मूल्यों का ध्यान रख, उन पर कायम रहते हुए परिवर्तन करना है – डॉ. मोहन भागवत Reviewed by Momizat on . श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जन्मशताब्दी समारोह का शुभारंभ नागपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि दत्तोपंत ठेगड़ी जी संघ श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जन्मशताब्दी समारोह का शुभारंभ नागपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि दत्तोपंत ठेगड़ी जी संघ Rating: 0
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    मूल्यों का ध्यान रख, उन पर कायम रहते हुए परिवर्तन करना है – डॉ. मोहन भागवत

    श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जन्मशताब्दी समारोह का शुभारंभ

    नागपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि दत्तोपंत ठेगड़ी जी संघ परिवार के उन शख्सियतों में आते हैं, जिनमें तत्व चिंतक, उत्कृष्ट व्यक्तित्व और बेहतर संगठक के गुण थे. समाज के हर क्षेत्र में उनका समान नेतृत्व था. उनके सम्पर्क में जो भी रहा, उसे कुछ न कुछ सीखने को ही मिला है. उन्हें स्नेह, करुणा और नेतृत्व के गुण अपने परिवार से ही मिले. इन सब प्रतिभाओं के बावजूद, आयु व दायित्व में बड़ा होने पर भी वह अपनों के लिये आलौकिक न होकर लौकिक व समान रहकर लोगों के बीच उन जैसा ही बनकर पहुँचे. ऐसे व्यक्तित्व का जन्म शताब्दी वर्ष मनाने का आशय सिर्फ उनके प्रति कृतज्ञता जताना नहीं है. बल्कि इस आयोजन के माध्यम से उनके विचारों को लोगों के बीच लेकर जाना है. मूल्यों का ध्यान रख, उन पर कायम रहते हुए परिवर्तन करना है.

    सरसंघचालक महर्षि व्यास सभागृह, रेशिमबाग नागपुर में श्रद्धेय दत्तोपंत ठेगड़ी जन्मशताब्दी समारोह के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि एक महान व्यक्ति के विचारों को समाज तक लेकर जाना इतना आसान नहीं है. समाज इसे पूर्ण विश्वास के साथ ग्रहण करे, इसके लिए जरूरी है कि पहले हम ही उन विचारों को आत्मसात करें. उनकी बताई दिशा में चलकर ही उनके विचारों की सत्यता साबित कर सकते हैं.

    हिन्दुत्व के विचारों का श्रेष्ठ रसायन है समरसता

    श्रद्धेय दत्तोपंत ठेगड़ी जन्म शताब्दी समारोह आयोजन समिति की अध्यक्ष पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन जी ने कहा कि ठेंगड़ी जी अपने आप में एक संगठन थे. एक बड़ी शख्सियत होने के बावजूद वह आखिरी वक्त तक खुद को सिर्फ एक स्वयंसेवक ही मानते थे. वह हमेशा कार्यकर्ताओं को संदेश देते थे कि संगठन का काम करना है तो खुद को नियमों में बांधो, क्योंकि यह ईश्वरीय कार्य है. उन्हें समरसता का समर्थक बताते हुए कहा कि ठेंगड़ी जी के विचार में हिन्दुत्व के विचारों का श्रेष्ठ रसायन समरसता है. उनकी सोच दूरगामी थी, वे वास्तव में राष्ट्र ऋषि थे.

    ठेंगड़ी जी बहुआयामी व्यक्त्वि के धनी थे

    आयोजन समिति के सचिव ब्रिजेश उपाध्याय जी ने समिति द्वारा जन्म शताब्दी समारोह आयोजन के निमित्त बनी कार्ययोजना की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि ठेंगड़ी जी बहुआयामी व्यक्त्वि के धनी थे. उन्हें एक संगठन में नहीं बांधा जा सकता है. इस दृष्टि से हम सभी संगठनों ने समग्र रूप से उनके बहुआयामी पक्ष को ध्यान में रखकर देशभर में समग्र आयोजन करने का निर्णय लिया है. दत्तोपंत ठेंगड़ी जी का संदेश है कि केवल विचार नहीं, विचार को क्रिया में बदलो. इस हेतु हम सभी को निरंतर कार्य करना होगा.

    मंचीय कार्यक्रम से पूर्व श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जन्मशताब्दी समारोह आयोजन समिति की बैठक पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन जी की अध्यक्षता में संपन्न हुई. बैठक में देशभर से विभिन्न आयामों में कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकताओं ने सुझाव देकर वर्षभर चलने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई. द्वितीय सत्र में सरसंघचालक भागवत जी के आतिथ्य में दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के व्यक्त्वि पर बने वृत्तचित्र, वेबसाइट व प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम का संचालन भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी जी ने किया. आभार प्रदर्शन स्वदेशी जागरण मंच के अजय जी द्वारा किया गया.

     

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