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तबलीगी जमात या आफत की जमात

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देश में 30 प्रतिशत कोरोना संक्रमित तबलीगी जमात से संबंधित

डॉ. शुचि चौहान

वैश्विक महामारी बन चुके चायनीज़ वायरस को भारत ने लॉकडाउन व सोशल डिस्टेंसिंग से लगभग काबू कर ही लिया था कि तभी तबलीगी जमात आफत बनकर आ गई.

जमात के लोग दिल्ली के निजामुद्दीन में मार्च में आयोजित एक मजहबी जलसे में शामिल होने के लिए इकट्ठा हुए थे. इनमें देश के साथ ही विदेशों के भी लोग थे जो टूरिस्ट वीज़ा पर मजहबी प्रचार के लिए भारत आए थे. बिना सरकारी इजाजत के आयोजित इस जलसे में समापन के बाद भी विदेशों से आए कुछ लोग अपने देश वापस नहीं गए, बल्कि कोरोना पर जारी सरकारी निर्देशों का पालन किए बिना या तो मरकज में ही छिपे रहे या फिर देश के दूसरे राज्यों के छोटे-छोटे शहरों में स्थित मस्जिदों में जाकर छिप गए.

मामला तब सामने आया, जब मरकज के ही एक व्यक्ति की कश्मीर में और छह की तेलंगाना में मौत हो गई जो कोरोना पॉजिटिव थे. पुलिस ने जब मरकज से 23 सौ के लगभग लोगों को बाहर निकाला तो उनमें से अधिकांश कोरोना पॉजिटिव पाए गए. पूरी चेन का खुलासा होने पर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए. 17 राज्यों में इन लोगों की मौजूदगी या यात्रा का पता चला. इस दौरान ये अनेक लोगों को कोरोना बांट चुके थे.

कुछ लोगों की इस गैर जिम्मेदाराना हरकत के कारण देश में 31 मार्च से 2 अप्रैल के बीच अचानक कोरोना संक्रमित रोगियों की संख्या में उछाल आया. 30 मार्च को देश में संक्रमितों की संख्या 1 हजार 73 थी व 29 लोगों की मौत हुई थी. 04 अप्रैल को यह आंकड़ा 3 हजार पार कर गया और संक्रमण से मरने वालों की संख्या 77 हो गई. इसमें तबलीगी जमात के संक्रमितों की संख्या 1 हजार 23 है जो कुल संक्रमितों का 35 प्रतिशत है. मरकज से जुड़े 22 हजार से अधिक लोगों को क्वारंटाइन किया गया है, जिनमें अकेले दिल्ली में ही 18 सौ लोग हैं. विभिन्न राज्यों में अब तक कुल 89 संक्रमित लोगों की मौत हुई है, जिनमें 17 लोग तबलीगी जमात के हैं.

तमिलनाडु, दिल्ली, तेलंगाना, राजस्थान, आंध्र प्रदेश व जम्मू कश्मीर में बड़ी संख्या में लोगों के संक्रमित होने के समाचार हैं. इनमें तमिलनाडु में कुल संक्रमितों 485 में से 273, दिल्ली में 445 संक्रमितों में से 259, तेलंगाना में 272 में से 33, राजस्थान में 176 में से 46, आंध्रप्रदेश में 192 में से 76 और जम्मू कश्मीर में 92 संक्रमित लोगों में से 22 तबलीगी जमात के हैं.

अफसोस की बात यह है कि ये लोग इतना नुकसान पहुंचाने के बाद भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे. अस्पतालों में सामूहिक नमाज पढ़ रहे हैं, चिकित्साकर्मियों पर थूक रहे हैं और नर्सों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं. वार्ड में बिना पजामे के घूमने, अश्लील संगीत सुनने व अस्पताल स्टाफ से बीड़ी-सिगरेट व बिरयानी मांगने के भी समाचार आए हैं.

इस बीच अनेक इस्लामिक धर्मगुरुओं के वीडियो भी वायरल हुए, जिनमें निजामुद्दीन के ही एक मौलाना कहते सुने जा रहे हैं कि अगर बीमारी है तो 70 हजार फरिश्तों से दुआ करो, किसी भी डॉक्टर से नहीं. अगर 70 हजार फरिश्ते साथ हैं, तब बचाव नहीं हो पाया तो कोई डॉक्टर क्या कर लेगा. जब भी ऐसी आपदा आए तो अल्लाह की ज्यादा इबादत करो.

निजामुद्दीन के तबलीगी मौलाना का यह लॉजिक मतांध लोगों को समझ आ जाता है, लेकिन दुनिया में फैली तबाही व साक्षात मौतें इन्हें कुछ नहीं सिखा पातीं.

आज न्यूयॉर्क टाइम्स, बीबीसी जैसे मीडिया संस्थान जो लगातार भारत की क्षमताओं पर संदेह व्यक्त करने वाले लेख छाप कर भारत की छवि धूमिल करने में लगे हुए हैं, भारत को पिछड़ा व गरीब दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, देश के भी कुछ लिबरलों को भारत की जनता का अनुशासन व जीवटता रास नहीं आ रही है, ऐसे में तबलीगी जमात के लोगों ने उन्हें सांसें दे दी हैं.

ऐसे लोगों की जहालत से भारत एक बार फिर उबरने की कोशिश कर रहा है. लेकिन आतंकी कनेक्शन रखने वाली तबलीगी जमात को भारत ही नहीं पूरे विश्व में कोरोना कैरियर के रूप में याद रखा जाएगा.

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