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तिरुपति बालाजी मन्दिर की अचल संपत्तियों की नहीं होगी नीलामी

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आंध्र प्रदेश की जगनमोहन रेड्डी सरकार ने दबाव में वापस लिया निर्णय

नई दिल्ली. तिरुपति बालाजी का दिव्य व भव्य मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के तिरुपति में तिरुमाला पर्वत श्रृंखला पर स्थित है. भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर भारत के प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है. श्रद्धालु तिरुपति बालाजी को विभिन्न नामों से पुकारते हैं. कोई उन्हें वेंकटेश्वर कहता है तो कोई श्रीनिवास. महिला श्रद्धालु उन्हें गोविंद अथवा गोविंदा नाम से पुकारती हैं. तिरुपति बालाजी मंदिर के आसपास बनी पहाड़ियां शेषनाग के सात फनों के आधार पर बनी होने से सप्तगिरि कही जाती है. भगवान वेंकटेश्वर का यह मंदिर सप्तगिरि की सातवीं पहाड़ी पर है. यह वेंकटाद्रि के नाम से प्रसिद्ध है. यहां वर्ष भर सभी महीनों और हर दिन देश –विदेश से लाखों की संख्या में भक्तजन का आशीर्वाद ग्रहण करने आते हैं. भगवान् वेंकटेश्वर के मंदिर तिरुपति बालाजी से जुड़ी कई मान्यताएं और विश्वास हैं जो इसकी प्रसिद्धि और सम्पन्नता का प्रमाण हैं….

सभी मंदिरों की तुलना में तिरुपति बालाजी के मंदिर को सबसे समृद्ध व संपन्न मंदिर माना जाता है. वैश्विक कोरोना महामारी के लॉकडाउन काल में यहाँ जहाँ सेवादारों के कार्यकाल को न बढ़ाने का मामला चर्चा में था, उससे ज्यादा चिंताजनक मुद्दा यह था कि फरवरी के अंत में जगन्मोहन रेड्डी सरकार ने करोड़ों हिन्दुओं की आस्था से जुड़े इस मन्दिर की 23 अचल संपत्तियों को नीलाम करने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया था, जिसके कारण न केवल आंध्र प्रदेश व दक्षिण के राज्यों में ही बल्कि पूरे भारत में तीव्र रोष व्याप्त था..

ईसाई विचार के पोषक राज्य के मुख्यमंत्री जगनमोहन  रेड्डी और तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) बोर्ड के चेयरमैन पद पर बैठे उनके ससुर वाईवी सुब्बा रेड्डी पर हिन्दू हितों को आघात पहुंचाने के आरोप लगाते हुए हिन्दू समाज आक्रोशित था..

असल में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने अपनी 50 अचल संपत्तियों की नीलामी का पूरा खाका तैयार कर लिया था. उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में स्थित इन संपत्तियों को अलाभकारी बताते हुए इनकी नीलामी का फैसला किया गया था. वेंकटेश्वर  मंदिर का संचालन करने वाले इस बोर्ड की तिरुमला में वीडियो कांफ्रेंसिंग से पांच घंटे चली बैठक में यह निर्णय लिया गया था. लेकिन विवाद के राष्ट्रीय स्तर पर पहुँच जाने से हिन्दू समाज के संभावित आक्रोश और दबाव के चलते आंध्र प्रदेश की जगनमोहन रेड्डी सरकार को यह तुगलकी आदेश वापस लेना पड़ा है. राज्य सरकार ने इन संपत्तियों की नीलामी पर रोक संबंधी एक आदेश भी जारी किया है..

टीटीडी बोर्ड के चेयरमैन वाईवी सुब्बा रेड्डी ने कहा, ‘मीडिया के एक वर्ग और कुछ निहित स्वार्थी लोगों की तरफ से 50 अचल संपत्तियों की नीलामी के संबंध में पैदा किए गए विवाद को खत्म कर दिया गया है.’ आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी की सलाह पर बोर्ड ने तिरुपति में करोड़ों की लागत से बच्चों के लिए मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल खोलने का फैसला किया है.

तिरुपति बालाजी मन्दिर की तरह ही न केवल दक्षिण भारत बल्कि उत्तर भारत में भी मन्दिरों के अधिग्रहण और उनमें सरकारी हस्तक्षेप के प्रयास नए नहीं हैं, लेकिन संकटकाल और सुख दुःख में सबके काम आने वाले इन मन्दिरों को हिन्दू समाज न किसी की निजी संपत्ति रूप में स्वीकारेगा और न ही सरकारी नियंत्रण में ही इनको करने की स्वीकृति देगा ..

मंदिर में सीमित श्रद्धालुओं को मिलेगी दर्शन की अनुमति

टीटीडी अधिकारियों ने कहा कि लॉकडाउन के बाद दर्शन के लिए सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को अनुमति दी जाएगी. अधिकारी ने कहा कि हम सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए अनुमति देंगे. आंध्र प्रदेश राज्य पथ परिवहन निगम के अधिकारी तिरुपति से तिरुमला तक बसें चलाने की व्यवस्था करेंगे, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ हर यात्री को मास्क पहनना जरूरी होगा..

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