विद्या भारती की अखिल भारतीय खेलकूद प्रतियोगिता मेरठ में सम्पन्न Reviewed by Momizat on . मेरठ. मेरठ की क्रांति धरा पर 13 से 16 अक्तूबर तक अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान विद्या भारती का 30वाँ अखिल भारतीय खेल-कूद समारोह सम्पन्न हुआ. खेल प्रतियोगिता में सम मेरठ. मेरठ की क्रांति धरा पर 13 से 16 अक्तूबर तक अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान विद्या भारती का 30वाँ अखिल भारतीय खेल-कूद समारोह सम्पन्न हुआ. खेल प्रतियोगिता में सम Rating: 0
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    विद्या भारती की अखिल भारतीय खेलकूद प्रतियोगिता मेरठ में सम्पन्न

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    मेरठ. मेरठ की क्रांति धरा पर 13 से 16 अक्तूबर तक अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान विद्या भारती का 30वाँ अखिल भारतीय खेल-कूद समारोह सम्पन्न हुआ. खेल प्रतियोगिता में सम्पूर्ण भारत से आये एक हजार खिलाड़ियों ने भाग लिया. उत्साही खिलाड़ियों ने चार दिवसीय खेल प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन से स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम उज्ज्वल करने के लिये तैयार हैं. शहर के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में आयोजित प्रतियोगिता का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा, राज्य के खेल मंत्री चेतन चौहान एवं विद्या भारती के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री श्रीराम अरावरकर जी ने किया. दिनेश शर्मा जी ने कहा कि संस्कार बिना शिक्षा अधूरी है और देश को आगे ले जाने के लिये संस्कारवान नौजवान पीढ़ी की बेहद आवश्यकता है. विद्या भारती सरस्वती शिशु मंदिर और विद्या मंदिर विद्यालयों के माध्यम से युवाओं और बालकों को संस्कारित करने का जो कार्य कर रही है, अत्यंत ही प्रशंसनीय है. प्रदेश के खेल मंत्री चेतन चौहान जी ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में खेल व खिलाड़ियों के लिये बेहतर अवसर और सुविधाएं देने के लिये तेजी से कार्य कर रही है.

    खेलकूद प्रतियोगिता में देशभर से आये खिलाड़ियों को 11 क्षेत्रों में बाँटा गया था. इसमें 3 श्रेणियों में 14 वर्ष, 17 वर्ष एवं 19 वर्ष अन्तर्गत के एक हजार बालक-बालिकाओं ने हिस्सा लिया. विभिन्न वर्ग में खेलकूद की 93 स्पर्धाएं हुई, जिनमें पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर रहा. कार्यक्रम की व्यवस्था देखने के लिये 85 निर्णायक, 165 खेल कार्यकर्ता एवं 250 लोग अन्य व्यवस्थाओं में दिन-रात जुटे रहे.

    समापन समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह जी ने कहा कि शिक्षा जीवन समझना सिखाती है. अगर विद्या देने पर भी सकारात्मक प्रभाव नहीं है तो उसका कोई फायदा नहीं है. हार और जीत खेल का हिस्सा है. इससे मायूस और निराश होने की जरुरत नहीं है. हार से सबक लेकर अधिक मेहनत करने से सफलता प्राप्त की जा सकती है.

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