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लॉकडाउन को असफल करने के लिए रचा गया कम्युनिस्ट जेहादी षड्यंत्र

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एक ओर जहां डब्ल्यू.एच.ओ. सहित सम्पूर्ण विश्व कोरोना से निपटने के लिए किए जा रहे भारतीय प्रयासों की प्रशंसा कर रहा है, वहीं अपने ही देश के कम्युनिस्टों और जेहादियों को इससे परेशानी हो रही है. ऐसा ही कुछ दिल्ली में भी देखने को मिला, जहां अचानक हजारों की भीड़ एकत्रित हो गई. दरअसल अर्बन नक्सल-कम्युनिस्ट गठजोड़ ने गरीब लोगों में अफवाह फैला दी कि दिल्ली से उत्तर प्रदेश के लिए दुर्गम स्थलों तक जाने के लिए बसें जा रही है. लोगों को व्हाट्सएप्प के माध्यम से गलत सूचनाएं दी गई. जिससे वे अपने घर जाने के लिए आशान्वित हो गए. इस तरह की सूचनाओं को फैलाने के लिए अर्बन-नक्सली गिरोह पूरी तरह से सक्रिय था ताकि लॉकडाउन को असफल किया जा सके. इस षड्यंत्र का लक्ष्य था कि हजारों लोग कोराना वायरस के शिकार हो जाएं और यह बीमारी तेजी से फैल जाए. मीडिया द्वारा इस समाचार का खूब प्रचार किया गया. इसमें केरल का मीडिया भी अग्रणी था. इसके बाद कम्युनिस्ट इस खबर पर सुनियोजित तरीके से लपक पड़े जैसे उनको कोई शिकार मिल गया हो. इस विरोध की अगुवाई एल.डी.एफ. के वित्तमंत्री थॉमस ने की. वे केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की इस बात से नाराज थे. दिल्ली में जब कम्युनिस्ट हालात खराब होने का जश्न मना रहे थे, वहीं केरल के चंगनसेरी के नजदीक स्थित शहर में भीड़ एकत्र हो गई. अन्य राज्यों से प्रदेश में आए हजारों कामगार शामिल थे, उनके साथ अवैध बांग्लादेशी प्रवासी भी थे. 29 मार्च की सुबह ही अचानक लॉकडाउन के बावजूद भीड़ इक्कठी हो गई. भीड़ में शामिल लोग भोजन पानी और घर वापिस जाने के लिए यातायात सुविधा की मांग कर रहे थे. सरकार द्वारा पर्याप्त भोजन, पानी देने के बावजूद भीड़ का इक्कठा होना कम्युनिस्टों और जेहादियों के षढ्यंत्र की ओर स्पष्ट इशारा करता है.

कम्युनिस्ट कह रहे हैं कि एक चैनल जमात ए इस्लामी ने लोगों को भड़काया ताकि लोग एकत्र हो जाएं. जेहादियों और कम्युनिस्टों का एजेंडा लॉकडाउन को असफल कर कोरोना को फैलाने का था ताकि देश को तोड़ा जा सके. इसके साथ ही इनका एजेंडा सरकार की छवि को खराब करके बदनाम करने का भी था.

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