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विनाश से बचने के लिए सहस्राब्दी से प्रमाणित स्वदेशी विकास की अवधारणा और जीवन शैली को अपनाया जाए

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GVS_5004जोधपुर (विसंकें). स्वदेशी जागरण मंच के 12वें राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि रविन्द्र कुमार त्यागी, मंच के राष्ट्रीय संयोजक अरूण ओझा, राष्ट्रीय संगठक कश्मीरी लाल जी ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया. उद्घाटन के अवसर पर ओम विश्वदीप गुरूकुल आश्रम महामण्डेश्वर महेश्वरानन्द गिरी, मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्विनी महाजन, भगवती प्रकाश शर्मा, सुन्दरम, सरोज मित्रा, अखिल भारत प्रचारक प्रमुख दीपक शर्मा प्रदीप, विद्या भारती के सहसंगठक प्रमुख जे. जगदीश, राष्ट्रीय  स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय  प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य, संघ साहित्य प्रमुख लक्ष्मीनारायण, उत्तर भारत संगठक व सम्मेलन समिति प्रमुख सतीश कुमार उपस्थित थे.

मुख्य अतिथि एवं हिन्दुस्तान एरोनोटिक लिमिटेड के पूर्व निदेशक रविन्द्र कुमार त्यागी ने कहा कि यह मेरे लिए गर्व का दिन है कि राष्ट्रीय सम्मेलन में अपने विचार व्यक्त कर रहा हूं. 24 वर्षों से स्वदेशी जागरण मंच के प्रशंसक रहे है. मंच ने अपने कार्यों द्वारा स्वदेश प्रेम की जन चेतना जगाई है. आने वाले 10 वर्ष भारत के लिए अति महत्वपूर्ण होंगे. आज भारत में 98 करोड़ मोबाईल उपभोक्ता हैं, 30 करोड़ लोग इन्टरनेट का प्रयोग करते हैं. लेकिन भारत में अपना कोई इन्टरनेट सर्वर नहीं है. देश में हजारों हवाई जहाज हैं, लेकिन स्वदेश निर्मित एक भी नहीं. 100 से अधिक हवाई अड्डे हैं, लेकिन हवाई जहाजों का रखरखाव सिंगापुर में होता है. पिछले 10 वर्षों में 13 लाख करोड़ रूपये के सैनिक साजों सामान खरीदे और अपनी रक्षा जरूरत का 70 प्रतिशत सामान आयात करते हैं. आने वाले वर्षों में स्थितियां बदलें और हम अधिकांश जरूरत का सामान देश में निर्मित करें.

GVS_5029अरूण ओझा ने स्वदेशी वृत को पढ़कर सुनाया. जिसमें स्वदेशी जागरण मंच के अलग-अलग प्रान्तों की पिछले एक वर्ष की गतिविधियों का समावेश किया गया. देश में कई जगह सेज के निर्माण में किसानों के साथ धोखा हुआ है, इसमें अधिग्रहित की गई अधिकांश भूमि अनुपयोगी सिद्ध हो रही है. एक तरफ किसानों से सब्सिडी छिनी जा रही है, तो दूसरी तरफ औद्योगिक घरानों को टैक्स छूट दी जा रही है. मेक इन इण्डिया विदेशी तकनीक व विदेशी निवेश पर आधारित है. हमें मेड बाई इण्डिया के पथ पर कदम बढाना होगा. देश के बैकों में 90 लाख 73 हजार करोड़ रूपये भारतीय लोगों के पड़े हैं. यदि  इसका 10 प्रतिशत भी देश के उद्योग धन्धों व आधारभूत ढांचों को विकसित करने में लगाया जाये तो विदेशी पूंजी की आवश्यकता ही नहीं पडे़गी. हम किसी भी स्तर पर कम नहीं है, बस अपने साहस व सही सोच से जन को जगाने की आवश्यकता है और ऐसा कार्य स्वदेशी जागरण मंच अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से कर रहा है.

प. पू. स्वामी महेश्वरानंद जी ने कहा कि आज का दिन हमारे भारतीय संस्कृति के लिए गौरव का दिन है. संघ, शक्ति व शूर तीनों के कारण से हमारे देश का सिर ऊंचा है. उन्हें अपनी भाषा में बोलने में आनन्द आता है. हमें अपने बच्चों को मानवता व देश की गौरवशाली संस्कृति की शिक्षा देनी चाहिए क्योंकि हमारी संस्कृति वर्तमान समय में दूषित हो रही है और भारत के लोग गलत दिशा में जा रहे है. विश्व का सर्वश्रेष्ठ ज्ञान भारत में ही है.

GVS_5098सम्मेलन के स्वागताध्यक्ष पुरूषोत्तम हिसारिया ने कहा कि मंच अपने कार्यों द्वारा स्वदेशी संस्कृति व ज्ञान की गंगा बहा रहा है. सुदुर क्षेत्रों से आए सभी कार्यकर्ता विषम परिस्थितियों में स्वदेश प्रेम, अपनी संस्कृति का रक्षण करते हुए लोगों को जगाने का कार्य कर रहे हैं.

मंच के राजस्थान संयोजक भागीरथ चौधरी ने बताया कि राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान तीन दिनों तक सभी स्वदेशी कार्यकर्ता विभिन्न ज्वलंत विषयों पर चर्चा करेंगे तथा नैराबी व पैरिस सम्मेलन के दौरान लिए गए निर्णयों पर गहन मंथन करेंगे. केन्द्र और प्रदेश सरकार के सम्मुख अपने पक्ष का प्रस्ताव भेजेंगे.

राष्ट्रीय सम्मेलन के द्वितीय सत्र में सतत विकास-समय की मांग विषयक प्रस्ताव पारित किया गया. ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन हर बीतते वर्ष के साथ बहुत तेजी से क्रूर एवं नुकसानदेह होता जा रहा है. वर्ष 2015 अभिलेखों के अनुसार अभी तक का सबसे गर्म वर्ष था. यदि हम गत 150 वर्षों के सबसे गर्म 15 वर्षों की सूची बनाएं तो वे समस्त 15 वर्ष सन 2000 के बाद अर्थात 21वीं शताब्दी के ही होंगे. यह तथ्य 21वीं शताब्दी में ग्लोबल वार्मिंग की समस्या की गंभीरता को दर्शाता है. भूमंडल के बढ़ते हुए तापमान से गंभीर मौसमी आपदाएं जैसे कि कुछ सीमित क्षेत्रों में तेज और भारी वर्षा, नवम्बर एवं दिसम्बर माह में चैन्नई और इसके आस पास के इलाके में देखी गयी एवं देश के बाकी हिस्सों में गंभीर सूखे की समस्या के प्रकोप में लगातार वृद्धि के आसार दिखायी दे रहे हैं. चैन्नई में आई बाढ़ ने प्रकृति के रोष के समक्ष मानव की लाचारी एवं मानवीय संस्थाओं की असफलता को दृष्टिगत कराया है. अगर साल दर साल, इसी प्रकार से अनेक नगर एक साथ प्राकृतिक आपदा के कारण मुश्किल में आते हैं, तब कौन किसकी सहायता कर पायेगा?

GVS_4803सम्पूर्ण विश्व अपनी ही गल्तियों का स्वयं ही शिकार बन चुका है. अस्थायी विकास का मॉडल जो पश्चिमी  देशों  में सन 1850 से प्रारम्भ हुआ और जिसका विश्व के सभी देशों  ने बिना सोचे समझे अनुसरण किया, यही इस वैश्विक जलवायु संकट का प्रमुख कारण है. विकास का पश्चिमी मॉडल टिकाऊ नहीं है क्योंकि 160 वर्षों के छोटे से कालखंड में ही सम्पूर्ण विश्व को इस विनाश के कगार बिन्दु पर ले आया है. आज के वैश्विक तापमान में औद्यौगिक क्रान्ति से पूर्व के वैश्विक तापमान से मात्र 1° की वृद्धि ही हुई है. जलवायु स्थिति हमारे नियन्त्रण से बाहर होती है, तो भविष्य में वैश्विक तापमान में यदि 2° या अधिक की वृद्धि होती है, तो क्या होगा?

विकास का पश्चिमी  मॉडल उसी प्रकार के लचर असीमित उपभोग के मॉडल पर आधारित है और इस पर ही मजबूती से निर्भर करता है. यह लालच और अदूरदर्शिता है. WWF द्वारा तैयार की गई लिविंग प्लेनेट रिपोर्ट – 2014 का स्पष्ट कहना है कि सन 1970 से विश्व के जंगली जानवरों की आधे से अधिक संख्या उनका अधिक और अवैद्य शिकार किए जाने, उनके मारे जाने और उनके रहने के स्थान में आए संकुचन के चलते कम हुई है. यदि सम्पूर्ण विश्व अमेरिका की भांति संसाधनों के अत्यधिक उपभोग के स्तर को बनाए रखता है तो हमें संसाधनों की आपूर्ति के लिए चार और पृथ्वियों की आवश्यकता पड़ेगी. इस कथन से सिर्फ पश्चिमी जीवन शैली का खोखलापन सिद्ध होता है.

स्वदेशी विकास की अवधारणा भविष्य में आने वाली पीढ़ियों की भी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए औचित्यपूर्ण उपभोग की वकालत होती है. आज समय की मांग है कि न केवल भारत अपितु पूरे विश्व को विनाश से बचाने के लिए सहस्राब्दी से प्रमाणित एवं सफलतापूर्वक संचालित स्वदेशी की विकास की अवधारणा और जीवन शैली को अपनाया जाए.

जोधपुर (राजस्थान) में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन मांग करता है कि –

1. टिकाऊ विकास का भारतीय मॉडल एवं जीवन शैली से संबंधित विभिन्न आयामों पर विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों द्वारा व्यापक एवं स्तरीय शोध कार्य को प्रोत्साहन दें.

2. विशेषकर विश्वविद्यालद्यों एवं विषय पर स्वयंभू तज्ञयों के बीच शोध के परिणामों को व्यापक रूप से प्रचारित और प्रसारित करें.

3. शोध के परिणामों के आलोक में सरकार की विकास प्राथमिकता निश्चित हो.

4. COP 21 को भारत सरकार द्वारा सौंपी गई INDC के अनुरूप अक्षुण ऊर्जा स्रोतों को प्राथमिकता दी जाए.

5. जैविक खेती एवं पशुपालन को प्रचारित एवं प्रसारित करने हेतु योग्य कदम उठाया जाए.

6. वृक्षारोपण, विशेषकर स्वदेशी किस्म के फलदार वृक्षों का व्यापक आंदोलन चलाया जाए, ताकि वन जीव-जंतुओं को पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध रहे.

स्वदेशी जागरण मंच देश की जनता से भी विशेषकर स्वदेशी कार्यकर्ताओं से अनुरोध करता है कि वे प्रकृति के प्रति संवेदनशील उद्यमता एवं जीवन शैली को अपनाएं.

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