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विजयादशमी शोभा यात्रा व दुर्गा प्रतिमा विसर्जन यात्रा पर विभिन्न स्थानों पर पथराव

जब करोड़ों सनातनी धर्मावलम्बी विश्व की रक्षा और कल्याण के लिए मां दुर्गा का पाठ कर रहे थे, तभी एक समूह ऐसा भी था जो आदि शक्ति मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन के दौरान विघ्न डालने और तनाव फैलाने के षड्यंत्रों में लिप्त था. शारदीय नवरात्रि के बाद दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान देशभर के दो दर्जन से अधिक स्थानों पर झड़पों के समाचार हैं.

राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा में दशहरा जुलूस पर मुस्लिम समुदाय के युवकों ने जबरदस्त पथराव कर दिया, जिससे भगदड़ मच गई. विसर्जन जुलूस पर यह पथराव सादात मोहल्ला में तोड़ा रोड पहुंचने पर हुआ. इसके बाद तोड़फोड़ भी हुई. हालात ऐसे थे कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए वहां कर्फ्यू लगा दिया गया है और इंटरनेट सेवाएं रोक दी गईं हैं. स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को सुबह शहर के एक ठेकेदार को इस इलाके में मुस्लिम युवाओं ने प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी लगाने से रोक दिया था.

इसी तरह उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के पचपेड़वा थानाक्षेत्र में उपद्रवियों ने विसर्जन जुलूस पर पथराव किया, जिसमें 16 लोग घायल हो गए. यह पथराव उस समय हुआ, जब जुलूस एक मस्जिद के सामने से गुजर रहा था. घटना में 50 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. बलरामपुर में पिछले साल भी विसर्जन जुलूस पर हमला किया गया था, जिसमें 10 लोग घायल हुए थे.

उत्तर प्रदेश के ही बस्ती जिले में छावनी थानाक्षेत्र में अमोढ़ा बाजार में प्रतिमाओं के विसर्जन मार्ग पर मांस के टुकड़े फैंके गए, जिससे तनाव व्याप्त हो गया. वहां आगजनी और तोड़फोड़ हुई, जिसके बाद सीपीएफएम लगायी गई है. बदायूं जिले में विसर्जन के मार्ग को बदलने को लेकर झड़प हुई. उत्तर प्रदेश के ही देवरिया जिले के रुद्रपुर में भी डीजे को लेकर झड़प की खबर है. अयोध्या जिले के मवई थानाक्षेत्र के कामाख्या भवानी घाटपर भी डीजे को लेकर झड़प हुई.

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में तो अजब ही घटना हुई. वहां पंडाल में अचानक अजान की आवाज आने लगी. श्रद्धालुओं द्वारा आपत्ति किये जाने पर कहा गया कि इस बार पंडाल की थीम सांप्रदायिक सौहार्द है, जिसके तहत दुर्गासप्तशती के साथ अजान बजाई जा रही है. ऐसी तमाम खबरें देश के कई हिस्सों से हैं. यह पहली बार नहीं है. पिछले साल भी अक्तूबर में दशहरे में विसर्जन जुलूस में उत्तर प्रदेश में आगरा, बागपत, कौशाम्बी, सुलतानपुर, प्रतापगढ़ और जौनपुर समेत कई स्थानों पर झड़पें हुई थीं, जिसमें दो लोग मारे भी गए थे. इसी तरह इसी वर्ष रामनवमी के मौके पर भी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के कई स्थानों पर हिंसक झड़पें हुईं.

कौन हैं ये लोग, जिन्हें इन त्योहारों के शांति से गुजरने पर आपत्ति है? दरअसल इन षड्यंत्रकारियों और हमलावरों को दिक्कत इस बात से है कि दशहरा एक ऐसा त्योहार है जो सनातनियों को सामूहिकता प्रदान करता है. इस सामूहिकता से सनातनियों में एकजुटता उत्पन्न होती है. दशहरा बुराई पर अच्छाई की, असत्य पर सत्य की विजय के गौरव का भान भी कराता है, जिससे सनातनियों में आत्मविश्वास बढ़ता है. शास्त्र के पूजक सनातनी इसी दिन शक्ति और शस्त्र की पूजा भी करते हैं. यह शक्ति और सामूहिकता सनातनियों को पराक्रमी और निडर बनाती है.

ये दशहरा, आदिशक्ति की पूजा, शस्त्रपूजन, राम बरात, रामलीला, प्रतिमा विसर्जन जैसी परंपराएं ही हैं जो दीर्घकाल से दुनिया के सनातन धर्मावलंबियों को एक-दूसरे से अपरिचित होने के बावजूद एकजुट रखती हैं. सनातनियों में परंपरा से संबंधित यह मतैक्य ही भारत को सांस्कृतिक राष्ट्र होने का जामा पहनाता है. देश के उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी, पश्चिमी और मध्य हिस्से में थोड़ी-बहुत स्थानीयता के साथ दशहरा का मूल स्वरूप एक ही है. यह स्वरूप देश के हर कोने के भारतीय को एक होने का भान कराती है. यह सांस्कृतिक रूप से एक होने का भान ही है जो सदियों तक विदेशी आक्रांताओं की गुलामी के बावजूद भारत राष्ट्र को अक्षुण्ण रखे हुए है. इसीलिए भारत के टुकड़े-टुकड़े करने की चाहत रखने वालों को दशहरा खलता है. इसीलिए भारतीय सुरक्षा पंक्ति को मजबूत बनाये जाने के लिए खरीदे गये राफेल की शस्त्रपूजा किये जाने पर कुछ लोगों को आपत्ति होती है.

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