महिलाओं के उत्थान का पथ निश्चित करने वाले पुरुष नहीं हो सकते, महिलाएं स्वयं समर्थ – डॉ. मोहन भागवत Reviewed by Momizat on . नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि महिलाओं पर ‘दृष्टी’ का सर्वे अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि सर्वेक्षण के समस्त विषय नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि महिलाओं पर ‘दृष्टी’ का सर्वे अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि सर्वेक्षण के समस्त विषय Rating: 0
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    महिलाओं के उत्थान का पथ निश्चित करने वाले पुरुष नहीं हो सकते, महिलाएं स्वयं समर्थ – डॉ. मोहन भागवत

    नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि महिलाओं पर ‘दृष्टी’ का सर्वे अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि सर्वेक्षण के समस्त विषयों को इससे जुड़ी बहनों द्वारा स्वयं तैयार किया गया है. मातृशक्ति का प्रबोधन, मातृशक्ति का संरक्षण और ऐसे कार्य में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन एवं स्वतंत्रता का कार्य हम अपने घर से प्रारंभ करें और ऐसा जब घर-घर में होने लगेगा तो ही सही मायने में यह सर्वे सफल होगा और इससे जुड़ी बहनों ने जो परिश्रम किया है, उनका वास्तविक अभिनंदन होगा.

    सरसंघचालक जी दृष्टी स्त्री प्रबोधन एवं अध्ययन केंद्र द्वारा भारत में महिलाओं की स्थिति (Status of Women In Bharat) को लेकर किये गए सर्वे की रिपोर्ट के लोकार्पण कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि महिलाओं के विकास का, उत्थान का पथ निश्चित करने वाले पुरुष नहीं हो सकते, लेकिन इसका उल्टा संभव हो सकता है. पुरुष, महिलाओं का उत्थान कर सकते हैं या कर रहे हैं, ऐसा अहंकार मन में नहीं लाना चाहिए.

    सरसंघचालक जी ने कहा कि महिलाओं के उत्थान के लिए पुरुष वर्ग के प्रबोधन की आवश्यकता है. हम  परिवार में उनकी सुनते तो हैं, लेकिन मन पर नहीं लेते. इसका कारण है कि हम महिलाओं की शक्ति को भूल गए, वो क्या-क्या कर सकती हैं. महिलाएं भी अपनी स्थित को समझें, और उससे बाहर आएं. जो वे करना चाहती हैं, उसके लिए उन्हें स्वतंत्र करना चाहिए, उन्हें अवसर देना चाहिए और इसके लिए उनका प्रशिक्षण, प्रबोधन करना चाहिए.

    मोहन भागवत जी ने कहा कि महिलाएं जगत जननी का अंश हैं, सृष्टि निर्माण की ताकत उनमें है, सृष्टि पालन की ताकत उनमें है. इतनी शक्ति उनमें अंतर्निहित है, और इस शक्ति का प्रमुख कारण है उनके पास वात्सल्य है. उन्होंने कहा कि समाज को जोड़ने वाला, उन्नत करने वाला धर्म होता है. धर्म के कार्य का अधिकार सन्यासी को नहीं है, ब्रह्मचारी को नहीं है. समाज को जोड़ने वाला, ऊपर उठाने वाला कोई भी कार्य होता है तो उसमें गृहस्थ ही चाहिये, क्योंकि उसमें दोनों (महिला व पुरुष) चाहिए.

    उन्होंने कहा कि महिलाओं के विकास का रास्ता पुरुष नहीं तय कर सकते. अतः इस सर्वे को आगे जगह-जगह ले जाने का कार्य भी मातृशक्ति को ही करना है, देश की महिलाएं मल्टीटास्किंग की एक्सपर्ट हैं, यह उन्होंने करके दिखाया है. और पुरुष वर्ग से आह्वान कि बारिकी से सर्वे का अध्ययन करें तथा प्रोत्साहन व स्वतंत्रता का कार्य अपने घर से प्रांरभ करें.

    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा कि कानून का समर्थन भी चाहिए, लेकिन महिलाओं को भी खंप्रट जोन से बाहर आना चाहिए. असुरक्षा का भाव छोड़ना चाहिए. भारत में अनुसंधान के क्षेत्र में महिलाएं कार्यरत हैं. आरक्षण दो यह मांग गलत नहीं है, लेकिन हमें भी चैलेंज लेना होगा. महिलाएं अपने बारे में जब तक स्वयं आगे आकर खुलकर बोलेंगी नहीं, तब तक कौन सुनेगा.

    देश के सभी 29 राज्यों तथा 7 केंद्र शासित प्रदेशों में से 5 प्रदेशों के 465 जिलों में महिलाओं को लेकर अब तक सबसे बड़ा अध्ययन किया गया. 18 वर्ष से अधिक आयु की 43,255 महिलाओं से बातचीत की गई. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित 106 जिलों में से 70 जिलों की महिलाओं की राय भी अध्ययन में शामिल है. इसी क्रम में इन्हीं विषयों को लेकर 25 राज्यों व 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 283 जिलों में 18 वर्ष से कम आयु की 7675 बालिकाओं से बातचीत की गई.

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