देश व समाज पर आने वाली आपदा के समय स्वयंसेवक सबसे आगे रहता है – आलोक कुमार Reviewed by Momizat on . मेरठ. हापुड़ में संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र प्रचारक आलोक कुमार जी ने कहा कि ‘संघ में 19 मेरठ. हापुड़ में संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र प्रचारक आलोक कुमार जी ने कहा कि ‘संघ में 19 Rating: 0
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    देश व समाज पर आने वाली आपदा के समय स्वयंसेवक सबसे आगे रहता है – आलोक कुमार

    मेरठ. हापुड़ में संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र प्रचारक आलोक कुमार जी ने कहा कि ‘संघ में 1927 से शिविर प्रारम्भ हुए. शिविर में साथ रहने, खाने, कार्य करने से सामूहिकता का भाव निर्माण होता है. यह भाव ही संघ की शक्ति है और इस शक्ति द्वारा ही संघ कार्यकर्ता देश के बड़े-बड़े कठिन दिखने वाले कार्य करते आए हैं. देश व समाज पर आने वाली दैवीय, प्राकृतिक या मानवीय आपदा के समय पर स्वयंसेवक सबसे आगे रहता आया है.

    उन्होंने कहा कि अब संघ ने कुछ विशेष कार्य अपने हाथ में लिये हैं, जिन्हें संघ में गतिविधि कहा जाता है. हिन्दू संस्कृति का प्रतीक गौ माता है. इसका संरक्षण एवं संवर्धन होना चाहिये. इसलिये एक गतिविधि बनायी है गौ-सेवा. जिसका उद्देश्य है – शहरों में गौशाला खुलें और गांवों में लोग गाय पालें, गौ वंश वृद्धि हो, संरक्षण हो. देश में परिवर्तन दिखायी दे रहा है, गौशालाएं बढ़ी हैं, देशी गायों के दूध के प्रति आकर्षण बढ़ा है, दूध की मांग बढ़ी है.

    दूसरी गतिविधि है ग्राम विकास – शहरीकरण बढ़ा है. जिसके कारण गन्दगी और सभी प्रकार का प्रदूषण बढ़ा है. गाँव में रहना स्वास्थ्य के लिये लाभप्रद है और देश के लिये हितकर भी है. गाँव का समग्र विकास हो, गाँवों में रहने की रुचि बढ़े, यह समय और देश की आवश्यकता है.

    तीसरी गतिविधि है धर्म जागरण – किसी कारण से अपना हिन्दू धर्म छोड़ गए, परन्तु अपने पूर्वजों की स्मृति है और अपने धर्म में स्वेच्छा से वापस आना चाहते हैं. ऐसे लोगों की घर वापसी कराने का कार्य कर रहा है धर्म जागरण विभाग.

    चौथी गतिविधि है सामाजिक समरसता. समाज में जाति भले ही रहे, परन्तु जातीय आधार पर छुआछूत, छोटा-बड़ा नहीं होना चाहिये. सरसंघचालक मोहन भागवत जी तो कहते हैं – सम्पूर्ण हिन्दू समाज के जल स्थान, देवस्थान (मंदिर) और शमशान एक होने चाहिये.

    भारतीय संस्कृति परिवार संस्कृति है. हमारा चिन्तन विश्व को ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ परिवार मानने वाला है. परन्तु आज शहरीकरण के कारण परिवार घट रहे हैं, छोटे हो रहे हैं. परिवार टूटें नहीं, इसके लिये प्रयास कर रही है परिवार प्रबोधन गतिविधि.

    हिन्दू समाज में बहुत सारे मत सम्प्रदाय हैं, जातीय संगठन हैं, मठ, मंदिरों के ट्रस्ट हैं. ये सभी हिन्दू समाज के हित और उन्नति के लिये साथ मिलकर बैठें, विचार करें. इस प्रयास को करने वाली गतिविधि का नाम है सामाजिक सद्भाव.

    एक कार्य संघ ने इसी वर्ष अपने हाथ में लिया है, पयार्वरण एवं जल संरक्षण. तेजी से बढ़ती जनसंख्या के कारण आज अच्छा भोजन, पानी, वायु मिलना कठिन हो गया है, भूजल का स्तर घट रहा है. इसीलिये पर्यावरण की रक्षा वृक्षारोपण एवं जल की वृद्धि वर्षा जल को संग्रह से होगी. तेजी से इसके प्रयास करने होंगे. अब कृतिरूप में होना चाहिये. संघ की सामूहिक संगठित शक्ति द्वारा किये गये प्रयासों द्वारा परिवर्तन दिखना चाहिये.

    इस वर्ष मेरठ प्रान्त के 1080 स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण लिया.

     

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