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तुमकुर के संत सम्मेलन ने दिया सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने का संदेश

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Tumkuru Sant Sammelan--तुमकुर. धर्मांतरण पर प्रतिबन्ध लगाने और हिन्दू समाज के भीतर अस्पृश्यता और जातिवाद जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के स्पष्ट सन्देश के साथ दो दिवसीय ऐतिहासिक संत सम्मेलन बुधवार की शाम को कर्नाटक के तुमकुर में संपन्न हुआ. 11 और 12 नवंबर 2014 को आयोजित यह दो दिवसीय संत सम्मेलन विश्व हिंदू परिषद द्वारा अपने स्वर्ण जयंती समारोह श्रंखला के अंतर्गत  आयोजित किया गया था.

अपने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से विहिप के मार्गदर्शक श्री अशोक सिंघल सम्मेलन में उपस्थित नहीं हो सके. समापन भाषण में उनके उपस्थित रहने की आशा थी. हिन्दू समाज के विभिन्न मत, पंथों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 600 संत महात्मा इस सम्मेलन में एकत्र हुये. संत सम्मेलन का उदघाटन सिद्गंगा मठ के स्वामी डॉ.शिवकुमार स्वामीजी के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने तुमकुर में मंगलवार दिनांक 11 नवम्बर को प्रातः किया था.

 संत सम्मेलन में पारित संकल्प :

unnamed (1)1 भारत में मवेशियों के मांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाये. भारत सरकार को चाहिये कि वह गौहत्या करने वाले नवीन बूचड़खानों (स्लॉटर हाउस) को लाइसेंस न दे.

2 गाय को ‘भारत का राष्ट्रीय पशु’ घोषित किया जाये तथा इसे ‘गौवध मुक्त राष्ट्र’ बनाया जाये.

3 समान नागरिक संहिता लागू हो.

4 धर्म परिवर्तन को रोकने के लिये कानूनी उपाय किए जायें.

5 केंद्र सरकार से मांग की गई कि “2014 में गर्भावस्था की चिकित्सकीय समाप्ति के लिये बने कानून को वापस लिया जाये.

Tumkuru- Karnatak Sant Sammelanहिन्दू समाज के सम्मुख तथा अन्दर उपस्थित सामाजिक धार्मिक चुनौतियों पर अनेक संत महात्माओं ने अपने विचार व्यक्त किये. प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से धर्मान्तरण को बढ़ावा देने के प्रयासों पर चिंता व्यक्त की गई तथा उन्हें रोकने की आवश्यकता मुख्य रूप से प्रतिपादित की गई. कुछ वक्ताओं ने पूर्व में धर्म परिवर्तन कर चुके समाज बंधुओं को पुनः घर वापस लाने की रणनीति बनाने का सुझाव दिया. अस्पृश्यता और जाति प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों से लड़ने के लिये हिंदू समाज के सभी मत और पंथों में एकता की आवाज भी इस सम्मेलन में जोर शोर से उठी.

 

unnamedसम्मेलन में सिद्धगंगा मठ के डॉ. शिवकुमार स्वामीजी, पेजावर पीठ उडुपी के विश्वेश्वर तीर्थ स्वामीजी, आदिचुनचुन मठ के श्री निर्मलनाथानंद स्वामीजी, श्री शिवरात्रि देशीकेंद्र के स्वामीजी, आर्ट ऑफ़ लिविंग के श्री श्री रविशंकर जी, बेली मठ के स्वामीजी श्री शिवरुद्र  स्वामीजी, स्वर्णवेली सोंडा मठ के श्री श्री गंगाधरेश्वर  स्वामीजी, धर्मस्थला के डॉ वीरेन्द्र हेगड़े, सिद्गंगा मठ के श्री सिद्धलिंगा स्वामीजी, नेलमंगला सिद्धरूढ़ मठ की साध्वी उमा भारती, तिप्तूर के श्री परदेशीकेंद्र स्वामीजी, रामकृष्ण-विवेकानन्द आश्रम के डॉ वीरेशानंद स्वामीजी, हम्पी के श्री विद्यारण्य स्वामीजी, गोंडी के श्री नामदेवानंद स्वामीजी, कडुर के श्री रूद्रमुनि शिवाचार्य स्वामीजी, कनकपुरा के श्री मुम्मादी निर्वाण स्वामीजी, मंत्रालय के श्री सुबुदेंद्र स्वामीजी, कुक्के सुब्रमण्या के स्वामी विद्याप्रसन्न और अन्य कई प्रमुख संत, सम्मेलन के दौरान उपस्थित रहे.

विहिप के अंतरराष्ट्रीय सचिव चम्पत रॉय, कर्नाटक विश्व हिन्दू परिषद् के प्रमुख प्रोफेसर एमबी पौराणिक, विहिप के बरिष्ठ वाई के राघवेंद्र राव, विहिप के संगठन मंत्री गोपाल नागरकट्टे और अन्य प्रमुख नेताओं की कार्यक्रम में उपस्थिति रही.

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