राष्ट्रीय श्रम आंदोलन का अग्रणी संगठन – भारतीय मजदूर संघ Reviewed by Momizat on . भारतीय मजदूर संघ भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय श्रमिक संगठन है. इसकी स्थापना भोपाल में महान विचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्व. दत्तोपंत ठेंगड़ी भारतीय मजदूर संघ भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय श्रमिक संगठन है. इसकी स्थापना भोपाल में महान विचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्व. दत्तोपंत ठेंगड़ी Rating: 0
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    राष्ट्रीय श्रम आंदोलन का अग्रणी संगठन – भारतीय मजदूर संघ

    भारतीय मजदूर संघ भारत का सबसे बड़ा केंद्रीय श्रमिक संगठन है. इसकी स्थापना भोपाल में महान विचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्व. दत्तोपंत ठेंगड़ी जी ने महान समाज सुधारक एवं स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बालगंगाधर तिलक जी के जन्मदिवस के अवसर पर 23 जुलाई, 1955 में भोपाल में की.

    भारत के अन्य श्रम संगठनों की तरह यह किसी संगठन के विभाजन के कारण नहीं बना, और न ही यह किसी राजनीतिक दल की श्रमिक इकाई है. यह राष्ट्रीय व राष्ट्र हित में विचारधारा वाले लोगों का एक सम्मिलित प्रयास का परिणाम था. यह देश का पहला मजदूर संगठन है, जो मजदूरों का, मजदूरों के लिए, मजदूरों द्वारा संचालित स्वतंत्र मजदूर संगठन है. स्थापना के पश्चात द्रुत गति से उन्नति करते हुए आज भारतीय मजदूर संघ देश में सर्वाधिक सदस्ता वाला मजदूर संगठन है.

    भारतीय मजदूर संघ स्थापना के 52 वर्ष (आज 64 वर्ष पूरे हो गए) पूरे होने पर एक करोड़ से अधिक सदस्यता तथा पांच हजार से अधिक यूनियनों के साथ देश का पहले नम्बर का केन्द्रीय श्रमिक संगठन बना. भारतीय मजदूर संघ का कार्य भारत के 32 राज्यों तथा 44 उद्योगों में है. 1989 की सदस्यता सत्यापन के आधार पर पहली बार 1996 में देश का नम्बर एक मजदूर संगठन घोषित हुआ. वर्ष 2002 की सदस्यता सत्यापन के परिणाम की घोषणा के अनुसार भारतीय मजदूर संघ 62 लाख से भी अधिक सदस्य संख्या के साथ देश का सबसे अधिक सदस्यों वाला मजदूर संगठन बना हुआ है.

    भारतीय मजदूर संघ की स्थापना से पहले मजदूर संगठन राजनीतिक पार्टियों से सम्बन्धित थे तथा पार्टी के मजदूर संगठन के रूप में कार्य करते थे. प्रारम्भ में अन्य मजदूर संगठनों का विरोध तथा व्यंग्य भारतीय मजदूर संघ के कार्यकर्ताओं को सहना पड़ता था, लेकिन भारतीय मजदूर संघ ने एक गैर राजनीतिक श्रमिक संगठन के रूप में अपना कार्य प्रारंभ किया तथा आज भी उसी सिद्धान्त पर कायम है. कोई भी राजनीतिक नेता इसका पदाधिकारी नहीं है तथा न ही राजनीतिक चुनाव नहीं लड़ता है.

    भारतीय मजदूर संघ ने अन्य मजदूर संगठनों से हटकर नए नारे तथा विचार श्रमिकों के सामने रखे –

    1. देश हित में करेंगे काम, काम के लेंगे पूरे दाम.
    2. नया जमाना आएगा, कमाने वाला खिलाएगा.
    3. बी.एम.एस. की क्या पहचान, त्याग-तपस्या और बलिदान.
    4. 4. राष्ट्र का औद्योगिकीकरण, उद्योगों का श्रमिकीकरण, श्रमिकों का राष्ट्रीयकरण

    मजदूर संघ ने 17 सितम्बर विश्वकर्मा जयन्ती को राष्ट्रीय श्रम दिवस के रूप में मनाना तय किया. भारतीय मजदूर संघ का मानना है कि भगवान विश्वकर्मा दुनिया के पहले शिल्पकार थे, इसलिए उनकी जयन्ती से बढ़कर श्रमिकों के लिए कोई और मजदूर दिवस नहीं हो सकता.

    भारतीय मजदूर संघ के कुछ महत्वपूर्ण सोपान –

    1). 1967 में सरकारी कर्मचारियों सहित सभी श्रमिकों के लिए बोनस की मांग करने वाला प्रथम श्रमिक संगठन.

    2). 1969 में ही साम्यवाद के पतन की घोषणा करने वाला प्रथम सामाजिक संगठन.

    3). 1989 में ही आर्थिक साम्राज्यवाद के खिलाफ युद्ध की घोषणा करने वाला प्रथम संगठन.

    4). 1999 में रोजगार बढ़ाने की मांग करने वाला एकमात्र केन्द्रीय श्रम संगठन.

    5). विदेशी आर्थिक आक्रमण का एकमात्र विकल्प – स्वदेशी के अनुसरण के उद्देश्य से जनजागरण

    आज भी भारतीय मजदूर संघ विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) का पूर्ण रूप से विरोध तथा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार से मांग कर रहा है.

    यह देश का एकमात्र ऐसा केन्द्रीय श्रम संगठन है जो किसी भी अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन से सम्बद्ध नहीं है और न ही कोई अन्तरराष्ट्रीय आर्थिक सहायता लेता है. 1996 से देश के पहले क्रमांक के केन्द्रीय श्रम संगठन के नाते भारतीय मजदूर संघ अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन के सम्मेलनों में भारतीय श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करता आ रहा है. भारतीय मजदूर संघ ने – भारतीय श्रम शोध मण्डल, सर्वपंथ समादर मंच, विश्वकर्मा श्रमिक शिक्षा संस्था व पर्यावरण मंच जैसे सहयोगी संगठनों की भी स्थापना की है.

     

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