विद्यालय बालक की तपस्थली, यहां मिलते हैं श्रेष्ठ संस्कार Reviewed by Momizat on . जयपुर. 70वें संविधान दिवस के अवसर पर आदर्श शिक्षा परिषद समिति, जयपुर द्वारा प्रांत का पहला शिशु संगम जवाहर नगर स्थित सरस्वती बालिका विद्या मंदिर में सम्पन्न हुआ जयपुर. 70वें संविधान दिवस के अवसर पर आदर्श शिक्षा परिषद समिति, जयपुर द्वारा प्रांत का पहला शिशु संगम जवाहर नगर स्थित सरस्वती बालिका विद्या मंदिर में सम्पन्न हुआ Rating: 0
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    विद्यालय बालक की तपस्थली, यहां मिलते हैं श्रेष्ठ संस्कार

    जयपुर. 70वें संविधान दिवस के अवसर पर आदर्श शिक्षा परिषद समिति, जयपुर द्वारा प्रांत का पहला शिशु संगम जवाहर नगर स्थित सरस्वती बालिका विद्या मंदिर में सम्पन्न हुआ.

    मुख्य वक्ता विद्या भारती बालिका शिक्षा की राष्ट्रीय सह संयोजिका प्रमिला शर्मा जी ने कहा कि संस्कार युक्त व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से सरस्वती शिशु मंदिर का बीजारोपण हुआ था, जो आज वटवृक्ष बन चुका है. विद्या मंदिरों में भी बालकों को शारीरिक, मानसिक व बौद्विक विकास की शिक्षा दी जाती है. उन्होंने कहा कि माता बालक की प्रथम गुरू होती है, उन्हें बालक को समर्थ गुरू रामदास, शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप के समान बहादुर व सुयोग्य बनाने की शिक्षा देनी चाहिए. बालक को सभ्य, संस्कार युक्त बनाना विद्या मंदिरों के संचालन का मुख्य लक्ष्य है. विद्यालय बालक की तपस्थली होती है, जहां उसे संस्कार मिलते हैं.

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जयपुर प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र जी ने कहा कि बालक को जो संस्कार शिशु अवस्था में दिए जाते हैं, वे संस्कार बालक में जीवन पर्यन्त बने रहते हैं. बालक को गुण सम्पन्न बनाने में वीर जीजा माता जैसा बनकर संस्कार देने होंगे. जिससे भारत विश्व का सिरमौर बन सके. भारत माता की जय का उद्घोष करने वाले बालक कभी राष्ट्र विरोधी नहीं हो सकते, इसलिए आज बालकों में संस्कार रूपी बीजारोपण करना अत्यावश्यक है. जिससे देश की भावी पीढ़ी राष्ट्रभक्त, संस्कारयुक्त व देश के प्रति चिंतन करने वाली बन सके.

    समिति के अध्यक्ष गोविंद प्रसाद अरोड़ा जी ने गुरू नानकदेव के जीवन की शिक्षाएं बालकों को देने की बात कहते हुए संविधान स्थापना दिवस पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम में जयपुर महानगर के 19 विद्यालयों के 3 से 7 वर्ष आयु वर्ग के करीब दो हजार भैय्या-बहन व अभिभावक उपस्थित रहे.

    कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रदर्शनी का उद्घाटन डॉ. शैलेन्द्र जी ने किया. नन्हें बालकों द्वारा पथ संचलन, शारीरिक प्रदर्शन, सांस्कृतिक व देशभक्ति से परिपूर्ण कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुति दी गई. संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य हस्तीमल जी, पाथेय कण के प्रबंध संपादक माणकचंद जी, कुंजबिहारी जी, सुरेश वधवा जी सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित रहे.

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