पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हिंसा लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा Reviewed by Momizat on . पत्रकार संगठन एनयूजेआई ने जारी की तथ्यात्मक रिपोर्ट 'ब्लीडिंग बंगाल' नई दिल्ली. नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया और प्रभात प्रकाशन द्वारा संयुक्त रूप से प्रका पत्रकार संगठन एनयूजेआई ने जारी की तथ्यात्मक रिपोर्ट 'ब्लीडिंग बंगाल' नई दिल्ली. नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया और प्रभात प्रकाशन द्वारा संयुक्त रूप से प्रका Rating: 0
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    पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हिंसा लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा

    पत्रकार संगठन एनयूजेआई ने जारी की तथ्यात्मक रिपोर्ट ‘ब्लीडिंग बंगाल’

    नई दिल्ली. नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया और प्रभात प्रकाशन द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित समसामयिक शोध पुस्तक ब्लीडिंग बंगाल का विमोचन नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय में संपन्न हुआ. पुस्तक मई 2019 से अब तक राज्य में हुई राजनीतिक हिंसा की घटनाओं का तथ्यात्मक विवरण सामने रखती है और राजनीतिक तथा प्रशासन के गिरते स्तर को ठोस घटनाओं के माध्यम से प्रस्तुत करती है. इसमें हिंसा के शिकार सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं, आम नागरिकों एवं एक पत्रकार का विवरण भी शामिल है.

    पुस्तक के विमोचन पर वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता ने कहा कि देश में फासीवाद का कोई खतरा है तो पश्चिम बंगाल में है. उन्होंने अफसोस जताया कि बंगाल में अधिकांश मीडिया बिना कहे ही सरकार के आगे समर्पण कर गया है और सत्तारूढ़ दल की गलतियों को छापा नहीं जा रहा है. सुश्री बनर्जी का भतीजा मानो नवाब सिराजुद्दौला बन गया है.

    वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस क्लब आफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष गौतम लाहिड़ी ने कहा कि राजनतिक हिंसा के चलते बंगाल की जो छवि बन रही है, उसे देख कर सुन कर शर्म आती है. लोकतंत्र में हिंसा का न तो कोई स्थान हो सकता है और न ही कोई उसका समर्थन कर सकता है.

    एनयूजेआई के राष्ट्रीय महासचिव मनोज वर्मा ने कहा कि मीडिया समाज का आइना है और यदि किसी राज्य में लगातार राजनीतिक हिंसा की घटनाएं हो रही है, उसे देखकर मीडिया मूक दर्शक नहीं बना रह सकता. पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की घटनाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि बंगाल की स्थिति लोकतंत्र के लिए गंभीर चिन्ता का विषय है. एनयूजेआई ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक हिंसा पर ‘ब्लीडिंग बंगाल’ नाम से जो पुस्तक रूपी दस्तावेज तैयार किया है, उसमें घटनाओं को संकलित करने का काम किया है. समसामायिक विषयों पर एनयूजेआई इस प्रकार की शोधपरक रिपोर्ट समय-समय पर जारी करता रहा है.

    कार्यक्रम में मेदिनीपुर से लोकसभा सांसद दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि उन्होंने कला, साहित्य, दर्शन, संस्कृति, स्वतंत्रता संग्राम की चेतना वाले इस राज्य को अफगानिस्तान में तब्दील कर दिया है, जहां समाज को राजनीतिक कबीलों में बांट कर खूनी खेल खेला जा रहा है.

    उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिवर्तन ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई लड़ी जा रही है. मुख्यमंत्री सुश्री बनर्जी कहा करतीं थीं कि वह दार्जिलिंग को स्विट्ज़रलैंड, दीघा को गोवा और कोलकाता को लंदन बना देंगी. लेकिन आज हालत यह है कि उन्होंने बंगाल को अफगानिस्तान बना दिया है. राज्य में फिल्म कलाकार, डॉक्टर, वकील, पत्रकार सभी राज्य की सत्ता से भयभीत हैं और उससे घृणा करने लगे हैं. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विचारधारा के लिए हत्याएं हो रहीं हैं. राज्य में सामाजिक जातपात नहीं है, लेकिन राजनीतिक दलों से प्रतिबद्धताओं के हिसाब से समाज में भी ध्रुवीकरण हो गया है. विरोधी विचारधारा की हत्या एवं उत्पीड़न को जायज ठहराया जाता है. वामपंथी शासन में शुरू हुई इस बुराई के खिलाफ जीत कर सत्ता में आईं सुश्री बनर्जी भी इसी राह पर चलने लगीं हैं.

    एनयूजेआई के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राकेश आर्य ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा और मीडिया की भूमिका पर अपनी बात रखी. ‘ब्लीडिंग बंगाल’ के विमोचन कार्यक्रम में राज्यसभा टीवी के सीईओ राहुल महाजन, लोकसभा टीवी के संपादक श्याम सहाय, पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर, सहित अन्य वरिष्ठ पत्रकार, पत्रकार संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे.

    वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने कार्यक्रम का संचालन किया.

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