन 25 मार्च को ब्रह्ममुहुर्त में टेंट से निकलकर बुलेटप्रूफ अस्थाई मंदिर में नए आसन पर विराजमान हो गए. दो दिन के वैदिक अनुष्ठान के बाद आज ब्रह्ममुहुर्त में रामलला को शिफ्ट किया गया.

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासियों के साथ उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ जी ने चैत्र नवरात्रि और नव विक्रम संवत 2077 के प्रथम प्रहर यानि ब्रह्ममुहुर्त में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम को स्वयं तिरपाल से ले जाकर नए अस्थायी मंदिर में विराजित किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्यारह लाख रुपये का चेक श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को अपने स्वयं के बैंक खाते से भेंट किया.
लंबे अतंराल के बाद श्रद्धालु अब रामलला के दर्शन इसी अस्थाई मंदिर में कर सकेंगे. हालांकि अभी लॉकडाउन की वजह से श्रद्धालु रामलला के दर्शन नहीं कर सकेंगे. लेकिन हालात सामान्य होने के बाद आसानी से रामलला के दर्शन किए जा सकेंगे. अस्थायी मंदिर में जर्मन एवं इस्टोनिया पाइन का उपयोग किया गया है. मन्दिर की लम्बाई 24 फ़ीट, चौड़ाई 17 फ़ीट व ऊँचाई 19 फ़ीट है. इसके ऊपर 35 इंच का शिखर है. इस लकड़ी की खासियत यह है कि ये सभी मौसम में एक समान रहेगी.

सोमवार से रामलला के गर्भगृह में पूजन कार्य शुरू हो गया था. जिसमें दिल्ली, मथुरा, प्रयाग, काशी और अयोध्या से आए हुए वैदिक पंडितों ने पूजा-पाठ को संपन्न करवाया. विधि-विधान से  पूजा-पाठ संपन्न होने के पश्चात पूर्णाहुति दी गई. राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र टेस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया सुबह 4:00 बजे रामलला अपने टेंट से निकलकर अस्थाई मंदिर में विराजमान हुए हैं.
अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने  से पहले अस्थाई रूप से बुलेटप्रूफ मंदिर तैयार किया गया है. यह अस्थाई मंदिर पूर्ण सुविधाओं से युक्त है. अयोध्या में श्रीराम जन्मस्थान पर जब तक भव्य मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता, रामलला इसी मंदिर में विराजमान रहेंगे.

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