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पंजाब प्रांत का घोष वर्ग सम्पन्न

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2लुधियाना. संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि यह समाज में परस्पर मनों को भी जोड़ता है. यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पंजाब प्रान्त के सह प्रान्त कार्यवाह श्री अमृतसागर ने कमला लोहटीया सनातन धर्म कालेज में संपन्न चार दिवसीय घोष वर्ग के समापन समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किये. उन्होंने कहा कि घोष स्वयंसेवकों के बीच कदम से कदम मिला कर चलने की सीख देता है और यही स्वयंसेवक आगे समाज में जाकर एकता के भावों का प्रसार करते हैं.

1उन्होंने कहा कि आज समाज में पारस्परिक एक्यभाव पैदा करने की आवश्यकता है, क्योंकि समाज में जितना विखण्डन आज है, उतना पहले कभी नहीं देखने को मिला. राजनीति के साथ-साथ समाज को धर्म के नाम पर भी विखण्डित किया जा रहा है. इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय टोली के सदस्य श्री रणवीर ने कहा कि आदर्श कार्यकर्ता हर विकट परिस्थिति में अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने से नहीं रुकता. उन्होंने कहा कि संघ में कार्यकर्ताओं को बहुत तरह की विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. संघ में काम करने के लिये पारिवारिक विरोध के साथ-साथ बाहरी विरोध भी सहना पड़ता है, परंतु इसके बावजूद आज लाखों कार्यकर्ता अनवरत अपने एक लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और वह लक्ष्य है देश को परम वैभव की स्थिति में लेकर जाना.

314 अगस्त से कमला लोहटिया सनातन धर्म कालेज से शुरू हुआ प्रांत घोष वर्ग 18 अगस्त को संपन्न हुआ. पंजाब के 32 स्थानों से आये 162 स्वयंसेवकों ने घोष वादन में गुणवत्ता बढ़ाने के लिये इस वर्ग में भाग लिया. इस वर्ग को पंजाब प्रांत प्रचारक श्री किशोर कांत, प्रांत के शारीरिक प्रमुख श्री विनय कुमार, पंजाब के घोष प्रमुख श्री राम भजन का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ. जन्माष्टमी के दिन घोष वर्ग में हिस्सा लेने आये स्वयंसेवकों ने पथ संचलन किया जो कमला लोहटिया से शुरू होकर विभिन्न-विभिन्न बाजारों से होता हुआ कालेज पहुंचा.

One thought on “पंजाब प्रांत का घोष वर्ग सम्पन्न

  1. I am indeed delighted to see PUNJAB GHOSH VARGA post and recall my association with it. I too have learned Ghosh (Aanak) in 1970s during my 1st year OTC at Jallandhar and did participate in Pathsanchalans at places like Jammu, Hyderabad, Indore, Bangalore and Channai many times though I am originally a native of a far-flung area namely Baramulla, Kashmir (J&K). I still feel proud of being a Ghosh Swayamsewak.

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