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लॉकडाउन – चुनौतियों से निपटते हुए आत्मनिर्भरता की ओर

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लॉकडाउन के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मी

नई दिल्ली. चीनी वायरस से बचाव के लिए भारत में घोषित लॉकडाउन को दो माह का समय पूरा हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को संबोधन के दौरान देश में पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की थी. उस समय देश में कोरोना से संक्रमितों की संख्या 500 के लगभग थी. लॉकडाउन को तीन बार आगे बढ़ाया गया. तथा लॉकडाउन के हर चरण में पहले अधिक छूट प्रदान की गई. वर्तमान में चल रहे लॉकडाउन 4.0 में पाबंदियों का स्वरूप बदल चुका है. जीवन पटरी पर वापिस लौट रहा है. लेकिन संक्रमितों की संख्या निरंतर बढ़ रही है. अब संख्या सवा लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है. भारत के समक्ष दो माह की अवधि के दौरान चुनौतियां भी आई हैं, लेकिन भारत ने आत्मनिर्भरता की ओर भी कदम बढ़ा दिए हैं. दो माह के दौरान अनेक उदाहरण हमारे समक्ष हैं.

अगर कोरोना महामारी को लेकर विश्व के अन्य देशों के आंकड़ों के आधार पर तुलना करें तो भारत की स्थिति काफी अच्छी है. जहां विश्व में कोरोना संक्रमितों की मृत्यु दर 6.5 प्रतिशत है, वहीं भारत में मृत्यु दर 3 प्रतिशत के लगभग है. यानि, दुनिया में प्रत्येक 1000 कोरोना संक्रमितों में से 65 की मौत हो रही है, तो भारत में 30 लोगों की ही जान जा रही है. लॉकडाउन के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को भी धक्का पहुंचा है. इसे फिर से गति देने के लिए केंद्र सरकार ने लगभग 21 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज घोषित किया है. भारत इस संकट का अवसर के रूप में इस्तेमाल कर आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहा है. लॉकडाउन के कारण पूरे देश में प्रवासियों के पलायन का सैलाब आ गया और रेल मंत्रालय ने स्थिति से निपटने के लिए बड़ा अभियान चलाया. रेलवे एक मई से 22 मई तक 2800 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से करीब 36 लाख प्रवासियों को उनके गंतव्य तक पहुंचा चुका है. वंदे भारत मिशन के तहत 20 हजार से ज्यादा भारतीय विमानों के जरिये विदेशों से स्वदेश लाए जा चुका हैं.

दो माह में बना दुनिया का दूसरा पीपीइ उत्पादक देश

कोरोना महामारी से पहले भारत में एक भी पीपीइ किट (व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण) का उत्पादन नहीं होता था, लेकिन दो महीने की छोटी-सी अवधि में ही हम दुनिया में पीपीइ के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक बन गये हैं. डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कोरोना योद्धाओं को संक्रमण से बचाव के लिए इसकी जरूरत होती है. आज भारत में रोजाना लगभग 4.5 लाख पीपीइ किट का उत्पादन हो रहा है और इसमें तकरीबन 600 कंपनियां लगी हैं. पीपीइ उत्पादन में भारत अब केवल चीन से पीछे है.

इसी प्रकार भारत में एन95 मास्क का भी उत्पादन नहीं होता था. कुछ दिन पहले तक सवा दो लाख मास्क प्रतिदिन बनाए जा रहे थे. कुछ अन्य कंपनियों को लाइसेंस प्रदान करने की प्रक्रिया चल रही थी, जिसके पश्चात उत्पादन क्षमता सवा चार लाख मास्क प्रतिदिन हो जाएगी.

अकेले उत्तर प्रदेश में बना 61 लाख लीटर सेनेटाइजर

भारत में आज हर दिन लाखों लीटर सेनेटाइजर का निर्माण हो रहा है. इसमें चीनी उत्पादक राज्यों की बड़ी भूमिका है. शूगर मिल से निकलने वाले शीरे से अब शराब की जगह सेनेटाइजर का उत्पादन हो रहा है. अकेले उत्तर प्रदेश में दो महीने में 61 लाख लीटर सेनेटाइजर बन चुका है. राज्य में पहले केवल एक चीनी मिल सेनेटाइजर बनाती थी, अब 27 मिलें बना रही हैं.

वेंटीलेटर की कमी दूर होगी

अस्पताल वेंटीलेटर की कमी की समस्या से जूझ रहे थे. पर्याप्त आपूर्ति नहीं थी. कोरोना महामारी के संकट को देखते हुए 15 हजार के करीब वेंटीलेटर को कोविड19 के मरीजों के लिए रखा गया था. हर माह औसतन पांच हजार वेंटीलेटर का निर्माण हो रहा था. समस्या को ध्यान में रखकर सरकार ने प्रयास शुरू किए और आर्थिक सहयोग देने के साथ ही कंपनियों ने वेंटीलेटर के निर्माण में कदम बढ़ाया. संभावना है कि जून अंत तक (दो माह की अवधि में) 40 हजार वेंटीलेटर का उत्पादन होगा.

तीन बार बढ़ा लॉकडाउन

  • लॉकडाउन 0 25 मार्च-14 अप्रैल (21 दिन)
  • लॉकडाउन 0 15 अप्रैल- 3 मई (19 दिन)
  • लॉकडाउन 0 4 मई- 17 मई (14 दिन)
  • लॉकडाउन 0 18 मई- 31 मई (14 दिन)

कोरोना संक्रमण : 24 मार्च की स्थिति

  • कुल संक्रमित 492
  • ठीक हुए 46
  • मौत 9

वर्तमान स्थिति

  • कुल संक्रमित 1,25,101
  • ठीक हुए 51,784
  • मौत 3720

(स्रोत – केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय.)

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