मेरा भारत – शादी के लिए जमा की राशि से प्रवासी श्रमिकों को खाना खिलाने लगा ऑटो चालक Reviewed by Momizat on . पुणे (विसंकें). कोरोना संकट के दौरान जरूरतमंदों की सहायता के अनेक मानवीय उदाहरण सामने आ रहे हैं. जो समाज की संवेदनशीलता और सेवा भाव को दर्शातें हैं. वहीं, अब पु पुणे (विसंकें). कोरोना संकट के दौरान जरूरतमंदों की सहायता के अनेक मानवीय उदाहरण सामने आ रहे हैं. जो समाज की संवेदनशीलता और सेवा भाव को दर्शातें हैं. वहीं, अब पु Rating: 0
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    मेरा भारत – शादी के लिए जमा की राशि से प्रवासी श्रमिकों को खाना खिलाने लगा ऑटो चालक

    पुणे (विसंकें). कोरोना संकट के दौरान जरूरतमंदों की सहायता के अनेक मानवीय उदाहरण सामने आ रहे हैं. जो समाज की संवेदनशीलता और सेवा भाव को दर्शातें हैं. वहीं, अब पुणे के तीस वर्षीय युवक अक्षय कोठावाले (ऑटो चालक) ने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है. जो अन्य लोगों के लिए भी नजीर है. ऑटो चालक अक्षय ने परिश्रम कर अपनी शादी के लिए 2 लाख रुपए की राशि जमा की थी, शादी 25 मई को होना तय थी. लेकिन कोरोना संकट के कारण देश में लॉकडाउन घोषित हो गया. लॉकडाउन के कारण प्रवासी श्रमिक स्थान-स्थान पर फंसे हुए थे, श्रमिकों की समस्याओं को देख अक्षय से रहा नहीं गया और अपनी जमा राशि के साथ मित्रों का सहयोग लेकर श्रमिकों के लिए किचन शुरू किया. किचन के माध्यम से प्रतिदिन 400 लोगों को भोजन करवाने लगे. इतना ही नहीं अक्षय बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं को क्लीनिक व अस्पताल तक निःशुल्क पहुंचाते हैं. साथ ही शहर में लोगों को कोरोना वायरस से बचने के लिए जागरूक भी करते हैं.

    विनम्र स्वभाव के अक्षय ने बताया कि उन्हें खुशी होती है कि वह संकट की इस घड़ी में दूसरों की मदद कर पा रहे हैं. ”ऑटो रिक्शा चलाते हुए मैंने 2 लाख रुपए जमा किए थे. मेरी शादी 25 मई को होनी थी. लेकिन लॉकडाउन कि वजह से मैंने और मेरी मंगतेर ने यह तय किया कि अभी शादी को टाल दिया जाए.”

    पुणे के टिंबर मार्केट क्षेत्र में रहने वाले अक्षय लॉकडाउन में गरीबों और प्रवासी श्रमिकों की तकलीफों को देखकर काफी दुखी थे और इसलिए उन्होंने उनकी मदद की ठानी. अक्षय ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक किचन तैयार किया. यहां वे लोग मिलकर चपाती और सब्जी बनाते हैं और प्रवासी श्रमिकों  तथा जरूरतमंद लोगों में बांट देते हैं. अक्षय ने कहा, ”मैंने सड़कों पर कई ऐसे लोगों को देखा जो एक समय का खाना भी नहीं खा सकते हैं और जिंदा रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. मैंने और मेरे दोस्तों ने जरूरतमंद लोगों की मदद करने की ठानी. मैंने शादी के लिए बचाए रकम को लोगों को खाना खिलाने में खर्च करने का फैसला किया. दोस्तों ने भी मदद की.”

    अक्षय ऑटो से प्रवासी श्रमिकों और गरीब लोगों को रोटी बांटते हैं. वह रेलवे स्टेशन के नजदीक मालधाक्का चौक, संगमवडी और यरवदा में लोगों को एक समय का खाना खिलाते हैं. अक्षय ने कहा कि उनके पास अब कैश की कमी होने लगी है, इसलिए रोटी सब्जी की बजाय पुलाव, मसाला राइस और सांभर राइस बांटने का विचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों की मदद करते रहेंगे. यह समूह कम से कम 31 मई तक लोगों को खाना खिलाना चाहता है.

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