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भारत ने रचा इतिहास, पहले प्रयास में मंगल पर पहुंचा

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mars mission sucessनई दिल्ली. भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में बुधवार, 24 अक्टूबर को इतिहास रच दिया. भारत दुनिया का पहला देश बन गया, जिसने अपने  पहले ही प्रयास में मंगल पर पहुंचने में सफलता पाई है. अंतरिक्षयान मंगल की सतह से 515 किलोमीटर दूर और रेडियो दूरी में धरती से 215 किलोमीटर दूर मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर चुका है. सुबह 7 बजकर 17 मिनट पर जैसे ही मंगलयान का लिक्विड इंजन शुरू हुआ वैज्ञानिकों का दिल जोरों से धड़कने लगा.  इसरो सेंटर में उपस्थित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी स्क्रीन पर टकटकी लगाकर देख रहे थे कि पता नहीं क्या होगा.

Mars Mission Indiaप्रधानमंत्री ने दी बधाई

दुनिया के शक्तिशाली देश अपनी पहली कोशिश में नाकामयाब रहे, क्या भारत कामयाब हो पायेगा हर चेहरे पर यही सवाल और शंका थी, लेकिन जैसे ही प्रात: लगभग 8 बजे भारत का मंगलयान मंगल की कक्षा में पहुंचा, लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. प्रधानमंत्री मोदी समेत तमाम वैज्ञानिकों ने जमकर तालियां बजाईं और एक दूसरे को सफलता की बधाई दी

 

India Mars Mission Congrat‘मंगल को मॉम मिल गई’

सफलता के ऐलान के साथ ही इसरो सेंटर में मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों को उनकी सफलता पर और सभी भारतवासियों को बधाई दी और कहा कि आज मंगल को मॉम (Mars Orbiter Mission)  मिल गई. क्योंकि मॉम कभी निराश नहीं करती. भारत अमेरिका, रूस और यूरोप के बाद भारत चौथा देश है, जिसने यह सफलता हासिल की है. मिशन मार्स की सफलता को लेकर पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ गई है.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘पहले ही प्रयास में हमारे वैज्ञानिकों ने सफलता प्राप्त की. आज इतिहास रचा गया. साधन बहुत कम और अनेक मुश्किलें, इसके बावजूद इतनी बड़ी सफलता. इस सफलता के असली हकदार देश के वैज्ञानिक हैं. मंगल हमसे करीब 650 मिलियन किलोमीटर दूर है, इतना लंबा सफर. जिस धैर्य के साथ ऐसा हो पाया, वह सराहनीय है. इस सफलता के साथ ISRO दुनिया की दो और एजेंसियों की बराबरी पर आ गई. हमने अपने पहली कोशिश में यह सफलता हासिल की. परिस्थितियां हमारे विरुद्ध थीं, अब तक दुनियाभर से कुल 51 मिशन में सिर्फ 21 सफल हो सके थे. लेकिन हमने कर दिखाया. हमारे वैज्ञानिकों ने असंभव को संभव बना दिया.’

नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘जब काम मंगल होता है, इरादे मंगल होते हैं, तो मंगल की यात्रा भी मंगल होती है. हमने सिर्फ 3 साल में यह यान बनाया. लागत करीबन 500 करोड़ रुपये. इतनी कीमत में तो कई हॉलीवुड फिल्में बनती हैं.’

मंगलयान की कामयाबी के बाद सोशल मीडिया पर भी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) के वैज्ञानिकों की ख़ूब प्रशंसा हो रही है. लोग मजेदार ट्वीट कर रहे हैं. अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा ने ट्विटर के ज़रिये भारतीय वैज्ञानिकों को बधाई दी है. नासा (@NASA) ने ट्वीट किया है, “मंगल पर पहुंचने के लिये इसरो को बधाई. मंगलयान लाल ग्रह के बारे में जानकारी हासिल करने वाले अभियान से जुड़ गया है.”

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