तात्कालिक हित नहीं, शाश्वत हित में है राष्ट्रहित – डॉ. मोहन भागवत जी Reviewed by Momizat on . नई दिल्ली. भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी जी की स्मृति में स्वदेशी जागरण मंच द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में व्याख्यानमाला का आयोजन नई दिल्ली. भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी जी की स्मृति में स्वदेशी जागरण मंच द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में व्याख्यानमाला का आयोजन Rating: 0
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    तात्कालिक हित नहीं, शाश्वत हित में है राष्ट्रहित – डॉ. मोहन भागवत जी

    नई दिल्ली. भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी जी की स्मृति में स्वदेशी जागरण मंच द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया. व्याख्यानमाला में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि दत्तोपंत ठेंगड़ी जी का व्यापक व्यक्तित्व होते हुए भी हर छोटा बड़ा कार्यकर्ता उनसे निःसंकोच अपनी बात कह पाता था. हमको यह देखना पड़ेगा कि विचारों के अनुसार दत्तोपंत जी का जीवन कैसा था. दत्तोपंत जी ने जो संगठन और व्यक्ति तैयार किये, उनमें उन्होंने कैसा भाव भरा यह देखने की आवश्यकता है. सारे विषयों में जो उपयोगी है, ऐसा उनका विचार था. मजदूर संगठन जो उन्होंने खड़ा किया, इसका अध्ययन चीन तक में किया गया और इसे उन्होंने स्वीकार भी किया.

    सरसंघचालक जी ने कहा कि भारत की विशिष्ट परिस्थिति और यहां की सनातन विचारधारा के आधार पर समयोजित क्या करना है, इसको अभिव्यक्त करने के लिए दत्तोपंत जी ने ऐसे संगठन खड़े किये. भारत की यह सनातन दृष्टि वास्तव में वैश्विक दृष्टि है. यह किसी जन विशेष, भूमि विशेष, किसी एक समय विशेष के लिए नहीं है, उसकी दिशा तो एक सनातन, शाश्वत मार्गदर्शन करने वाली है. दीनदयाल जी के इसी एकात्म मानव दर्शन के ऑपरेटिंग पार्ट को प्रत्यक्ष जमीन पर उतारने का काम दत्तोपंत जी ने किया. लोक संगठन कभी सत्ता के पिछलग्गू नहीं होने चाहिए, सत्ता की राजनीति से उनको अलग रहना चाहिए. भारत की सनातन दृष्टि सबका सुख और कल्याण चाहती है, चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का उत्कर्ष इसमें समाहित है.

    मोहन भागवत जी ने कहा कि मजदूर एकता में दत्तोपंत कभी पीछे हटे नहीं, मजदूरों के हित में स्वयं को पीछे रखकर अन्य संगठनों को उन्होंने साथ में लिया. तात्कालिक स्वार्थ और हित का कभी दत्तोपंत जी विचार नहीं करते थे, वह शाश्वत हित का विचार करते थे. मजदूरों का हित केवल मजदूरों की स्वार्थ सिद्धि में नहीं है, उनके राष्ट्र भक्त होने में भी है. जिनको जल्दी नेता बनना है, वह तत्कालिक स्वार्थ सिद्धि की बात करते हैं, लेकिन वास्तव में किसी व्यक्ति या समूह के हित की बात कौन सी है? इसलिए मजदूर संघ ने चाइना का आक्रमण होने के बाद अन्य मजदूर संगठनों से परे अपने संगठन को बताया कि सब आंदोलन बंद करो और ओवर टाइम करो, पैसे मत लो देश संकट में है. देश बचेगा तो मजदूर बचेगा, देश बचेगा तो छात्र बचेगा. इस अवसर पर स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह संयोजक सरोज मित्र जी ने स्वदेशी के संदर्भ में दत्तोपंत जी के विचार रखे.

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