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    देश के मीडिया को राष्ट्रवाद के प्रति सशक्त होना होगा – प्रेम शुक्ला

    अवध.. (2)अवध (विसंकें). दोपहर का सामना के कार्यकारी संपादक प्रेम शुक्ला ने कहा कि गुण अवगुण के बीच न्याय सुनिश्चित करना पत्रकार का धर्म है. पत्रकारिता सभी स्तम्भों की आत्मा है. जिन देशों की पत्रकारिता में राष्ट्रवाद का भाव रहा है, उन देशों ने उन्नति की है. समाचारों के चयन में निष्पक्षता की बात करने वाले बीबीसी का इंग्लैण्ड के हितों के प्रति, सीएनएन का अमेरिका के हितों के प्रति और अलजजीरा की प्राथमिकता खाड़ी देशों के हितों में होती है. यदि हमारा मीडिया राष्ट्रवाद के प्रति सशक्त होता तो 1993 में मुंबई में हुए सीरियल बम विस्फोटों (आतंकी हमला) को संयुक्त राष्ट्र संघ में पहली आतंकी घटना बताने में सफल रहते. हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता की कमी के कारण ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने उसे साम्प्रदायिक लड़ाई की घटना बता दिया. जबकि अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर पर हुए हमले को अमेरिकी मीडिया ने आतंकी घटना बता दिया. यदि यह घटना भारत में होती तो हम इसे आतंकी घटना नहीं साबित कर पाते. उन्होंने उदाहरण दिया कि सबूतों के अभाव में छूटे आतंकी फहीम अंसारी को उत्तर प्रदेश सरकार निर्दोष मुस्लिम युवक बताकर छोड़ती है. वह विश्व संवाद केन्द्र द्वारा आयोजित नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह में संबोधित कर रहे थे.

     

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति आपका क्या दायित्व है. यह आपको स्वयं समझना होगा. नारद में यह दायित्व समझने की क्षमता थी, लोकमंगल से आपका विकास होगा. आपके विकास से आपके प्रदेश का विकास होगा और प्रदेश से देश का विकास होगा और देश से समग्र का विकास होगा. विश्व के 176 देशों में अभिव्यक्ति की आजादी के मामले में 78 वें पायदान पर हैं. नए मीडिया के आने के बाद नारद घर-घर में पहुंच गए हैं, लेकिन उसका मूल ढांचा पहुंचे तभी परिवर्तन संभव है. जब तक अभिव्यक्ति की आजादी नहीं होगी, तब तक मीडिया स्वतंत्र नहीं होगा. विचारणीय यह है कि आज हम नारद की पत्रकारिता को बचा पाने की स्थिति में हम हैं क्या? कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने कहा कि नारद ने हमेशा लोकहित का सुझाव दिया. उनका सुझाव मानने के कारण हिर्णाक्ष के पुत्र प्रह्लाद का तमाम संकटों बाद भी अहित नहीं हुआ और रावण नारद जी का सुझाव न मानने के कारण रावण का अंत हो गया. आज पूरे समाज में गिरावट आयी है. इससे मीडिया अछूती नहीं है.


    अवध.. (1)कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष अरविन्द कुमार सिंह ने कहा कि नारद ने पत्रकारिता को उद्योग बनाने से लेकर पेड न्यूज के प्रति शिकायत दर्ज करा कर भगवान विष्णु से मुक्ति मांग ली थी.

    कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजनाथ सिंह सूर्य ने कहा कि अब पत्रकारिता योग्यता पर नहीं लाइजनिंग पर होती है. पहले पत्रकारों की नियुक्ति होती थी, अब अनुबंध होता है.


    इस अवसर पर पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पांच पत्रकारों को सम्मानित भी किया गया. सम्मानित होने वाले पत्रकारों में शलभमणि त्रिपाठी (आईबीएन 7 के लखनऊ ब्यूरो ), विश्वजीत बनर्जी (पायनियर अंग्रेजी, लखनऊ संस्करण के संपादक), राकेश कुमार शर्मा (नेशनल ब्यूरो स्वदेश, दिल्ली) रमेश चन्द्र अकेला (डीएनए ब्यूरो चीफ, कौशांबी और अमर उजाला लखनऊ के छायाकार अर्जुन साहू शामिल हैं. लखनऊ जन संचार एवं पत्रकारिता संस्थान के निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने विश्व संवाद केन्द्र की गतिविधियों की जानकारी लोगों के समक्ष रखी. इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त प्रचारक संजय, विभाग संघ चालक जय कृष्ण सिन्हा सहित गणमान्यजन उपस्थित थे.

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