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रानीखेत के जंगलों में भारतीय-अमेरिकी सैनिकों ने किया संयुक्त युद्ध अभ्यास

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देहरादून (विश्व संवाद केन्द्र उत्तराखंड). सोमवार की सुबह कालिका का दलमोटी जंगल गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा. दलमोटी जंगल में एक विद्यालय में घुसे छह आतंकियों ने वहां छात्र-छात्राओं का अपहरण कर लिया. इसके बाद पहुंचे भारतीय-अमेरिकी सैनिकों ने दो घंटे के ऑपरेशन में आतंकियों को ढेर किया और बंधक छात्र-छात्राओं को छुड़ा लिया. चौंकिये मत, भारत-अमेरिका संयुक्त युद्धाभ्यास का यह सिर्फ डेमो था. सेना के सूत्रों ने बताया कि जंगल में जुबालैंड नाम का काल्पनिक गांव और स्कूल बनाया गया था. यहां भारतीय और अमेरिकी सेना ने संयुक्त युद्धाभ्यास के अनुभवों का डेमो दिखाया. जंगल में दोनों देशों के सैनिकों ने अपने-अपने अनुभवों का कुशलतापूर्वक प्रदर्शन किया. डेमो के तहत काल्पनिक जुबालैंड गांव के प्राइमरी स्कूल में छह आतंकवादियों ने घुसकर बच्चों को बंधक बना लिया था. इसी बीच सेना पहुंची, आतंकियों के साथ जमकर युद्ध हुआ. दोनों देशों के सैनिकों ने दो घंटे तक आतंकियों से जमकर मुकाबला किया. अमेरिकी सैनिकों ने दिखाया कि अंदर घुसकर कैसे आतंकियों पर धावा बोला जाता है, जबकि भारतीय सैनिकों ने भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया.

भारत व अमेरिका के इस संयुक्त युद्ध अभ्यास-2014 के तहत रानीखेत के निकट चौबटिया में आयोजित की गयी प्रेस वार्ता में भारतीय सेना के मेजर जनरल (एमजीजीएस मुख्यालय मध्य कमान) अश्विनी कुमार ने बताया कि भारतीय सेना आतंकवाद से लेकर प्राकृतिक आपदा तक, हर चुनौती से निपटने में सक्षम है. उन्होंने बताया कि बेहतर तकनीक व सैन्य ताकत के बावजूद हम शांतिप्रिय हैं. भारत एवं अमेरिका का संयुक्त युद्ध अभ्यास का मकसद मात्र आतंकवाद पर विजय ही नहीं अपितु एकजुटता, तालमेल, आपसी समझ, युद्ध तकनीक व विचारों का आदान प्रदान भी है. यह सामरिक संबंधों को और करीब लायेगा. दो लोकतांत्रिक देशों के संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण को रक्षा सहयोग व सामरिक संबंधों के लिये बेहतर बताते हुये मेजर जनरल ने कहा कि अभी तक भारत-अमेरिकी सेना ने साथ काम नहीं किया है. संयुक्त राष्ट्र संघ विश्व के देशों का मध्यस्थ है. शांति मिशन में सरकार के निर्देश पर मौका मिलेगा तो दोनों देश मिलकर काम करेंगे.

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