पादुकाकार सम्मान सम्मेलन का आयोजन Reviewed by Momizat on . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ‚ नोएडा महानगर सेवा विभाग व सेवा भारती ने शिशु मंदिर सेक्टर–12‚ में ʺपादुकाकार सम्मान समारोहʺ का आयोजन किया. पादुकाकार बंधुओं को अंगोछा‚ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ‚ नोएडा महानगर सेवा विभाग व सेवा भारती ने शिशु मंदिर सेक्टर–12‚ में ʺपादुकाकार सम्मान समारोहʺ का आयोजन किया. पादुकाकार बंधुओं को अंगोछा‚ Rating: 0
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    पादुकाकार सम्मान सम्मेलन का आयोजन

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    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ‚ नोएडा महानगर सेवा विभाग व सेवा भारती ने शिशु मंदिर सेक्टर–12‚ में ʺपादुकाकार सम्मान समारोहʺ का आयोजन किया. पादुकाकार बंधुओं को अंगोछा‚ छाता तथा माला देकर सम्मानित किया. कार्यक्रम गीत‚ संगीत‚ बोधकथा से परिपूर्ण था.

    मुख्य वक्ता सामाजिक समरसता प्रांत सह संयोजक श्याम बिहारी जी ने कहा कि पादुकाकार समाज का योगदान समाज को जोड़ने में अतुलनीय रहा है. जो गर्मी‚ सर्दी और अन्य कई प्रकार की कठिनाईयों का सामना करते हुए समाज में खड़े हैं. ताकि समाज के अन्ध बंधुओं के पैर की कांटा‚ कंकड़ आदि से रक्षा की जा सके. संत रविदास जी का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कि उन्होंने समाज को एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया.

    मुख्य अतिथि शिवलाल खण्डेलवाल ने कहा कि शबरी को श्रीराम ने गले लगाकर समाज की कुरीति और बुराई को दूर करने का संदेश दिया. वात्सल्य ग्राम‚ वृन्दावन के कार्यकारी अध्यक्ष होने के कारण उनके गुरू दादा भ्रमण कर रहे थे, दोपहर को भूख लगी तो एक महतरानी ब्राह्मण परिवारों से रोटी एकत्र करके ला रही थी, उन्होंने उससे रोटी की मांग की तो उसने कहा रोटी मैंने छू ली है तो रोटी मेरी है. ब्राह्मण की रोटी तूने छू ली जो तुम्हारी हो गई और मैं छू लूंगा तो मेरी हो जाएगी.

    दीदी मां ऋतम्भरा जी की कुछ पंक्तियां कहीं……

    एक ज्योति है सब दीपों में‚ सारे जग में नूर एक है.

    सच तो यह है इस दुनिया का‚ हाकिम और हजूर एक है…….

    नाम रूप की बात छोड़ दो‚ इन्सानों की जात एक है.

    मन से मन के तार जोड़ लो‚ सीधी सच्ची बात एक है…..

    दीप प्रज्ज्वलन के उपरान्त हनुमान चालीसा पाठ‚ देशभक्ति‚ धार्मिक संगीत से हर्षोल्लास का वातावरण था. कार्यक्रम में नोएडा महानगर के सह संघचालक दिनेश गोयल जी सहित अन्य कार्यकर्ता व स्वयंसेवक उपस्थित रहे. अंत में सभी ने सहभोज ग्रहण किया. पादुकाकार बंधुओं ने भोजन वितरण कर समरस समाज का संदेश दिया.

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