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    लोकतंत्र के समक्ष व्यक्तिवाद, जातिवाद, क्षेत्रवाद सबसे बड़ी चुनौती – डॉ. राकेश सिन्हा

    देहरादून (विसंकें). राज्यसभा सांसद डॉ. राकेश सिन्हा ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के सामने व्यक्तिवाद, जातिवाद, क्षेत्रवाद व साम्प्रदायिकता सबसे बड़ी चुनौती है. व्यक्तिवाद के कारण लोकतंत्र व्यक्ति विशेष का बंधक बन जाता है जो न समाज हित में है और न ही देश हित में. डॉ. सिन्हा ए.एम.एन. घोष सभागार (ओ.एन.जी.सी.) में विश्व संवाद केन्द्र द्वारा आयोजित ‘लोकतंत्र के समक्ष उपस्थित चुनौतियां’ विषय पर कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में सम्बोधित कर रहे थे. डॉ. राकेश सिन्हा ने पुलवामा में बलिदानी जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भारत की बलिदानी परम्परा रही है. देश की रक्षा व सुरक्षा के लिए लम्बे समय से प्रत्येक भारतीय बलिदान के लिए तत्पर रहता है. लोकमान्य तिलक के जीवन का प्रसंग बताते हुए कहा कि जवान पुत्र की मौत भी तिलक को अंग्रेज सरकार के काले कानून के विरुद्ध लिखने से नहीं रोक सकी. उन्होंने अपना काम पूरा करने के बाद ही मृत पुत्र की सुध ली. तिरंगे झण्डे के लिए बलिदान हुए बिहार के सात नन्हें बालकों का प्रसंग भी सुनाया कि कैसे वे एक के बाद एक तिरंगे झण्डे के सम्मान के लिए अंगेजों की गोली के शिकार बने.

    उन्होंने कहा कि देहरादून/उत्तराखण्ड के चारों शहीद भी उसी बलिदानी परम्परा के वाहक थे जो भारत माता की रक्षा में बलिदान हो गए. लोकतंत्र की रक्षा से पहले देश की रक्षा जरूरी है. उन्होंने कहा कि जातिवाद, क्षेत्रवाद व प्रान्तवाद को बढ़ावा मिला तथा साम्प्रदायिकता का जहर समाज में व्याप्त हो गया. जातिवादी राजनीति के सम्बन्ध में कहा कि पं. दीनदयाल जी ने चुनाव हारना स्वीकार किया, जातिवाद के नाम पर वोट मांगना अस्वीकार कर दिया. परिणामस्वरूप वे चुनाव हार गए. दीनदयाल जी ने कहा कि दीनदयाल चुनाव हार गया, लेकिन जनसंघ जीत गया और जातिवाद हार गया. राकेश सिन्हा ने कहा कि कश्मीर भारत का है और भारत में रहेगा. उमर अब्दुला और महबूवा मुफ्ती जैसे लोगों को तय करना है कि उन्हें कहाँ रहना है.

    कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि देश का मन बन रहा है कि पाकिस्तान को सबक सिखाया जाए. देश के लिए बलिदान होने वालों में उत्तराखण्ड का हिस्सा 10 प्रतिशत से अधिक है. कारगिल के युद्ध में उत्तराखण्ड के 40 प्रतिशत सैनिक बलिदान हुए थे. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार दृढ़ता के साथ पाकिस्तान की हरकतों के खिलाफ खड़ी है. इसलिए विश्व भी भारत के साथ है. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देहरादून के महापौर सुनील उनियाल गामा ने भी अपने विचार व्यक्त किये.

    विश्व संवाद केन्द्र के निदेशक विजय कुमार ने लोकतंत्र के समक्ष उपस्थित चुनौतियां विषय की भूमिका रखी. कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलन से हुआ. विश्व संवाद केन्द्र की ‘वार्षिकी 2018’ के सम्पादक डॉ. देवेन्द्र भसीन ने पत्रिका के सन्दर्भ में जानकारी दी तथा बाद में अतिथियों द्वारा पत्रिका का लोकार्पण किया गया.

     

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