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देवर्षि नारद जी के सिद्धांत पत्रकार जगत में ग्रहण करने योग्य – प्रो. बी.के. कुठियाला

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आगरा (विसंकें). आदि पत्रकार देवर्षि नारद की जयंती पर विश्व संवाद केंद्र ब्रज प्रांत द्वारा वेबिनार का आयोजन किया गया. जिसमें माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल के पूर्व कुलपति एवं हरियाणा उच्च शिक्षा आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर बी.के. कुठियाला मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे.

उन्होंने कहा कि वर्तमान में नारद जी के सिद्धांत पत्रकार जगत में ग्रहण करने योग्य हैं. पत्रकारिता में राष्ट्रीय सोच और ईमानदारी का अत्यंत महत्व है. वर्तमान समय में महत्व और भी अधिक है. समाचार भेजना भी आवश्यक है, लेकिन यदि समाचार के प्रकाशन से वैमनस्यता उत्पन्न हो तो समाचार को प्रकाशित करना आवश्यक नहीं. सोशल मीडिया पर असत्य भ्रामक समाचारों पर रोक लगनी चाहिए. उन्होंने कहा कि नारद जी का आवागमन स्वतंत्र था, वह आसानी से तीनों लोकों में से किसी भी लोक में आ जा सकते थे. साथ ही साथ उनके प्रवेश पर भी किसी प्रकार का निषेध नहीं था. रामचरितमानस में उदाहरण मिलता है कि वह रावण के शयनकक्ष में कई बार रावण से मिलने के लिए जाते रहे और उसे प्रभु राम के विरुद्ध गलत कृत्य करने से रोकने का प्रयास करते रहे. नारद जी ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जो अपने मन की गति से भी तेज गति से कहीं पर भी आने जाने के लिए जाने जाते हैं. नारद कोई एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक चलती फिरती संस्था थे. जिसमें कई लोग उस नारद संस्था का प्रतिनिधित्व करते थे.

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बारे में कुठियाला जी ने कहा कि समाचार की पुनरावृति बार-बार नहीं होनी चाहिए. समाचार बार-बार कहने से उसका महत्व खत्म हो जाता है. यदि समाचार के महत्व को बनाए रखना है तो समाचार को पुनरावृति से बचाना चाहिए.

सोशल मीडिया के बारे में कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक समाचारों से बचना चाहिए. अधिकांश लोग बिना पढ़े और बिना जांचे ही समाचारों को आगे बढ़ा देते हैं. अध्ययन कर ही सामग्री को आगे प्रेषित करना चाहिए. अन्यथा समाज में एक अलग ही विचार उत्पन्न हो जाता है. सोशल मीडिया पर कई प्रकार के झूठे समाचार आते हैं, इन्हें आगे नहीं बढ़ाना चाहिए.

समाज में नकारात्मक समाचारों को प्रेषित करने वाले पत्रकारों के संबंध में कहा कि इस प्रकार के पत्रकार अपने कर्तव्य का निर्वहन ठीक प्रकार से नहीं कर रहे हैं. उन्हें सत्य समाचार ही सभी के समक्ष रखना चाहिए. पत्रकारों को यह स्वविवेक के आधार पर निर्णय लेना चाहिए.

आज समाचार पत्र और विविध चैनल आदि पूंजीवादी लोगों के हाथ में हैं. ऐसे लोगों के हाथ में होने के कारण पत्रकारिता स्वतंत्र नहीं रह गई है. पत्रकारिता को स्वतंत्रता पूर्वक कार्य करने के लिए पत्रकारों को अपने दृढ़ निश्चय का परिचय देना होगा. उन्हें अपनी दृढ़ता और अपनी ईमानदारी व समाज को दिशा देने के लिए समाचार का प्रेषण करना चाहिए.

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