भारतीय संस्कृति, समाज व अर्थव्यवस्था की पहचान मुझे दत्तोपंत जी के माध्यम से हुई – एस. गुरुमूर्ति Reviewed by Momizat on . मुंबई (विसंकें). रिजर्व बैंक के निदेशक एवं अर्थशास्त्री एस, गुरुमूर्ति जी ने कहा कि ‘भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी जी समय से आगे की सोच रखने वाल मुंबई (विसंकें). रिजर्व बैंक के निदेशक एवं अर्थशास्त्री एस, गुरुमूर्ति जी ने कहा कि ‘भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी जी समय से आगे की सोच रखने वाल Rating: 0
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    भारतीय संस्कृति, समाज व अर्थव्यवस्था की पहचान मुझे दत्तोपंत जी के माध्यम से हुई – एस. गुरुमूर्ति

    मुंबई (विसंकें). रिजर्व बैंक के निदेशक एवं अर्थशास्त्री एस, गुरुमूर्ति जी ने कहा कि ‘भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी जी समय से आगे की सोच रखने वाले दृष्टा थे.’ ‘वामपंथी आर्थिक सोच से पुरस्कृत हुआ पूंजीवाद अधिक समय तक नहीं रह सकता. यह, दत्तोपंत जी ने 1992 से पूर्व ही कहा था. दोनों के पास संपत्ति का केंद्रीकरण होना, यह इसका मुख्य कारण है. 1990 से पूर्व ही उन्होंने कहा था कि विश्व के प्रत्येक देश और समाज के लिए कोई भी एक आदर्श आर्थिक प्रारूप हो ही नहीं सकता. इसलिए प्रत्येक समाज व देश को अपने स्वयं का आर्थिक प्रारूप बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि दत्तोपंत जी का अक्तूबर 2004 में निधन हुआ और 2005 में जी-२० समूह ने दत्तोपंत जी के विचार को विचार तत्त्व के रूप में अपनाया. 2008 में विश्व बैंक ने भी यह तत्त्व अपनाया.

    गुरुमूर्ति जी दत्तोपंत ठेंगडी जन्मशताब्दी समारोह उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे. सोमवार को दादर के योगी सभागृह में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाईक, कोंकण प्रांत संघचालक डॉ. सतीश मोढ जी, भारतीय मजदूर संघ से उदयराव पटवर्धन और संयोजक अनिल ढुमणे, स्वदेशी जागरण मंच के पीयूष सुरैय्या मंच पर उपस्थित थे.

    गुरुमूर्ति जी ने कहा कि ‘भारतीय संस्कृति, समाज और भारतीय अर्थव्यवस्था की असली पहचान मुझे दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के माध्यम से हुई.’ इससे पूर्व देश की सभी नामी कंपनियों के साथ मैंने आर्थिक सलाहकार के रूप में काम किया था. परंतु, मेरा और देश की बड़ी कंपनियों के मालिकों, वरिष्ठ नौकरशाहों का आर्थिक आंकलन पाश्चात्य विचारधारा पर आधारित था. वैश्वीकरण हुआ, तो मैंने दत्तोपंत जी से पूछा, इस पर क्या कर सकते हैं? तब दत्तोपंत जी ने कहा कि ‘स्वदेशी जागरण मंच की स्थापना कर के उस में काम करो. देशभर में भ्रमण करने के बाद भारतीय समाज से ही इसका उत्तर मिलेगा.’ दत्तोपंत जी के कहे अनुसार, मैंने देशभर का भ्रमण किया. देश के कोने-कोने में स्थानीय लोगों से बातचीत की. परस्पर सहयोग तथा स्वयं की बुद्धि व परिश्रम से स्थापित अनेक औद्योगिक इकाईयां मुझे देखने को मिलीं.’ यह सब देखने के बाद मेरा अर्थशास्त्र का आंकलन बदलने लगा.

    भारतीय मजदूर संघ से उदयराव पटवर्धन जी ने भारतीय मजदूर संघ में विपरीत परिस्थितियों में किये का स्मरण किया. उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाईक जी ने दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के संस्मरण सुनाए.

    कोंकण प्रांत संघचालक सतीश मोढ ने बताया कि ‘भारतीय मजदूर संघ की स्थापना के समय संगठन का नाम क्या होना चाहिए, इस बात पर चर्चा हुई. ‘भारतीय श्रमजीवी संगठन’, ऐसा नाम दत्तोपंत जी ने सुझाया था. परंतु उपस्थित कार्यकर्ताओं के सुझाव पर ‘भारतीय मजदूर संघ’ नाम स्वीकृत किया.

    अनिल ढुमणे ने प्रस्तावना प्रस्तुत की. पीयूष सूरैय्या ने आभार व्यक्त किया. प्रशांत देशपांडे ने कार्यक्रम का संचालन किया.

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