विपरीत परिस्थितियों में ओमप्रकाश जी ने किया असाधारण काम – डॉ. कृष्ण गोपाल जी Reviewed by Momizat on . संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्व. ओमप्रकाश की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्व. ओमप्रकाश जी की स्मृति में गुरुवार को निराला नगर संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्व. ओमप्रकाश की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्व. ओमप्रकाश जी की स्मृति में गुरुवार को निराला नगर Rating: 0
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    विपरीत परिस्थितियों में ओमप्रकाश जी ने किया असाधारण काम – डॉ. कृष्ण गोपाल जी

    संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्व. ओमप्रकाश की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्व. ओमप्रकाश जी की स्मृति में गुरुवार को निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया.

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि ओमप्रकाश जी 21 वर्ष की उम्र में संघ के प्रचारक निकले और 73 वर्षों तक संघमय जीवन जीया. वे जब संघ के प्रचारक निकले विपरीत परिस्थितियां थीं. ऐसे समय में दृढ़ संकल्पित व्यक्ति ही ऐसा जीवन ‘जी’ सकता है. उस समय मोटर साइकिल होगी, इसकी कल्पना नहीं की जा सकती थी. इनके जीवन की प्रेरणा से अनेक स्वयंसेवक निकले.

    उन्होंने कहा कि ओमप्रकाश जी साहसी और परिश्रमी थे. वे सैकड़ों किलोमीटर सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में पैदल चले होंगे. उनका जीवन असाधारण था. वे करुणा के अवतार थे. वे दूसरे के दुःख और पीड़ा को सुनकर द्रवित हो जाते थे, उनकी आंखों से झर-झर अश्रुपात होने लगता था. संघ की प्रथम पीढ़ी ऐसी ही संवेदनाओं को लेकर आगे बढ़ी. ऐसे प्रचारकों के जीवन से हजारों स्वयंसेवकों ने प्रेरणा ली.

    रचनात्मक कार्यों के बारे में सोचते थे ओमप्रकाश जी – योगी आदित्यनाथ

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्व. ओमप्रकाश जी ने आजीवन स्वयंसेवक व प्रचारक के रूप में जीया. वे कहा करते थे ‘व्यक्ति का जैसे जन्म है, वैसे ही मरण है.’ वे निरन्तर रचनात्मक कार्यों के बारे में सोचते रहते थे. उन्होंने गोरक्षा के साथ उसके आर्थिक पक्ष पर भी विचार किया. वे अनेक संगठनों के जनक थे.

    सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में भी संघ को खड़ा किया – त्रिवेन्द्र रावत

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि स्व. ओमप्रकाश जी ने उत्तराखंड के सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में भी संघ को खड़ा किया. वे एक झोला लेकर चलते थे. बताते थे – यह झोला संघ का पूरा कार्यालय है. उनके कर्मों से हम लोग सीखते थे. उत्तराखंड में गौ से पंचगव्य बनाने का कार्य उनकी ही देन है. जब मैं प्रचारक जीवन से वापस आया तो उन्होंने कहा कि तुम्हें राजनीतिक क्षेत्र में जाना चाहिए, लेकिन इतना ख्याल रखना कि वह काजल की कोठरी है, सब कुछ सुनना और प्रमाणिकता, बुद्धि और विवेक से काम लेते रहना. उनका जीवन हम सबके लिए प्रेरणादायी है.

    विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि जो आता है, वह जाता है. यही सृष्टि है. लेकिन स्व. ओमप्रकाश जी के जो प्रेम का ढंग था, वह अविस्मरणीय है. उनका व्यक्तित्व भूतकाल और भविष्य काल में भी बना रहेगा.

    उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि स्व. ओमप्रकाश जी के मार्गदर्शन में गौरक्षा अभियान चलाकर गौमाता को बचाने का प्रयास किया गया.

    उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि स्व. ओमप्रकाश जी से मिलने पर वह गाय के दूध, गोबर व गौमूत्र से बनी सामग्री को दिखाते थे. उनकी गाय के प्रति अगाध श्रद्धा थी. उनकी अपनी कोई इच्छा नहीं थी, इसलिए उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ है. उनके बताए मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

    काम को तल्लीनतापूर्वक करने का दिया मंत्र

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख रामलाल ने कहा कि ओमप्रकाश जी ने अपने जीवन में लाखों स्वयंसेवकों तथा कई प्रचारकों को प्रेरित किया. वे सच्चे कार्यकर्ता और संवेदनशील प्रचारक थे. वे कई संगठनों के जन्मदाता थे. वे कहते थे कि जो भी काम हाथ में लो, उसे डूबकर करो.

    अखिल भारतीय सह पर्यावरण प्रमुख राकेश जैन ने कहा कि ओमप्रकाश जी ने संघ के सहारनपुर वर्ग में बताया था कि तन, मन व धन तीनों से देशभक्त होना चाहिए. उनमें परिश्रम की पराकाष्ठा थी.

    राष्ट्र सेविका समिति की प्रान्त कार्यवाहिका यशोधरा जी ने भी ओमप्रकाश जी के जीवन पर प्रकाश डाला. अखिल भारतीय सह गौ सेवा प्रमुख अजित महापात्रा जी ने कहा कि ओमप्रकाश जी ने देश भर में गौ आधारित कई उत्पादों को बनाने के लिए प्रोत्साहित किया. वे ‘गौ’ ऋषि थे.

    क्षेत्र कार्यवाह रामकुमार जी ने कहा कि स्व. ओमप्रकाश जी 1944 में संघ से जुड़े और 1947 में प्रचारक बने. उनका जन्म हरियाणा के पलवल जिले में 1927 में हुआ था. उनकी शिक्षा दीक्षा मथुरा में हुई. वह अतरौली (अलीगढ़) के तहसील प्रचारक रहे. इसके बाद 1957 से 67 तक बिजनौर के जिला प्रचारक रहे, फिर बरेली के जिला प्रचारक होकर मुरादाबाद एवं कुमाऊं विभाग प्रचारक 1978 तक रहे. 1978 से पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रांत प्रचारक रहे. तब उत्तर प्रदेश में केवल दो ही प्रान्त थे. इसके बाद ओमप्रकाश जी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक और फिर संयुक्त क्षेत्र प्रचारक रहे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख भी रहे. ओमप्रकाश जी 1948 में संघ पर प्रतिबंध तथा आपात काल में जेल गए. उनका पूरा जीवन कठोरत्तम रहा. उन्होंने जिस भी संगठन में हाथ लगाया, वह यशस्वी बना.

    सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत द्वारा भेजे शोक संदेश को पढ़ा गया. पद्मश्री ब्रह्मदेव भाई ने ओमप्रकाश जी के जीवन पर प्रकाश डाला. वरिष्ठ प्रचारक ओमप्रकाश जी का रविवार को किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज में निधन हो गया था.

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