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भारतीय संस्कृति ही एक ऐसी संस्कृति है, जो मानव को जीने की राह बताती है – साध्वी दिवेशा भारती

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ramkatha -2हिसार, हरियाणा (विसंकें). विश्व हिन्दू परिषद के सेवा प्रकल्प भारत माता मंदिर हिसार के भूखंड प्रदाता स्व. चौ. फतेहचंद की पुण्य स्मृति, भारत माता मंदिर के स्थापना दिवस, विहिप के स्वर्णजयंती वर्ष पर भारत माता मंदिर में श्रीरामकथामृत का आयोजन बाबा साहेब आंबेडकर की जन्म जयंती १४ अप्रैल से लेकर गुरू अर्जुन देव के जन्मोत्सव १८ अप्रैल तक किया गया. श्रीराम कथामृत समारोह में श्री रामचरित मानस पर आधारित ओज पूर्ण विचार भजनों एंवं चौपाइंयों के माध्यम से भक्ति रस में भिगो देने हेतु व्यासपीठ पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की साध्वी दिवेशा भारती व अन्य उपस्थित रहीं.

malti sharma &vhp memberपाचं दिवसीय कथामृत में श्रीराम कथा के साथ साथ विभिन्न विषयों पर प्रवचन व विचार भी रखे गए. कथा के तीसरे दिन परिवार प्रबोधन विषय पर आयोजित सत्र में विहिप की क्षेत्रीय संयोजिका मालती शर्मा, प्रांतीय संयोजिका सुनीता शर्मा सहित अन्य ने दीप प्रज्ज्वलित कर कथा का शुभारम्भ किया.

श्रीराम कथामृत के तीसरे दिन व्यासपीठ पर विराजमान दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की साध्वी दिवेशा भारती ने श्री रामचरित मानस पर प्रवचन करते कहा कि वर्तमान में नारी को उसकी खोई हुई गरिमा व श्रद्धा लौटाने की जरूरत है. वैदिक काल में नारी को बहुत ऊंचा दर्जा दिया गया था और माना गया था कि जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते है, लेकिन वर्तमान में वह दर्जा समाप्त हो गया है. आज नारी को विभिन्न प्रकार के अपशब्दों से पुकारा जाता है. पूजनीय नारी अपमान का प्रतीक बन गई. कमाई का साधन बनाया जा रहा है. भोग विलास का विषय बनती जा रही है. नारी के भावों को समझना होगा. आज की नारी में क्षमता है, वह प्रत्येक क्षेत्र में उन्नति के शिखर पर पंहुच रही है.

prant sagh chalak kartar sngh jiभारत की भूमि पर जो लोग पाश्चात्य संस्कृति को बढावा दे रहें है, वह लोग भारत के शहीदों का अपमान कर रहे है. भारतीय पोशाक, भारतीय भाषा, भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे श्रेष्ठ संस्कृति है. रामकथा का अन्तिम सत्र देव आराधना व राष्ट्र आराधना का प्रतीक बन गया. साध्वी दिवेशा भारती ने राजगुरू, चन्द्रशेखर, भगत सिंह और रानी झांसी के जीवन पर आधारित प्रसंग सुनाए. साध्वी दिवेशा भारती ने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति में कोई पवित्रता नहीं, वह लोगो को पथभ्रष्ट करती है. विश्व में भारतीय संस्कृति ही एक ऐसी संस्कृति है जो मानव को जीने की राह बताती है.

मानव मानव नहीं दानव हो रहा है. आज अपने ही घर में अपनी ही बेटी सुरक्षित नही है. बूढे मां बाप को घर में जगह नही, उनके लिए वृद्धाश्रम खोले जा रहे है. मां बाप बोझ बन रहे हैं. नारी आज कानून का गलत इस्तेमाल कर सास और ससुर का शोषण कर रही है. परिवार टूट रहे हैं, रिश्ते समाप्त हो रहे हैं. भारत जैसे देश में निारन्तर खुल रहे वृद्ध आश्रम चिंता का विषय है.

विहिप की मालती शर्मा ने कहा कि परिवारों में संस्कार की अति आवश्यकता है. परिवारों को एकजुट रखने के लिए परिवारों में संस्कार होना बहुत जरूरी है. उन्होने देश भर में विहिप द्वारा किए जा रहे कार्यो के सन्दर्भ में जानकारी दी.

भारत माता ट्रस्ट के अध्यक्ष प्यारे लाल लाहौरिया ने कथा में उपस्थित अतिथियों, यजमानों व साध्वियों को स्मृति चिंह प्रदान कर सम्मानित किया.

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