राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ Reviewed by Momizat on . कार्यप्रणाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक कार्यप्रणाली अथवा मैथेडोलाजी है. जिसमें व्यक्ति निर्माण का काम किया जाता है. क्योंकि समाज के आचरण में कई प्रकार के परिवर कार्यप्रणाली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक कार्यप्रणाली अथवा मैथेडोलाजी है. जिसमें व्यक्ति निर्माण का काम किया जाता है. क्योंकि समाज के आचरण में कई प्रकार के परिवर Rating: 0
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    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

    कार्यप्रणाली

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक कार्यप्रणाली अथवा मैथेडोलाजी है. जिसमें व्यक्ति निर्माण का काम किया जाता है. क्योंकि समाज के आचरण में कई प्रकार के परिवर्तन आज भी हम चाहते हैं. जैसे भेद मुक्त समाज, समता युक्त समाज, शोषण मुक्त समाज और स्वार्थ रहित समाज. संघ की योजना है कि प्रत्येक गांव और जिले में अच्छे स्वयंसेवक खड़े करना. अच्छे स्वयंसेवक का मतलब है ‘जिसका अपना चरित्र विश्वासास्पद और शुद्ध है. वह सम्पूर्ण समाज एवं देश को अपना मानकर काम करता है. किसी को भेदभाव अथवा शत्रुता भाव से नहीं देखता’. अपने इन गुणों के कारण जिसने समाज का स्नेह और विश्वास अर्जित किया है. यह योजना 1925 में संघ के रूप में शुरू हुई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बस इतना ही है इससे ज्यादा नहीं.

    सामूहिक सहमति

    डॉ. हेडगेवार ने नहीं कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शुरू हुआ. उन्होंने संघ शुरू हुआ ऐसा कहा. लोगों ने पूछा कि आपका संघ कौन सा है? तो डॉक्टर साहब ने कहा, “तय किसने किया है? बैठक लो और तय करो.” बैठक हुई तो सोलह लोग आए और तीन नाम प्रस्तावित किये गये. चर्चा के बाद मतदान हुआ और बहुमत से पारित हुआ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ. डॉ. हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक मंडल संघ स्थापना से दो वर्ष पूर्व तक चलाया था लेकिन उन्होंने यह नाम किसी को बताया नहीं था. इस प्रकार सामूहिक सहमति का स्वभाव डॉक्टर साहब का था और संघ ने भी इसका अनुसरण किया.

    हिन्दू कौन?

    सम्पूर्ण हिन्दू समाज को संगठित करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गयी थी. सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत के अनुसार, “मेरे हृदय की भावना यह है कि भारत वर्ष में जो है, वे सभी हमारी भाषा में हिन्दू है. वह अपने आप को हिन्दू कहे अथवा न कहे; उनको स्वतंत्रता है अपने आप को दूसरा कुछ कहने की, हमको उसमें कोई गिला-शिकवा नहीं है. लेकिन वे सभी राष्ट्र के नाते एक पहचान के लोग हैं. जिसे हिन्दू के नाम से पहचाना जाता है.”

    महिलाओं की भागीदारी

    डॉ. हेडगेवार से एक महिला ने 1931 में पूछा, ‘आप बात कर रहे हो हिन्दू समाज के संगठन की. 50 प्रतिशत महिलाओं को तो वैसे ही छोड़ दिया आपने’. डॉ. हेडगेवार ने उनको कहा, “बात आपकी बिलकुल ठीक है, परंतु आज वातावरण ऐसा नहीं है कि पुरूष जाकर महिलाओं में काम करे. इससे कई प्रकार गलतफहमियों को मौका मिलता है. कोई महिला अगर काम करने को जाती है हम उसकी पूरी मदद करेंगे.” उस महिला ने इसी प्रकार चलने वाला एक ‘राष्ट्र सेविका समिति’ नाम का संगठन चलाया. आज वो भी भारतव्यापी संगठन बन गया. संघ के संस्कारों की कार्यपद्धति पुरुषों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में, महिलाओं के लिए राष्ट्रसेविका समिति में ये दोनों समानांतर चलेंगे. एक-दूसरे के कार्यक्षेत्र में काम नहीं करेंगे, एक-दूसरे की हमेशा मदद करके चलेंगे. वो उस समय तय हुआ. अगर इसको बदलना है तो दोनों तरफ लगना चाहिए कि इसको बदलना है तब वो होगा, नहीं तो नहीं होगा ऐसे ही चलेगा.

    हिन्दुत्व

    हिन्दुत्व पर संघ का विचार आधारित है. हिन्दुत्व संघ द्वारा खोजा हुआ नहीं है बल्कि भारत की परम्परा में सदियों से चलता हुआ विचार है. थोड़ा से प्रचार का भ्रमजाल दूर हटाकर हम देखेंगे तो सबका माना हुआ सर्वसम्मत विचार है. संघ में हिन्दुत्व के तीन आधार माने जाते है –  देशभक्ति, पूर्वज गौरव और संस्कृति. इस पर कोई विवाद होने का कारण नहीं. वह सबका साझा है. जाने-अनजाने उसका आचरण हम सब लोग करते हैं. अपने देश की चिंता करने वाले प्रमाणिक निः स्वार्थ बुद्धि के लोगों ने भारत की जो संकल्पना की है उसे ही संघ लेकर चल रहा है. यही हिन्दुत्व की कल्पना है जोकि कोई नया विचार नहीं है.

    (यह लेख सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत द्वारा दिए गएभविष्य का भारतव्याख्यान पर आधारित है)  

     

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