प्रपंची मीडिया गिरोह ने संघ प्रमुख के बयान को फिर अपनी सुविधा अनुसार तोड़ा मरोड़ा…..! Reviewed by Momizat on . नई दिल्ली. टीआरपी के लिए या कहें कि अपना एजेंडा सेट करने के लिए मीडिया किस तरह तथ्यों को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करता है, इसका उदाहरण आज फिर देखने को मिला. रांची नई दिल्ली. टीआरपी के लिए या कहें कि अपना एजेंडा सेट करने के लिए मीडिया किस तरह तथ्यों को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करता है, इसका उदाहरण आज फिर देखने को मिला. रांची Rating: 0
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    प्रपंची मीडिया गिरोह ने संघ प्रमुख के बयान को फिर अपनी सुविधा अनुसार तोड़ा मरोड़ा…..!

    नई दिल्ली. टीआरपी के लिए या कहें कि अपना एजेंडा सेट करने के लिए मीडिया किस तरह तथ्यों को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करता है, इसका उदाहरण आज फिर देखने को मिला. रांची में आयोजित कार्यक्रम में संघ प्रमुख के कथन को लेकर मीडिया ने यही किया. सरसंघचालक मोहन भागवत ने राष्ट्रवाद (Nationalism) शब्द को लेकर इंग्लैंड में कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत का उद्धरण दिया था. लेकिन मीडिया ने कथन को अपनी सुविधा के अनुसार प्रस्तुत किया. जैसे सरसंघचालक स्वयंसेवकों को सचेत कर रहे हों. प्रपंच खड़ा करने वाले मीडिया गिरोह के प्रमुख NDTV, सहित अन्य ने भी मोहन भागवत के कथन के एक हिस्से को ही बताया………

    एनडीटीवी ने अंग्रेजी समाचार में हेडलाइन दिया….. Avoid “Nationalism” Word, It Implies Nazism, Says RSS Chief, जबकि हिन्दी शीर्षक दिया…..RSS चीफ मोहन भागवत बोले- ‘राष्ट्रवाद’ का मतलब हिटलर और नाजीवाद होता है, इसका इस्तेमाल न करो

    हिन्दुस्तान टाइम्स ने शीर्षक दिया Avoid using word ‘nationalism’, as it may mean Hitler, Nazism, says RSS chief Mohan Bhagwat

    आजतक ने शीर्षक दिया…… मोहन भागवत बोले – ‘राष्ट्रवाद’ शब्द में हिटलर की झलक, हिंदुत्व एजेंडे पर काम करेगा RSS

    इस दौड़ में अन्य भी भागने लगे. जबकि संघ प्रमुख ने कहीं हिटलर का नाम लिया ही नहीं था. उन्होंने तो केवल अपने प्रवास के दौरान कार्यकर्ताओं से हुई चर्चा के बारे में बताया था. आज प्रातः रांची महानगर में स्वयंसेवकों के एकत्रीकरण को मोहन भागवत ने संबोधित किया. उन्होंने बताया कि कैसे बातचीत के दौरान भाषा में शब्दों के अर्थ भिन्न हो जाते हैं. उन्होंने जो कहा, वो शब्दशः ……..

    भारत का भी यह स्वभाव रहा है कि भारत अपने लिए बड़ा नहीं बनता है. दुनिया में कई देश बड़े बने और पतित हो गए. आज भी बड़े देश हैं, जिनको आज महाशक्ति कहते हैं. लेकिन हम देखते हैं तो ये देश महाशक्ति बनकर करते क्या हैं? तो सारी दुनिया पर प्रभुत्व संपादन करते हैं, सारी दुनिया पर अपना शासन करते हैं, सारी दुनिया के साधनों का अपने लिए उपयोग करते हैं, सारी दुनिया पर राजनीतिक सत्ता अपनी चले, प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से ऐसा प्रयास करते हैं, सारी दुनिया पर अपना ही रंग चढ़ाने का प्रयास करते हैं, ये सब चलता आया है और चल रहा है. और इसलिए दुनिया में एक बहुत बड़े भूभाग में विद्वान ऐसा सोचते हैं कि राष्ट्र का बड़ा होना दुनिया के लिए खतरनाक बात है. नेशनलिज्म, इस शब्द का आज दुनिया में अच्छा अर्थ नहीं है. कुछ वर्ष पूर्व संघ की योजना से यूके जाना हुआ तो वहां बुद्धिजीवियों से बात होनी थी. 40-50 चयनित लोगों से संघ के बारे में चर्चा होनी थी. तो वहां के अपने कार्यकर्ता ने कहा कि शब्दों के अर्थों के बारे में सावधान रहिए, अंग्रेजी आप की भाषा नहीं है और आपने अंग्रेजी में पुस्तक पढ़ी है उसके हिसाब से बोलेंगे. परन्तु यहां बातचीत में शब्दों के अर्थ भिन्न हो जाते हैं. इसलिए आप नेशनलिज्म शब्द का उपयोग मत कीजिए. आप नेशन कहेंगे चलेगा, नेशनल कहेंगे चलेगा, नेशनलिटी कहेंगे चलेगा, पर नेशनलिजम मत कहो. क्योंकि नेशनल्जिम का मतलब होता है हिटलर, नाजीवाद, फासीवाद. अब ऐसे ही यह शब्द वहां बदनाम हुआ है. लेकिन हम जानते हैं कि एक राष्ट्र के नाते भारत जब-जब बड़ा हुआ, तब-तब दुनिया का भला ही हुआ है. अभी गीत आपने सुना –

    विश्व का हर देश जब, दिग्भ्रमित हो लड़खड़ाया

    सत्य की पहचान करने, इस धरा के पास आया

    भूमि यह हर दलित को पुचकारती,

    हर पतित को उद्धारती, धन्य देश महान.

    ऐसा हमारा धन्य महान देश भारत है. यह इसका स्वभाव है. और आज की दुनिया को भारत की आवश्यकता है.

     

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