भारत का प्रयोजन दुनिया को सन्मार्ग पर लाना है – डॉ. मोहन भागवत जी Reviewed by Momizat on . त्रिपुरा (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत का प्रयोजन दुनिया को सन्मार्ग के रास्ते पर बढ़ाना है. अगर भारत ने अपना त्रिपुरा (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत का प्रयोजन दुनिया को सन्मार्ग के रास्ते पर बढ़ाना है. अगर भारत ने अपना Rating: 0
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    भारत का प्रयोजन दुनिया को सन्मार्ग पर लाना है – डॉ. मोहन भागवत जी

    त्रिपुरा (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत का प्रयोजन दुनिया को सन्मार्ग के रास्ते पर बढ़ाना है. अगर भारत ने अपना काम सही से नहीं किया तो सारी दुनिया हिन्दू समाज से ही पूछेगी. जहां पर हिन्दुत्व की भावना कम हुई है या हिन्दू संख्या बल कम हुआ है, वह हिस्सा भारत से अलग हो गया है. सरसंघचालक जी रविवार 17 दिसंबर को अगरतला में विशाल हिन्दू सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.

    सरसंघचालक जी ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने सबसे प्राचीन देश होने के नाते दुनिया को जीवन जीना सिखाया और इसे अपना कर्तव्य माना. दुनिया को हमारा इतिहास मालूम है, इसलिए दुनिया भारत से अपेक्षा कर रही है कि यहां का समाज वैभव संपन्न सुरक्षित जीवन जीने का कोई नया तरीका सामने रखेगा. ‘भारत का प्रयोजन दुनिया को सन्मार्ग पर लाना है. लेकिन भारत ने अपना काम नहीं किया तो कौन जिम्मेदार होगा ? भारत के भाग्य का विधाता कौन हैं ? सारी दुनिया हिन्दू समाज से पूछेगी. दुनिया कहेगी कि तुम हिन्दू हो, तुम भारतवर्ष में परंपरा से रहते आए हो, दुनिया में तुम्हारा अपना दूसरा देश नहीं है.’

    डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि सताए गए हिन्दू सारी दुनिया से भारत में आते हैं और भारत की सरकार भी कहती है कि ऐसे सताए हुए आने वालों को हम आश्रय देंगे, बाहर नहीं निकालेंगे, क्योंकि यह हिन्दुओं का देश है. जब तक हिन्दुस्तान में हिन्दू समाज की संख्या प्रबल रही, भारत एक रहा. पहले काबुल से परे अफगानिस्तान से वर्मा तक सारा क्षेत्र हिन्दुस्तान था. आज इतना छोटा इसलिए हो गया, क्योंकि जहां पर हिन्दुत्व की भावना क्षीण हो गई या हिन्दू समाज का संख्या बल कम हो गया वो भारत से अलग हो गया. भारत का मकसद दुनिया को सही रास्ते पर आगे बढ़ाना है.

    उन्होंने कहा कि ‘मुझे 2006-07 में राज्यसभा के एक सदस्य मिले. वह धर्म से मुसलमान थे. उस वक्त वह कांग्रेस में थे, उससे पहले समाजवादी पार्टी में थे. बाद में मोदी साहब के लिए कुछ अच्छा बोला तो उन्हें निकाला गया, आज वह राजनीति में नहीं हैं, अखबार चला रहे हैं.’ एक बार संघ के साथ संवाद के कार्यक्रम में वह भी आए. वह पूछना चाहते थे कि संघ सच्चर कमेटी का विरोध क्यों करता है. लेकिन उन्होंने उसे इस तरह से पूछा – ‘भागवत जी भारत के मुसलमान तो हिन्दू ही हैं. किन्हीं वजहों से या मजबूरी में उनकी पूजा पद्धति बदल गई. लेकिन पुरानी आदत मूर्ति पूजा की नहीं छूटी, इसलिए कब्र-मजार में जाकर पूजा करते हैं. देवपूजा में संगीत गाने की पुरानी आदत है, इसलिए कव्वाली गाते हैं.’ फिर उन्होंने (राज्यसभा सदस्य) आवाज कम करते हुए कहा, ‘मैं आज के भारत की बात नहीं कर रहा, मैं अखंड भारत की बात कर रहा हूं. अगर उन्हें (मुसलमानों को) यह पता चल जाए तो सारे झगड़े खत्म हो जाएंगे. उन्हें यह पता शिक्षा से चल सकता है और सच्चर कमेटी शिक्षा देने की तो बात करती है.’

    सरसंघचालक जी ने कहा कि मैंने उन्हें जवाब दिया – ‘हम हिन्दू होने के नाते सबके कल्याण की कामना करते हैं. लेकिन जो आप कह रहे हैं, यह तो हमें पहले से मालूम है. सन् 1925 से हम यह कहते आ रहे हैं. जिनके लिए आप बोल रहे हैं, उन्हें (मुसलमानों) ये समझाइए. वे जब मान जाएंगे तो हम अपना विरोध वापस ले लेंगे.

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