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द वायर की फर्जी खबरों के सहारे पूर्व नौकरशाहों का ‘झूठा’ मुस्लिम उत्पीड़न

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हरीश चंद्र

धर्मशाला. कोरोना संक्रमण के बीच देश के लगभग 101 पूर्व आईएएस अधिकारियों ने मुस्लिमों का उत्पीड़न करने का जो मामला पत्र के माध्यम से उठाया है. वह अब धीरे-धीरे झूठ का पुलिंदा बनता जा रहा है. जिन खबरों का हवाला देकर पूर्व नौहरशाहों ने कोरोना संक्रमण के इस दौर में मुस्लिमों को निशाना बनाए जाने का मुद्दा उठाया था, उन खबरों की छानबीन करने के बाद अब एक-एक करके सारी खबरें झूठी निकल रही हैं. हिमाचल प्रदेश से जुड़ी व वामपंथी गिरोह के सदस्य द वायर में प्रकाशित एक झूठी खबर का भी इन पूर्व नौकरशाहों ने अपने पत्र में हवाला दिया है. लेकिन प्रशासन की ओर से जारी पत्र ने खबर के झूठे होने पर मोहर लगा दी है.

द वायर ने खबर प्रकाशित की थी कि पंजाब के मुस्लिम गुज्जरों को हिमाचल राज्य में प्रवेश से वंचित किया जा रहा है, उनका उत्पीड़न हो रहा है. जबकि उनके पास प्रशासन की ओर जारी कर्फ्यू पास भी है. द वायर ने दावा किया था कि गुज्जरों के पास होशियारपुर जिला प्रशासन की ओर से जारी कर्फ्यू पास होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश पुलिस ने दूध बेचने वाले गुज्जर मुस्लिमों को ऊना जिला में प्रवेश नहीं करने दिया.

वास्तविकता यह है कि लॉकडाउन के शुरू होते ही हिमाचल में जरूरी खाद्य सामग्री लेकर आ रहे वाहन के लिए कर्फ्यू पास की आवश्यकता है. कर्फ्यू के कारण आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई पर कोई प्रतिबंध नहीं है., लेकिन बिना कर्फ्यू पास के कोई भी व्यक्ति सप्लाई के लिए निजी वाहनों का उपयोग नहीं कर सकता. होशियारपुर से आने वाले गुज्जरों को भी रोका नहीं गया था, वे निजी वाहन से आपूर्ति के लिए आ रहे थे, जबकि उनके पास कर्फ्यू पास नहीं था. उन्हें पंजाब में सक्षम अधिकारी से इंटर स्टेट कर्फ्यू पास लेने के लिए कहा गया था.

पूर्व नौकरशाहों का देश के राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों को लिखे पत्र में इस झूठी खबर के आधार पर मुस्लिम उत्पीड़न का दावा किया गया है. जबकि तबलीगी जमात के बाद कोरोना संक्रमण देश में कैसे फैला है, वह सबके सामने है.

झूठ गढ़ने की फैक्ट्री बन चुका वामपंथी मीडिया पोर्टल ‘द लायर’ कोरोना के बीच समाज में अराजकता फैलाने के लिए नये कारनामे करता रहता है. पहले भी एक रिपोर्ट में दावा किया कि पंजाब और हिमाचल की सीमा पर मुस्लिम समुदाय के कुछ बच्चे, औरतें, पुरुष बिना खाना-पीना के रहने को मजबूर हैं, क्योंकि उन्हें गाली देकर, मारकर उनके घरों से खदेड़ दिया गया है. इस खबर को हाल ही में झूठ फैलाने के लिए कोर्ट का नोटिस पा चुके एस वरदराजन ने इसे ट्वीट किया. इस पर होशियारपुर पुलिस ने स्वयं सबूत पेश कर साबित किया कि द वायर झूठ फैलाने का काम कर रहा है और ऐसा कुछ भी नहीं हैं.

होशियारपुर पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल से एक विडियो भी ट्वीट किया. वीडियो में सराजदीन नाम का युवक पुलिस से बातचीत करता नजर आया, उसने पुलिस को बताया कि उन्हें यहाँ पर कोई भी दिक्कत नहीं है. उन्हें दो टाइम का खाना दिया जा रहा है. उन्हें राशन मिल रहा है. इसी तरह एक अन्य आदमी ने भी वीडियो में यही बातें दोहराईं. जिसे शेयर करते हुए पुलिस ने लिखा कि कृपया झूठी न्यूज न फैलाएँ, वे लोग ठीक हैं.

सराजदीन नाम का युवक जो पुलिस द्वारा जारी वीडियो में नजर रहा हैइसी युवक के नाम पर वायर ने अपनी रिपोर्ट में प्रोपेगेंडा तैयार किया और लिखा कि उनके गाँव में उन्हें मारा पीटा गया गया और गाली देकर भगाया गयाजिसके कारण भूखे प्यासे रहने को मजबूर हैं.

 

 

 

 

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