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लोक भाषाएं जिंदा रहेंगी तो साहित्य जिंदा रहेगा – प्रो. योगेश चंद्र दूबे

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कटनी (विसंकें). कटनी पुस्तक मेले के अंतिम दिन मुख्य अतिथि प्रो. योगेश चंद्र दूबे जी ने कहा कि लोक भाषाएं जिंदा रहेंगी तो साहित्य जिंदा रहेगा. लोक भाषाओं के विकास के लिए उनका अलग से संकलन होना आवश्यक है. पुस्तक मेला आकर्षण का केंद्र है, आज साहित्य सृजन बहुत हो रहा है. काव्य गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन की संख्या घट रही है. इंटरनेट के युग में भले ही कंप्यूटर पर लोगों की निर्भरता बढ़ गई है, किंतु इस तरह के आयोजन निरंतर होते रहने चाहिएं, तभी साहित्य जिंदा रहेगा. हम अध्ययन शक्ति को राष्ट्रीय साहित्य के माध्यम से ही बढ़ा सकते हैं.

विशिष्ट अतिथि शशांक श्रीवास्तव ने कहा कि अनेक कठिनाइयों के बावजूद पुस्तक मेला 8 वर्षों से निरंतर कटनी की धरा पर आयोजित किया जा रहा है. यह निश्चित ही इस बात का प्रतीक है कि आज कटनी में कहीं ना कहीं साहित्य जिंदा है और हम लोग यह प्रयास करें कि आगे भी यह निरंतरता बनी रहे.

पंजाब नेशनल बैंक के मंडल प्रमुख अमरेश प्रसाद ने कहा कि आज नई पीढ़ी में निश्चित रूप से पठनीयता की कमी आ रही है. ऐसे आयोजन सभी जगह होने चाहिएं, पंजाब नेशनल बैंक हर तरह से समाज में इस तरह की सकारात्मक गतिविधियों में अपना योगदान देता आया है और देता रहेगा.

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संदीप जायसवाल ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि निरंतर कई वर्षों से पुस्तक मेले में आने का सौभाग्य मिल रहा है. पुस्तक मेले में हमेशा हमारा यह प्रयास रहा है, इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए और हम यह प्रयास करेंगे कि हमारा सहयोग निरंतर बना रहे. कटनी में साहित्यिक श्रृंखला को बढ़ाने के लिए कटनी में आधुनिक लाइब्रेरी का निर्माण शासन द्वारा कराया गया है और आगे भी इस तरह के प्रयास किए जाते रहेंगे.

कार्यक्रम के अगले चरण में प्रिया सोनी द्वारा सुंदर भजन की प्रस्तुति दी गई. कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन समिति के संयोजक अरुण सोनी ने किया.

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