भारतीय जीवन दर्शन में विश्व के सभी प्रश्नों का समाधान – स्वामी आत्माराम जी Reviewed by Momizat on . भारतीय संस्कृति सर्व समावेशी है – प्रेमशंकर जी धमतरी, छत्तीसगढ़. धमतरी के निकट ग्राम सांकरा में स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, छत्तीसगढ़ भारतीय संस्कृति सर्व समावेशी है – प्रेमशंकर जी धमतरी, छत्तीसगढ़. धमतरी के निकट ग्राम सांकरा में स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, छत्तीसगढ़ Rating: 0
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    भारतीय जीवन दर्शन में विश्व के सभी प्रश्नों का समाधान – स्वामी आत्माराम जी

    भारतीय संस्कृति सर्व समावेशी है – प्रेमशंकर जी

    धमतरी, छत्तीसगढ़. धमतरी के निकट ग्राम सांकरा में स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, छत्तीसगढ़ प्रान्त के 20 दिवसीय, संघ शिक्षा वर्ग, प्रथम वर्ष (सामान्य) का समारोप कार्यक्रम आयोजित किया गया.

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी आत्माराम जी कुम्भज (संरक्षक, श्री तुलसी मानस प्रतिष्ठान, छत्तीसगढ़ ) थे. उन्होंने कहा कि आज भारत ही सम्पूर्ण दुनिया का मार्गदर्शन कर सकता है, विश्व के सभी प्रश्नों का समाधान भारतीय जीवन दर्शन में है. भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लगातार प्रयत्नशील है. शिक्षार्थियों से कहा कि आपने 20 दिन का संघ का प्रशिक्षण लिया है. निश्चित रूप से आप देश सेवा में आगे बढ़ेंगे, यही शुभकामनाएं…

    मुख्य वक्ता छत्तीसगढ़ प्रान्त प्रचारक प्रेमशंकर जी ने कहा कि भारत का इतिहास गौरवशाली रहा है. भारतीय संस्कृति- हिन्दू संस्कृति सर्व समावेशी है. किसी भी मत, पूजा पद्धति को मानने वालों का हमारे यहाँ सम्मान है. केवल हमारे मार्ग पर चलेंगे, उन्हें ही मोक्ष प्राप्त होगा ऐसा दुनिया के कुछ पंथ मानते हैं, पर हम तो “वसुधैव कुटुम्बकम्” को मानते हैं. उन्होंने कहा कि सारी दुनिया हमारी ओर आशा की दृष्टि से देख रही है. हमारे देश में सभी मार्ग, मत, पंथ मोक्ष प्राप्ति के लिए हैं. आज दुनिया आतंकवाद-नक्सलवाद से परेशान है, उसके मूल में विचार की कुंठा है, वह जो मेरे साथ नहीं चलेगा उसे समाप्त करने की सोचता है.

    भारतीय दर्शन कहता है – एकम सत् विप्रा बहुधा वदन्ति…. अपने गुरु घासीदास जी ने भी यही कहा है : मनखे-मनखे एक समान. लंबे कालखंड की गुलामी के बाद भी भारत की सभ्यता-संस्कृति अक्षुण्ण रही है. उसके पीछे हमारी कुटुंब व्यवस्था है. परिवार से प्राप्त संस्कार जीवनभर रहता है. श्रेष्ठ संस्कृति श्रेष्ठ परिवार से बनती है.

    प्रेमशंकर जी ने कहा कि आज भारत – हिन्दू दर्शन को तोड़ने का षड्यंत्र चल रहा है. उसे समझने की आवश्यकता है. संघ 93 वर्षों से समाज को संगठित तथा भारत को विश्वगुरु बनाने का कार्य कर रहा है. संघ विराट राष्ट्र यज्ञ है, इस राष्ट्रीय कार्य में सभी की आहुति आवश्यक है.

    20 दिवसीय पूर्ण आवासीय प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ प्रान्त के विविध स्थानों से 263 शिक्षार्थियों ने भाग लिया. समारोह में प्रान्त संघचालक बिसराराम जी यादव, प्रान्त कार्यवाह चंद्रशेखर जी वर्मा, सहित गणमान्य नागरिक बन्धु-भगिनी उपस्थित थे.

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