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‘दृष्टि’ सुझाएगी नई सरकार को महिला सुरक्षा के उपाय

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नई दिल्ली . स्त्री अध्ययन एवं प्रबोधन केन्द्र के रूप में लगभग पिछले एक दशक से सक्रिय संस्था ‘दृष्टि’ ने 10 मई को देश की राजधानी में बहादुर ‘निर्भया’ को उसके जन्म दिन पर महिला सुरक्षा नीति पर संगोष्ठी आयोजित कर श्रद्धांजलि अर्पित की. साथ ही, महिलाओं के  सुरिक्षत  वातावरण के निर्माण के लिये सतत जागरूक और आंदोलनरत रहने का संकल्प लिया. संगोष्ठी के माध्यम से दृष्टि जहां नई केन्द्र सरकार से कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये आवश्यक सभी उपाय करने का आग्रह करने जा रही है, वहीं समाज में संस्कारक्षम वातावरण के निर्माण के लिये स्वयं को भी तैयार कर रही है.

महिला समन्वय की राष्ट्रीय संयोजिका सुश्री गीता ताई गुण्डे ने महिलाओं की वर्तमान समस्याओं के मूल कारणों की ओर ध्यान देने का परामर्श देते हुए कहा कि मूल्य आधारित समाज बनेगा तो यह सभी जगह परिलक्षित होगा, चाहे पुलिस हो या न्याय व्यवस्था. इसके लिये उन्होंने शिक्षा प्रणाली को ऐसा बनाये जाने पर जोर दिया, जिससे व्यक्ति के आचरण में नैतिक मूल्य उतर आयें. उन्होंने महिला सुरक्षा के विषय को सामाजिक समस्या बताते हुए कहा कि यह आवश्यक नहीं कि महिलायें ही इसकी चिंता करे. उन्होंने कहा कि इस देश की परम्परा के अनुसार निश्चित तौर पर समाज इसका संज्ञान लेगा. उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती बुराइयों से इतना आक्रांत होने की आवश्यकता नहीं है कि हम अच्छाई को देख ही न पायें और उसकी सराहना करना छोड़ दें.

सुश्री गीता ताई ने देश की समृद्ध परम्परा की पुष्टि में बाबा साहब अंबेडकर का उस कथन का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि वेदों ने जितना अधिकार स्त्रियों को दिया था, उतना अधिकार हम अपने नवनिर्मित संविधान में नहीं दे पाये हैं.

संगोष्ठी में अपनी जान देकर राष्ट्रीय चेतना की अलख जगा देने वाली बहादुर बेटी निर्भया के माता-पिता भी उपस्थित थे. राज्य सभा की सदस्य श्रीमती स्मृति ईरानी ने निर्भया और उनके माता-पिता को नमन करते हुए भावपूर्ण अंदाज में कहा कि यदि आज वह जीवित होती तो वह अपना 25वां जन्म दिन मनाती. उन्होंने संपूर्ण समाज की मानसिकता में बदलाव लाने के लिये सभी मोर्चों पर एकसाथ युद्धस्तर पर काम करने का आह्वान किया. साथ ही, यह भी कहा कि कानूनों में परिवर्तन का धरातल पर अपेक्षित असर देखने के लिये नई सरकार को प्रशासनिकरूप से बेहद चुस्त-दुरुस्त होना होगा. श्रीमती ईरानी ने उदाहरण के तौर पर बताया कि 2005 में घरेलू हिंसा के निरोध के लिये बने कानून में अब तक एक फूटी कौड़ी का भी आवंटन नहीं हुआ है.

श्रीमती ईरानी  ने कहा कि सरकारों को संवेदनशीलता के साथ समस्या के हर पहलू के अध्ययन और समाधान के लिये तत्पर रहना चाहिये. उन्होंने बताया कि बिहार में 50 प्रतिशत बलात्कार के मामले तब होते हैं जब महिलायें शौच के लिये जातीं हैं. उन्होंने इस बात पर खेद प्रकट किया कि हमारी सरकार ने महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा की समस्या पर कोई गंभीर सर्वेक्षण नहीं कराया, जबकि जर्मनी के एक श्रमिक संगठन ने ऐसा एक सर्वेक्षण किया है, जिससे हमें उचित मार्गदर्शन प्राप्त हो सकता है.

देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी डा. किरण बेदी ने महिलाओं पर होने वाले यौन हमलों से रोकथाम के लिये लिये अपना अभिनव 6पी प्लान प्रस्तुत किया. उनका यह लेख  ‘6पीज प्लान फॉर क्राइम प्रीवेंशन’ पहले ही एक समाचार पत्र में प्रकाशित हो चुका है. इस योजना में उन्होंने कहा है कि पीपुल(अभिभावक), पुलिस, पॉलिटीशियंस, प्रॉसीक्यूशन, पिक्चर्स (मीडिया, फिल्म और विज्ञापन) और प्रिजंस को एक दूसरे के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय अपराध निरोधक योजना का नेतृत्व प्रधानमंत्री को करना चाहिये, क्योंकि इसमें कई मंत्रालयों के बीच समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है. साथ ही, इस योजना को राज्यों, जिलों और ग्राम स्तर स्तर तक ले जाया जाना आवश्यक है.

उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता श्रीमती माधवी दीवान ने ऑनर किलिंग पर अभी तक कोई कानून न होने की ओर ध्यान आकृष्ट किया और कहा कि मानसिकता में बदलाव के लिये जेन्डर सेंसेटाइजेशन पर शिक्षण आवश्यक हो गया है. उन्होंने यह भी बताया कि एक विद्यालय में ऐसा शिक्षण प्रारम्भ करने में उन्हें उत्साहवर्धक सफलता मिली है.

स्वयंसेवी संस्था ‘संपूर्णा’ की अध्यक्ष डा. शोभा बिजेन्द्र ने 10 मई को महिला सुरक्षा दिवस घोषित करने की मांग की. उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षा का अधिकार मिलना चाहिये. साथ ही इस बात पर गौर किया जाना चाहिये कि देश में महिला सुरक्षा से जुड़े 15 कानून हैं, लेकिन इन पर ठीक से अमल के लिये ठोस कदम नहीं उठाये गय़े हैं.

निर्भया की माताजी ने जहां एक दूसरे की मदद कर इंसानियत के रिश्ते को मजबूत करने का संकल्प लेने का आह्वान किया, वहीं पिता श्री बद्रीनाथ ने यौन हमलों के नाबालिग दोषियों को सजा देने के लिये कानून में यथोचित परिवर्तन की मांग की.

कार्यक्रम के प्रारम्भ में दृष्टि की सचिव डा. अंजलि देशपांडे ने अपनी संस्था का परिचय देते हुए बताया कि यह स्त्री अध्ययन और प्रबोधन दोनों कार्य कर रही है. इसके लिये सूचनाओं को 16 विषयों में वर्गीकृत किया जाता है. इसके आधार पर एक मासिक पत्रिका ‘महिला विश्व’ का प्रकाशन किया जाता है. कार्यक्रम का कुशल संचालन उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता सुश्री मोनिका अरोड़ा ने किया. प्रश्न एवं उत्तर कार्यक्रम के दौरान सुश्री अरोड़ा एवं श्रीमती स्मृति ईरानी ने अच्छे प्रश्नकर्ताओं से अपने सुझावों / विचारों को आलेख रूप में भेजने का आग्रह किया. इस अवसर पर लॉ कॉलेज, अमृतसर की प्रो. विनय कपूर की पुस्तक ‘पर्सपेक्टिव्ज ऑन इंडियन पर्सनल लॉज, स्टेटस ऑफ वोमेन’ का डा. किरन बेदी और श्रीमती स्मृति ईरानी ने संयुक्त रूप से विमोचन भी किया.

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