युवा ‘जॉब सीकर’ नहीं, ‘जॉब क्रिएटर’ बनें – निधि त्रिपाठी Reviewed by Momizat on . जलियांवाला बाग नरसंहार के 100 साल पूरे होने पर परिषद ने जलियांवाला बाग की मिट्टी देश के हर स्कूल-कॉलेज में भेजी आगरा. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 65वें राष् जलियांवाला बाग नरसंहार के 100 साल पूरे होने पर परिषद ने जलियांवाला बाग की मिट्टी देश के हर स्कूल-कॉलेज में भेजी आगरा. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 65वें राष् Rating: 0
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    युवा ‘जॉब सीकर’ नहीं, ‘जॉब क्रिएटर’ बनें – निधि त्रिपाठी

    जलियांवाला बाग नरसंहार के 100 साल पूरे होने पर परिषद ने जलियांवाला बाग की मिट्टी देश के हर स्कूल-कॉलेज में भेजी

    आगरा. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 65वें राष्ट्रीय अधिवेशन (आगरा कॉलेज मैदान पर 22 से 25 नवम्बर, 2019 तक) में चार प्रस्ताव पारित किए गए. पहले प्रस्ताव में राज्य विश्वविद्यालयों के संवर्धन पर जोर दिया गया. मांग की गई कि राज्य और केन्द्रीय विश्वविद्यालयों का शैक्षिक कलेंडर एक समान हो. दूसरा प्रस्ताव वर्तमान राष्ट्रीय परिदृश्य पर पारित हुआ. मांग की गई कि एनआरसी पूरे देश में लागू की जाए. तीसरे प्रस्ताव में जम्मू एवं कश्मीर से धारा 370 हटाने का स्वागत किया गया. आतंकवाद पीड़ित परिवारों को मदद की मांग की गई. चौथे प्रस्ताव में श्रीराम जन्मभूमि पर सदियों बाद आए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर सभी समुदायों का अभिनंदन किया गया.

    मंगलवार को यूथ हॉस्टल में आयोजित पत्रकार वार्ता में अ.भा. विद्यार्थी परिषद् की राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी ने बताया कि जलियांवाला बाग नरसंहार के 100 साल पूरे होने पर जलियांवाला बाग की मिट्टी देश के हर स्कूल-कॉलेज में भेजी गई है.

    उन्होंने बताया कि एबीवीपी ने कर्नाटक में स्कूल बेल अभियान लिया था. इस अभियान के माध्यम से छात्र और शिक्षकों के अभाव में बंद होने जा रहे सैकड़ों स्कूल पुनर्जीवित किए गए. अभियान में एनएसएस, एनसीसी, आदि ने भाग लिया. इस साल जिस राज्य में आवश्यकता होगी, वहां स्कूल बेल अभियान चलाया जाएगा. छात्रों को विद्यालय आने के लिए प्रेरित किया जाएगा. शिक्षा के प्रति रुचि जगाई जाएगी.

    प्रांत अधिवेशनों में दत्तोपंत ठेंगड़ी के विचारों पर चर्चा होगी

    उन्होंने बताया कि यह भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संस्थापकों में से एक दत्तोपंत ठेंगड़ी का जन्मशताब्दी वर्ष है. एबीवीपी के प्रांतीय अधिवेशन होने वाले हैं. इनमें दत्तोपंत ठेंगड़ी के विचारों पर चर्चा होगी. छात्रों के साथ समाज को भी उनके विचारों से अवगत कराएंगे. विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में चर्चा सत्र आयोजित होंगे.

    राज्य विश्वविद्यालयों और संबद्ध महाविद्यालयों को लेकर जो समस्या चल रही है, उस पर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री आदि को ज्ञापन देंगे. आंदोलन करेंगे. स्थिति सुधारने के लिए प्रयास करेंगे. संघर्ष के साथ समन्वय करते हुए सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ेंगे और विश्वविद्यालयों की स्थिति को सुधारने का प्रयास करेंगे.

    जलियांवाला बाग

    निधि ने कहा कि जलियांवाला बाग में सन 1919 नृशंस नरसंहार हुआ था. इस नरसंहार को सौ वर्ष पूरे हो गए हैं. हमारे पंजाब प्रांत के कार्यकर्ता जलियांवाला बाग से मिट्टी लेकर आए. वो मिट्टी कलश में रखकर एबीवीपी के सभी प्रांतों को दी है. कार्यकर्ता उस मिट्टी को लेकर अपने विश्वविद्यालय और कॉलेज परिसर में कार्यक्रम करें ताकि युवा पीढ़ी बलिदान से अवगत हो सके.

    भारत का इतिहास विकृत किया गया

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकात्मता पर चर्चा के दौरान राखीगढ़ी की बात हुई. इसके निष्कर्ष बताते हैं कि भारत में आर्यन और द्रविड़ के सिद्धांत को थोपा गया है. यह भी गलत है कि भारत के मूल निवासी कोई और थे. राखीगढ़ी में खुदाई के बाद पुरातत्ववेत्ताओं ने कहा कि भारत का इतिहास विकृत किया गया.

    राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा कि स्वरोजगार और आर्थिक सुस्ती पर भी बात हुई. आर्थिक जगत के विद्वानों ने सम्मेलन में कहा कि आर्थिक मंदी नहीं, आर्थिक सुस्ती है और पूरे विश्व में है. इससे उबरने के लिए आज का युवा ‘जॉब सीकर’ नहीं, ‘जॉब क्रिएटर’ बने. हमने अपने प्रस्ताव में कहा भी है कि भारत के जो मूल व्यवसाय हैं, जैसे कृषि, उद्योग और कुटीर उद्योग उसे बढ़ावा दिया जाए. स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों को और बढ़ावा दिया जाए. आज का युवा दूसरों को नौकरी देने में सक्षम हो सके, इस दिशा में आगे बढ़ेंगे ताकि राष्ट्र की उन्नति में अपना योगदान दे सकें.

    स्त्री विमर्श में वैदिक काल की बात क्यों नहीं

    उन्होंने कहा कि स्त्री विमर्श और युवा पर परिचर्चा की. छात्रों ने खुलकर अपनी बात रखी. स्त्री विमर्श के नाम पर मध्यकाल से आज तक की बात की जाती है, लेकिन वैदिक काल की बात भारत में नहीं की जाती है.

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