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विकास का भारतीय मॉडल ही समृद्धि, रोजगार, सुख और शांति का आधार है – सतीश कुमार

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ग्वालियर (विसंकें). स्वदेशी जागरण मंच के उत्तर भारत के संगठक एवं अखिल भारतीय सह विचार विभाग प्रमुख सतीश जी ने कहा कि विकास का भारतीय मॉडल ही समृद्धि, रोजगार, सुख और शांति का आधार है. रूस का साम्यवादी अर्थ तंत्र और अमेरिका का पूंजीवाद दोनों ही देशों में असफल हुए हैं. रूस की साम्यवादी अर्थव्यवस्था से रूस का पतन हो गया तथा पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के चलते ही 2008 में  अमेरिका का आर्थिक पराभव हो गया था. अमेरिका महामंदी की चपेट में आ गया था, उसके बड़े-बड़े बैंक दिवालिया हो गए थे. लेकिन उसने महामंदी को “लिक्विडिटी प्रॉब्लम” कहकर छिपाने का प्रयास किया. सतीश जी श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जन्मशताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में महारानी लक्ष्मीबाई शारीरिक प्रशिक्षण संस्थान, ग्वालियर में “विकास की अवधारणा” विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था या भारतीय अर्थचिंतन की अवधारणाओं से अवगत कराते हुए कहा कि 1500 वर्षों तक भारत का पूरे विश्व की जीडीपी में 31% योगदान रहा था, जबकि अमेरिका, चीन की अपने-अपने सर्वोच्च समय में जीडीपी का हिस्सा 21 व 22 प्रतिशत तक ही सिमटकर रह गया और उस पर भी इन देशों ने पर्यावरण को अत्यधिक नुकसान पहुंचाया. दूसरी ओर भारतीय अर्थचिंतन के चलते देश ने 31% जीडीपी की भागीदारी करते हुए पर्यावरण संतुलन को ना केवल बनाकर रखा, बल्कि उसकी शुद्धता के उपाय भी किए. बेरोजगारी जैसे शब्द भारत के नहीं है क्योंकि बेरोजगारी थी ही नहीं. देश सुखी, समृद्ध होने के साथ-साथ सर्वोच्च नैतिक गुणों और धर्म आधारित व्यवस्थाओं से युक्त था.

उन्होंने कहा कि आज देश को पुनः ऐसे ही विकास के भारतीय मॉडल की आवश्यकता है, जिससे सभी को रोजगार प्राप्त हो सके, पर्यावरण का समुचित संरक्षण व विकास हो सके, देश में समृद्धि, सुख-शांति का विकास हो सके. ऐसा आर्थिक चिंतन केवल भारतीय आर्थिक चिंतन है, भारतीय विकास की अवधारणा है और हमें उस पर आना ही होगा.

कार्यक्रम के अध्यक्ष पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी जी ने दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के जीवन की जानकारी दी. उन्होंने ठेंगड़ी जी के स्वयंसेवक बनने एवं जीवन की अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं की चर्चा की. कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ.

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